होश अब नहीं रहा…

होश अब नहीं रहा इंसानियत का,
बेसुध से सब हो गए हैं ,
जाने कैसा है यह नशा
अपने भी गुम हो गए हैं।

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नशा

यह नशा वोह नशा इसमे नशा उसमें नशा नशे में नशा सबसे रंगीन नशा रुक जाओ ज़रा इतनी जल्दी क्यों है तुमने वोह नशा चखा…

Responses

  1. वास्तव में लोभ , अहंकार के नशें में सबकुछ बदलाव की कगार पर है
    बहुत ही सुंदर पंक्तियां

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