हिन्दी गजल- बंजर भूमि की रोटी |

हिन्दी गजल- बंजर भूमि की रोटी |

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हिन्दी गजल- बंजर भूमि की रोटी |
बहारों के मौसम गुल खिल जाये दिखाना मुझे |
बागो फूल भवरा गर मिल जाये दिखाना मुझे |
जहर भर दिया फिज़ाओ मिल हमने और तुमने |
मिट्टी बीज अंकुर गर निकल आए दिखाना मुझे |
गोबर खाद मिल मिट्टी पैदावार बढ़ाती थी कभी |
यूरिया फास्फेट जमी खिल जाये दिखाना मुझे |
गाय बैल और जानवर अब कोई पालता ही नहीं |
ट्रेकटर मशीन खेती गर बढ़ जाये दिखाना मुझे |
तालाब कुआ पोखर युही नहीं खोदवाते थे लोग |
बिना इनके जमी पानी मिल जाये दिखाना मुझे |
जमी की नमी जरूरी है खेती किसानी के लिए |
बिना पानी खेत बीज उगने लगे दिखाना मुझे |
खाद रासायन जितना मिलाओगे जहर खाओगे |
शब्जी बुझी जहर खा कोई हँसता मिले दिखाना मुझे |
हमारी लापरवाही मिट्टी की जान जा रही अब |
बंजर भूमि की रोटी कोई खाता मिले दिखाना मुझे |
श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
मोब /वाहत्सप्प्स -995550928
Email – shymakunvarbharti@gmail.com

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6 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - October 10, 2019, 2:01 am

    वाह

  2. राही अंजाना - October 10, 2019, 9:41 am

    वाह

  3. Poonam singh - October 10, 2019, 7:26 pm

    Good

  4. NIMISHA SINGHAL - October 11, 2019, 12:10 am

    क्या खूब

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