ओमप्रकाश चंदेल, Author at Saavan - Page 5 of 5's Posts

छत्तीसगढ़ी गीत “चल दिए तें कोन देश

छत्तीसगढ़ी गीत “चल दिए तें कोन देश

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रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं

रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं

रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं। द्वेष -कपट सब त्याग कर आज फकीरा बन जाएं। कोयला जैसा मन लेकर भटक रहा है मारा-मारा ज्ञान अगर मिल जाए तो संवर जाएगा कल तुम्हारा। रविदास के संग चलें और हम भी हीरा बन जाएं। रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं।। क्रोध को तुम छोड़कर करम करो प्यारा-प्यारा। एक दुजे के गले लगो तो जग प्रसन्न होगा सारा। अंधकार को दुर भगा कर हम उजियारा बन जाएं। रविदास को गुरू बना कर... »

लौट आओ अपने खेतों पर

लौट आओ अपने खेतों पर

लौट आओ अपने खेतों पर अब हरित क्रान्ति लिख देंगे। उजाड़ गौशाला को सजाकर अब श्वेत क्रान्ति लिख देंगे। फिर से नाम किसानों का  लाल बहादुर शास्त्री लिख देंगे। अपनी लहू सिंचित करके माटी को अन्नदात्री लिख देगे॥ कर्ज से तुम मत घबराना धान की बाली से वादी लिख देंगे। गेहूँ मक्का गन्ना जौं  की फसलों को सोना चांदी लिख देंगे॥ बीती बात बिसार दो नई तकनीकों से अमिट कहानी लिख देंगे। खेतों पर तपने वाली माँ, बहनों को... »

न्याय बीमार पड़ी है, कानून की आँख में पानी है

न्याय बीमार पड़ी है, कानून की आँख में पानी है

अत्याचार दिन ब दिन बढ़ रहे हैं भारत की बेटी पर। रो-रो कर चढ़ रही बिचारी एक-एक करके वेदी पर ।। भिलाई से लेकर दिल्ली तक प्रतिदिन नई कहानी है। किसने पाप किया है ये, किसकी ये मनमानी है।। गली-गली, बस्ती-बस्ती में निर्भया बलिदानी है। न्याय बीमार पड़ी है अब, कानून की आँख में पानी है।। स्कुल-कालेज, आफिस, घर,  सभी जगह पर खतरा है। मानवता तो अब मर रही है सड़को पर सन्नाटा पसरा है।। कभी-कभी मर्दाना पुलिस औरतों... »

अच्छे दिन आ गए -2

अच्छे दिन आ गए -2

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अच्छे दिन आ गए -1

अच्छे दिन आ गए -1

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रोईं आँखें दबी जुबानी,मजदूरों ने कही कहानी

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मैं तो जनगायक हूँ किसानों की पीड़ा गाता हूँ

मैं तो जनगायक हूँ किसानों की पीड़ा गाता हूँ

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होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी। मस्तों की टोली आ गयी।। लाज़ शरम तुम छोड़ो। आज मुख मत मोड़ो।। दिल को दिल से जोड़ो। झूम कर अब बोलो॥ होली, रुत पर छा गयी है। मस्तों की टोली आ गयी है।। यार को गले लगा लो। रंग गुलाल उड़ा लो।। मनमीत को बुला लो। प्रीत से तुम नहा लो।। फागुन में मस्ती छा गयी है। होली, रुत पर छा गयी है। बैठ के फाग गा लो । आज नंगाड़ा बजा लो।। गोरी को भी बुला लो। गालों पे रंग लगा लो। उसकी बोली भा गयी है। ... »

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