हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा

हे। कृष्ण
तुम्हें फिर आना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा
फुफकारों से भरी वसुंधरा
आकर उसे मिटाना होगा
विष फैलाते असंख्य कालिया
आकर मर्दन दिखाना होगा
काट शीश को दुष्ट पापियों के
सुर्दशन तुम्हें चलाना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
आस्तीनों में सांप पल रहे
रिश्ते-रिश्तों को नित डस रहे
किसे बताएं अपना साथी
किस पर हम विश्वास करें
हर रिश्ता, अब कंस बन गया
अब कैसे उसे निभाना होगा
रिश्तों में अब कंस समाया
आकर तुम्हें मिटाना होगा
मानवता की साख बचाने
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
एक दुशासन मरा, कुरुक्षेत्र रण
असंख्य दुशासनों ने जन्म लिया
तब एक अकेली थी, द्रौपदी
उसकी लाज बचा डाली
कितने चीरहरण नित होते
मानवता हुई धरा से खाली
आकर लाज बचाओ हरि तुम
तुमको रूप दिखाना होगा
एक नहीं, दो-चार नहीं
अनगिनत चक्र चलाना होगा
लाज बचा लो सुताओं की
तुमको शस्त्र उठाना होगा
मनुष्यों को राह दिखाने
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
Dharamveer Vermaधर्म

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6 Comments

  1. ashmita - August 15, 2019, 10:45 pm

    Nice

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 17, 2019, 11:49 pm

    वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  3. देवेश साखरे 'देव' - September 20, 2019, 11:53 am

    सुंदर रचना

    • Dharamveer Verma - September 20, 2019, 12:06 pm

      आपका हृदय से आभार मित्र। बहुत-बहुत धन्यवाद मित्र।

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