हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे

  1. हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे,

    कोई जख़्म फिर से नया तो न दोगे।
     
    हसीं वादियों के सपने दिखाकर,
    कहीं यार तुम भी दग़ा तो न दोगे।
     
    हिफ़ाजत का कर के बहाना कहीं तुम,
    दिया जिन्दगी का बुझा तो न दोगे।
     
    निहां राज़ ए दिल गर बता दूँ तुम्हें तो,
    नजर से तुम अपनी गिरा तो न दोगे।
     
    अगर याद आयी किसी दूसरे की,
    मुहब्बत मेरी तुम भुला तो न दोगे।
     
    भरोसे पे तेरे किए जो भरोसा,
    उसे ख़ाक़ में तुम मिला तो न दोगे।
     
    बड़ी मुश्किलों से सम्हाला है मैंने,
    मुहब्बत की कश्ती डुबा तो न दोगे।
     
    मुझे ख़ौफ़ यूँ बिजलियों का बताकर,
    खुद अरमान दिल के जला तो न दोगे।
     
    ‘मिलन’ छोड़ जाओ मेरे हाल मुझको,
    मुकद्दर का लिक्खा मिटा तो न दोगे।
                               ———मिलन..
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7 Comments

  1. Shivesh Agrawal Nanhakavi - September 30, 2016, 8:10 am

    Bahut khoob gajal

  2. Anjali Gupta - September 30, 2016, 4:13 pm

    beautiful poem Milan ji

  3. Anirudh sethi - September 30, 2016, 5:25 pm

    Nice

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