स्वप्नदोष

कल रात स्वप्न में वो मेरे आई, धीरे से रजाई उसने मेरी सरकाई |
रखा तब सर उसने सीने में मेरे, बैठी जब आकर पास सिरहाने मेरे |
मैं अब कुछ गुनगुनाने लगा था, उसकी खुली जुल्फों में बहकने लगा था |
होश में आकर मैं उसे देख पाता, उत्तेजना से तभी स्खलित हो जाता |
स्वप्नदोष एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया हैै, इस बात से लांछित न होना |
नींद एक प्राकृतिक क्रिया है यह बात याद रखना सभी |
स्वप्नदोष मनोदैहिक क्रिया है इस बात से न शरमाना कभी |

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन…

Responses

New Report

Close