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‘Poetry on Picture’: सावन काव्य प्रतियोगिता (Result)

Trending Poets @Saavan

सर्वश्रेष्ठ कवि :  सतीश पांडेय 
सर्वश्रेष्ठ आलोचक व सदस्य : गीता कुमारी



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Latest Activity

  • Noorie Noor changed their profile picture 1 day, 15 hours ago

  • लब कहे या न कहे
        दिल यही कहता है
    मेरे दिल मे बस तू ही रहता है
    दर्द बढे या दर्द घटे
         बस दिल यही कहता है
    इस दर्द में भी तू ही रहता है
        तुमसे लड़ूं या चुप रहूं
    पर अरमान यही कहते है
        मेरा हमसफर […]

  • आसाँ   नहीं   समझना  हर  बात आदमी के,
    कि  हँसने  पे  हो  जाते वारदात आदमी  के।
    सीने   में  जल रहे है  अगन  दफ़न  दफ़न से ,
    बुझे   हैं  ना   कफ़न  से अलात आदमी   के?

    ईमां   नहीं   है जग   पे  ना खुद पे  है  भरो […]

  • शब्द चाहे सरल हों,
    या फिर हों जटिल
    हृदय को करें प्रसन्न
    तो अर्थ है,
    वरना सब व्यर्थ है।
    यदि आपके शब्द,
    किसी के ह्रदय को करें स्पर्श
    तो समझो वाणी और कलम में,
    सरस्वती विद्यमान है..
    वरना बोलती तो सभी की ज़ुब […]

    • अतिसुंदर भाव

    • शब्द चाहे सरल हों,
      या फिर हों जटिल
      हृदय को करें प्रसन्न
      तो अर्थ है,
      वरना सब व्यर्थ है।
      ——– कवि गीता जी की बहुत सुन्दर पंक्तियाँ। कथ्य व शिल्प दोनों ही बेहतरीन हैं।

      • उत्साहवर्धक और सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।

    • सही कहा आपने
      बहुत सुन्दर

  • मुस्कुराहट
    प्रकृति की
    सुबह सुबह दिखती है
    उठो जागो
    जाग भी जाओ कहती है।
    साथ में चिड़ियों की
    चहचहाहट भी
    संगीत की लय में रहती है।

    • प्रातः काल की बेला का बहुत ही सुन्दर चित्रण प्रस्तुत किया है कवि पीयूष जी ने अपनी कविता में। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • बहुत खूब

  • ईश्वर केवल पूजा से
    प्रसन्न नहीं होते हैं,
    वे प्राणिमात्र की सेवा से
    प्रसन्न हुआ करते हैं।
    किसी तड़पते राही को
    गर बिना मदद के छोड़ दिया
    फिर चाहे कितनी पूजा हो
    मुँह मोड़ लिया करते हैं।
    रोते दीन-हीन भूखे के […]

    • बहुत खूब

    • अतिसुंदर अभिव्यक्ति

    • जीवन की सच्चाइयों से अवगत करवाते हुई कवि सतीश जी की बेहद उत्कृष्ट रचना है यह,”रोते दीन-हीन भूखे के आँसू यदि हम पोछ सकें
      दूजे के हित में भी यदि हम थोड़ी बातें सोच सकें,
      तब समझो सच्ची पूजा करने में हुए सफल हम हैं,”
      _____एकदम सत्य और सटीक कथ्य, अनुभूति की लाजवाब अभिव्यक्ति। उम्दा लेखन..

  • रास्ता हूँ मैं
    युगों युगों से
    लोग चलते आये हैं मुझ पर
    न जाने कितने पदचापों की
    ध्वनि को मैंने सुना है।
    न जाने कितनों ने
    चल कर मुझ पर सपनों को बुना है,
    लोग आते रहे, जाते रहे
    नए उगते रहे
    प […]

    • आने और जाने का गवाह हूँ मैं
      चलती जिन्दगी का प्रवाह हूँ मैं
      ____रास्ते का मानवीकरण बहुत ही खूबसूरती से किया है सतीश जी आपने।……”आने पर खुशी और जाने पर आँसू बहता रहा
      पदतलों से दबते-दबते ठोस बनता रहा,’ बहुत सुंदर शिल्प,कथ्य और ख़ूबसूरत भावनाओं के साथ बेहतर प्रस्तुति। उम्दा लेखन

    • बहुत खूब सर

    • “.वे मुझे निर्जीव समझते रहे
      मैं उन्हें अस्थिर समझता रहा।”
      वाह वाह क्या बात है पाण्डेयजी। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • बहुत सुन्दर लिखा

  • निर्भय आगे बढ़ता चल,
    कोई रोके कोई टोके,
    किसी की बात से ना जल।
    किसी को देख कर बढ़ते,
    अक्सर लोग करते छल।
    कंटक बिछाने राहों में,
    कुछ हाथ आएंगे
    तो कंटक हटाने राहों से,
    कुछ साथ आएंगे
    उन्हें […]

    • ” कंटक बिछाने राहों में,
      कुछ हाथ आएंगे
      तो कंटक हटाने राहों से,
      कुछ साथ आएंगे
      उन्हें साथ लेकर चल,”
      बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सामाजिक चेतना जागृत करने में कारगर साबित होती हुई आपकी कविता अत्यन्त सुंदर है।

      • इतनी सुन्दर और प्रोत्साहन देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏 बहुत-बहुत आभार। आपका आशीष बना रहे

    • निर्भय आगे बढ़ता चल,
      कोई रोके कोई टोके,
      किसी की बात से ना जल।
      ——कवि गीता जी की सुन्दर कविता, बेहतरीन अभिव्यक्ति

      • बहुत सुंदर और उत्साह वर्धन करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

    • बहुत सुंदर लेखन

  • अब सूर्य उत्तरायण में चले गए हैं,
    अहो! ठंडक अब तो कम हो जा,
    ठिठुरते हुए बडी मुश्किल से खुद की,
    जिन्दगी को अब तक रख पाया हूँ बचा।
    गलतियां जितनी भी हैं पूर्वजन्म की,
    लेकिन अब तो बहुत हो गई
    इस मौसम में सजा, […]

    • सूर्य उत्तरायण में चले गए हैं,लेकिन सर्दी कम होने का नाम नहीं ले रही है, ऐसी हालत में कोई गरीब व्यक्ति सड़क पर बहुत परेशान है, उसी अनुभूति को बताती हुई कवि सतीश जी की, गरीब व्यक्ति की कठिन सर्दी पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई रचना। उच्च स्तरीय लेखन

    • अतिसुंदर अभिव्यक्ति

  • खिलौना मत समझना
    किसी धनहीन को तुम
    मन चले तोड़ दिया
    मन चले जोड़ लिया।
    भूख पर वार करके
    दबाना मत उसे तुम,
    दिखाकर लोभ-लिप्सा
    दबाना मत उसे तुम।
    सरल, कोमल व भोला
    मुफलिसी का हृदय है,
    दिखाकर शान अपनी […]

    • “संपदा देखकर तुम मनुज को तोलना मत।..
      धन नहीं मन का मानक सदा यह भान रखना।”
      कभी भी किसी की धन संपदा देखकर प्रभावित नहीं होना चाहिए, वरन् उसका व्यवहार देखकर प्रभावित होना चाहिए, इसी उच्च स्तरीय सोच को प्रस्तुत करती हुई उत्कृष्ट कथ्य और सुन्दर शिल्प लिए हुए कवि सतीश जी की बहुत उत्तम रचना,उम्दा लेखन

    • अतिसुंदर भाव

  • कोहरा घूम रहा है पथ पर,
    बाहर जाते लगता है डर।
    धूप सखी भी आज ना आई,
    दिनकर छिपे रहे हैं दिन भर।
    तारे भी सो रहे ओढ़ के चादर,
    चन्द्र भी ना आए निज,
    घर से बाहर निकल कर।
    सर्दी का सितम है छाया,
    पूस का महीना आया।।
    ____✍️गीता

    • कोहरा घूम रहा है पथ पर,
      बाहर जाते लगता है डर।
      धूप सखी भी आज ना आई,
      दिनकर छिपे रहे हैं दिन भर।
      —– कवि गीता जी की वर्तमान कुहरे से भरे मौसम पर बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ। शिल्प और भाव का सुन्दर समन्वय

    • सुन्दर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी , बहुत-बहुत आभार सर

    • अतिसुंदर रचना

  • बुलंद वाणी रखो
    बुलंद सोच रखो
    न रह किस्मत भरोसे
    कर्म की ओर बढो।
    ध्येय ऊँचा ही रखो
    औऱ दिल साफ रखो
    त्याग सब हीनता को
    तेज नजरों में रखो।
    भले तूफान आयें
    या पड़े तेज बारिश
    एक भी बूँद या कण
    छूँ न […]

    • “कर्म की ओर बढो।ध्येय ऊँचा ही रखो..
      बढ़ाना उच्च पथ पर निडर बढ़ते कदम हो”।
      कर्म पथ की ओर अग्रसर करती कवि सतीश जी बहुत ही प्रेरक पंक्तियां और उच्च विचारों की तरफ निडरता से कदम बढ़ाने को प्रेरित करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना । लाजवाब अभिव्यक्ति, उत्तम लेखन

    • अतिसुंदर रचना

  • मुक्तक-खाएंगे
    ——————
    अब बनाने वाले ही खाएंगे ,
    कोई खाने वाला रहा नही,
    लगता है, सब दावत मे गए,
    या घर सब, रुठ के छोड़ गए
    पर गए कहां यह पता नही,
    पता होता तो हम उन्हें बुलाते,
    अब घर सूना सूना ल […]

  • जो मन में है तुम उसे कहो ना
    न बोलो चुपड़ी सी बात ऐसे
    दिखावा करके दिलों का नाता
    बताओ कैसे निभा सकोगे।
    भरा है नफरत का भाव भीतर
    अधर हैं बाहर खिले हुए से
    ये दो तरह के दबाव लेकर
    व्यवहार कैसे निभा सकोगे।
    निभा ल […]

    • धोखे और नफ़रत के साथ किसी भी व्यक्ति का भला नहीं हो सकता है
      “दिखावा करके सखा का फिर तुम दगा करोगे, बताओ कैसे,
      बिठा के दिल में छुरा चला दो जमीर देगा सलाह कैसे।” …आह! ,वाह!,बहुत खूब ,जीवन में धोखा देने वाले लोगों से सावधान करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही उच्च स्तरीय रचना, लाजवाब अभिव्यक्ति और शानदार प्रस्तुति

    • बहुत खूब

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आधुनिक कवियों को एक मंच उपलब्ध कराना ही हमारा प्रयास है, जहां नवीन प्रतिभाओं को उपयुक्त पहचान और सम्मान दिया जा सके। इसके साथ ही हम आधुनिक साहित्य की बिखरी हुई अनमोल रचनाओ का संकलन करना चाहते है ताकि अगली पीढ़ी इस अनमोल धरोहर का आनंद और लाभ ले सके|

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