हे ऊपरवाले ! तू अब तो जाग..

कूड़ाघर: रसोईंघर
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मैं अक्सर सोंचा करती थी
आजकल कोई गरीब नहीं…
सब अपने आप में सक्षम हैं
इस दुनिया में अब कोई
असहाय नहीं…
परंतु एक दृष्य देखकर भर आईं मेरी आँखें
मुझको विश्वास ही नहीं हुआ जो देखीं मेरी आँखें
एक बालक छोटे कद का था,
भूंखा था और प्यासा था
कूड़ेदान में बड़ी देर से
जाने क्या ढूंढ रहा था
मेरी उत्सुकता बढ़ी,
मैं वहीं रही कुछ देर खड़ी..
उसने एक पॉलीबैग उठाया
सड़ा हुआ-सा खाना खाया,
चेहरे पर उसके थी इतनी खुशी,
मानों गड़ा हुआ हो सोना पाया…
तब तक वहाँ पर एक आया कुत्ता,
जिसको देख के सहम गया वह बच्चा…
छीन लिया उसने वह खाना,
बिखर गया हर दाना-दाना…
वाह री किस्मत ! वाह रे भाग !
हे ऊपरवाले ! तू अब तो जाग…

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