हवा में घुल रहा आज जहर है

हवा में घुल रहा आज जहर है
सांसो को आज तरस रहा आज शहर है

बंद कमरे में कब तक कैद रहोगे
खुले आम घूम रहा आज कहर है


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5 Comments

  1. Ashmita Sinha - November 21, 2018, 8:37 am

    Nice

  2. ज्योति कुमार - November 22, 2018, 7:55 am

    Waah

  3. Neha - November 25, 2018, 3:39 pm

    good attempt

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 10:28 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 30, 2019, 4:24 pm

    Nice

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