हाथों की लकीरें

ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में,
ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता..
तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर,
तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता..

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Responses

    1. आपकी सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏 आपकी समीक्षा से बहुत उत्साह वर्धन होता है सर ..

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