हिंदी हम तुझ से शर्मिंदा हैं

हिंदी हम तुझ से शर्मिंदा हैं

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसे
महिलाओं के माथे से बिंदी जैसे

कभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोग
अब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसे

लगा है चसका जब से लोगों अंगरेजियत अपनाने का
अपने संस्कारों को दे दी हो तिलांजलि जैसे

अब तो हाय बाय के पीछे हिंदी मुँह छिपाती है
मात्र भाषा हो के भी लज्जित हो रही हो जैसे

है गौरव हमें बहुत आज एक शक्तिशाली देश होने का
पर अपनी पहचान हिंदी को हमने भूला दिया हो जैसे

आज हिंदी दिवस पर हमें हिंदी याद आयी एसे
हमारे पूर्वजों को दे रहे हो श्रद्धांजलि जैसे

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसे…


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12 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - September 13, 2019, 11:00 am

    Sahi baat

  2. राम नरेशपुरवाला - September 13, 2019, 12:03 pm

    वाह

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 13, 2019, 12:05 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. Poonam singh - September 13, 2019, 1:04 pm

    Nice

  5. देवेश साखरे 'देव' - September 13, 2019, 1:14 pm

    सुंदर रचना

    • Archana Verma - September 14, 2019, 8:16 pm

      dhnyawad Devaesh Ji apka sub ka yahi protshana mujhe roz kuch naya likhne ko prerit karte rahega

  6. Archana Verma - September 14, 2019, 8:17 pm

    ap sub ko kridya ki gehraeyon se Dhanyawad. aage bhi aise protasahan badhate rahe .
    aur haa koi truti ho toh wo bhi nihsankoch bataye

  7. Abhishek kumar - December 23, 2019, 10:21 am

    Awesome

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