Panna, Author at Saavan - Page 10 of 12's Posts

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन की मोम आज क्यों पिगलती गयी महकने लगा समां चांदनी खिलने लगीछुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयीवो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठाधीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी आँ... »

ये कैसा तसव्वुर

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त हैजो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं रब्तः संबंध »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल काबिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम मेंहम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस मेंएक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी »

Wait for it

by Lady of Fire »

कौन कहता है

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है (ख़लिश = चुभन, वेदना) रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है (शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश) ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है (ज़ब्त-ए-... »

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­ तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है क्या करे घर में सब लाक के सामान है ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है कोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान है घर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान है ढूढ रहा हूं खुद को, क... »

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

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एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सके ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

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