स्वप्नदोष

कल रात स्वप्न में वो मेरे आई, धीरे से रजाई उसने मेरी सरकाई |
रखा तब सर उसने सीने में मेरे, बैठी जब आकर पास सिरहाने मेरे |
मैं अब कुछ गुनगुनाने लगा था, उसकी खुली जुल्फों में बहकने लगा था |
होश में आकर मैं उसे देख पाता, उत्तेजना से तभी स्खलित हो जाता |
स्वप्नदोष एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया हैै, इस बात से लांछित न होना |
नींद एक प्राकृतिक क्रिया है यह बात याद रखना सभी |
स्वप्नदोष मनोदैहिक क्रिया है इस बात से न शरमाना कभी |


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