ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में

ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में
हर गूंठ में मुहं कढवा होता गया|
बारिशों का तो आना जाना नहीं अरसे से
सूखे से रिश्ता हमारा होता गया||

Published in शेर-ओ-शायरी

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