हम तुम्हें भूल गये!

हम तुम्हें भूल गये!
यह गलतफहमी पालकर बैठे थे
एक दिन आ गये तुम
अचानक सामने
तब से दिल हार कर बैठे हैं..


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12 Comments

  1. Piyush Joshi - October 17, 2020, 9:22 pm

    बहुत खूब

  2. Anu Singla - October 17, 2020, 9:37 pm

    NICE

  3. Suman Kumari - October 17, 2020, 10:40 pm

    सुन्दर

  4. Geeta kumari - October 18, 2020, 5:46 am

    बहुत खूब

  5. Satish Pandey - October 18, 2020, 7:52 am

    वाह कवि प्रज्ञा जी की कलम से प्रस्फुटित बेहतरीन रचना

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:20 pm

    अतिसुंदर

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