हवा में घुल रहा आज जहर है

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हवा में घुल रहा आज जहर है
सांसो को आज तरस रहा आज शहर है

बंद कमरे में कब तक कैद रहोगे
खुले आम घूम रहा आज कहर है

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4 Comments

  1. Ashmita Sinha - November 21, 2018, 8:37 am

    Nice

  2. ज्योति कुमार - November 22, 2018, 7:55 am

    Waah

  3. Neha - November 25, 2018, 3:39 pm

    good attempt

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 10:28 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

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