Ajay Nawal, Author at Saavan - Page 2 of 2's Posts

चाँद के शौक मे

चाँद के शौक मे तुम छत पे चले मत जाना शहर में ईद की तारीख बदल जाएगी »

गया चंद लफ़्जों में आज

सिमट गया चंद लफ़्जों में आज

सिमट गया चंद लफ़्जों में आजढल गये अहसास कुछ अश्कों मे आजकहने को तमाम जिंदगी का तजूर्बा है मेरे पाससुनने वाला कोई भी नही है आज | »

जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे

जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे

जब सोचा इक दफ़ा जिन्द्गी के बारे मे किस कदर बसर हुई जिंदगी मेरी क्यों भटकता रहा जिंदगीभर मुसाफ़िर बनकर ज्वालामुखी सा जलता रहा कभी लावे सा पिघलता रहा  आसमां को छुने की आरजू में पतगं सा हर बार कटता रहा हाथों की लकीरों से लडता था कभी में अब उन लकीरों मे ही ढ़लता रहा »

बरस चला सारे साल का सावन

बरस चला सारे साल का सावन

सिमट कर आ गये सारे अहसास आज आंखों में बरस चला सारे साल का सावन, आज रुखसारों पर  »

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