ओमप्रकाश चंदेल, Author at Saavan - Page 2 of 5's Posts

तिरंगा हमारा भगवान है

तिरंगा हमारा भगवान है

तिरंगा बस झण्डा नहीं हम सब का सम्मान है। तिरंगा कोई कपडा नहीं पूरा हिन्दुस्तान है।। तिरंगा कोई धर्म नहीं सब धर्मों की जान है। तिरंगा बस आज नहीं पुरखों की पहचान है।। तिरंगा बस ज्ञान नहीं ज्ञान का वरदान है। तिरंगा कोई ग्रंथ नहीं पर ग्रंथों का संज्ञान है॥ तिरंगा में दंगा नहीं हिन्दु और मुसलमान है । तिरंगा कोई गीत नहीं प्रार्थना और अजाने है॥ तिरंगा कोई मानव नहीं मानवता की पहचान है। तिरंगा में जाति-धर्... »

क्या आप राष्ट्र वादी हैं?

क्या आप राष्ट्र वादी हैं?

आज सुबह से मैं, राष्ट्रवादी खोज रहा हूँ। कौन-कौन है देशभक्त ये सोच रहा हूँ॥ सुबह-सुबह किसी ने दरवाजा खटखटाया, देखा तो कन्हैया आया। उसके हाथ में दूध के डिब्बा था। उसके पास अपना ही किस्सा था। देखकर -मुझे कहने लगा कवि साहेब- बर्तन लेकर आओ। चुपचाप क्यों खड़े हो, बताओ? मैं तो आज राष्ट्रवादीयों को खोज रहा हूँ। कौन-कौन है राष्ट्रवादी सोच रहा हूँ।। इसीलिए दूध वाले पूछ बैठा, कन्हैया- क्या तुम राष्ट्र वादी ... »

रहम करना ज़रा मौला

रहम करना ज़रा मौला

रहम करना ज़रा मौला, नमाजी हूँ तेरा मौला। तू ही तो मीत है मेरा, तू ही तो गीत है मेरा॥   किसी को गैर ना समझूं, किसी से बैर ना रख्खूं।। मेरा दिल बस यही चाहे, सितम कोई नहीं ढ़ाये।। नेकी ही रीत है तेरा, तू ही तो मीत है मेरा। करम ये हो मेरा मौला, रहम करना ज़रा मौला।।   भला क्या है बुरा क्या है, तेरा क्या है मेरा क्या है। लड़ाई छोड़ देना है, दिलों को जोड़ लेना है। तू ही तो जीत है मेरा, तू ही तो... »

छत्तीसगढ़ के घायल मन की पीड़ा कहने आया हूँ।

छत्तीसगढ़ के घायल मन की पीड़ा कहने आया हूँ।

मैं किसी सियासत का समर्थन नहीं करता हूँ। भ्रष्टाचार के सम्मुख मैं समर्पण नहीं करता हूँ॥ सरकारी बंदिस को मैं स्वीकार नहीं करता हूँ। राजनीति के चाबुक से भी मैं नहीं डरता हूँ।। मेरी कविता जनता के दुख दर्दों की कहानी है। मेरी कविता भोले-भाले गरीबों की जुबानी है॥ मैं कमजोरों की बातों को स्याही में रंग देता हूँ। मैं अबला के ज़ज्बातों को शब्दों में संग देता हूँ।। मैं अपने कलम से सच लिखने की ताकत रखता हूँ... »

वंदेमातरम् गाता हूँ ५

वंदेमातरम् गाता हूँ ५

              वंदेमातरम् गाता हूँ ************************************* कट्टरता की दीमक चाट गयी, आज बंगला देश को। भूल गये हो कैसे आज, मुक्ति वाहिनी के संदेश को॥ हिन्दू अस्थि भी शामिल है बंगाल की आजादी में। भारत माँ भी रोईं थी, चिटगाँव की बरबादी में॥ बंगलादेश की आजादी पर,मैं विजय दिवस मनाता हूँ॥ क्रान्ति पथ पर निकला हूँ मैं, वन्दे मातरम् गाता हूँ।।   इस्लाम के नाम पर तूने, ये कैसा उत्पात मचाया... »

और बात थी

और बात थी

बात गर खत्म हो जाती तो और बात थी। रात गर खत्म हो जाती तो और बात थी। हीर और राँझा अब भी है देश में लेकिन जात गर खत्म हो जाती तो और बात थी। ओमप्रकाश चंदेल “अवसर” पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़  »

खत्म हुई कहानी आज

खत्म हुई कहानी आज

खत्म हुई है कहानी आज बरबाद हुई जवानी आज। दुल्हन बनके चली गई है मेरे  दिल की रानी आज। नजरें झुका के रहती थी, तेरी हूँ हरदम कहती थी। गोद में सिर मैं रखता था, वजन वो मेरा सहती थी। छूट गया है उनका साथ,दिल में बाकी रह गयी याद। कानों पर गुंज रही है सिसकी भरी उसकी फरियाद । खत्म हुई कहानी…………………………… गीत प्यार के गाता हूँ, मैं तुमको भूल नहीं... »

वंदेमातरम् गाता हूँ

वंदेमातरम् गाता हूँ

नारों में गाते रहने से कोई राष्ट्रवादी नहीं बन सकता। आजादी आजादी चिल्लाने से कोई गांधी नहीं बन सकता। भगत सिंह बनना है तो तुमको फांसी पर चढ़ना होगा। देश के लिए कुछ करना है तो हँसते-हँसते मरना होगा॥ संग आओ तुम भी मेरे, मैं सरहद पर गोली खाता हूँ। क्रांति पथ पर निकला हूँ मैं वंदेमातरम् गाता हूँ।। नारों में हम कहते हैं जम्मु और कश्मीर हमारा है। पंडित वहाँ से बेघर हो गये, क्या यही भाईचारा है।।अपमान तिरं... »

मोर रंग दे बसंती चोला, दाई रंग दे बसंती चोला

मोर रंग दे बसंती चोला, दाई रंग दे बसंती चोला

ये माटी के खातिर होगे, वीर नारायण बलिदानी जी। ये माटी के खातिर मिट गे , गुर बालक दास ज्ञानी जी॥ आज उही माटी ह बलाहे, देख रे बाबु तोला। मोर रंग दे बसंती चोला, दाई रंग दे बसंती चोला॥ ये माटी मा उपजेन बाढ़ेन, ये माटी के खाये हन। ये माटी कारण भईया मानुस तन ल पाये हन॥ काली इही माटी मिलही, तोर हमर ये चोला। मोर रंग दे बसंती चोला, दाई रंग दे बंसती चोला।। पुराखा हमर ज्ञानी रीहीस अऊ अबड़ बलिदानी जी। भंजदेव ... »

जंजीर और मज़दूर

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