Panna, Author at Saavan - Page 8 of 12's Posts

इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है

पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है यादें आ जाती है याद बेवजह खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये जो छुपते रहे ज़हन के किसी कोने में उमड उठते है कभी कभी कागज के किसी कोने में इक नज़्म कभी कभी जाग उठती है| »

एक मुलाकात की तमन्ना मे…

एक मुलाकात की तमन्ना मे…

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे, एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे »

mushaira

Few words from Mushaira

Saavan  ये कारवां चले तो, हम भी चलेंये शम्मा जले तो, हम भी जलेंखाक करके हर पुरानी ख्वाहिश कोइक नया कदम, हम भी चलें……   कभी ठहरी सी लगती है,कभी बहती चली जाती हैजिंदगी है या पानी हैन जाने क्यों जम जाती है कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्यागुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सीइस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले     »

बचपन

ठिठुरता बचपन (October 17: Anti Poverty Day)

October 17: Anti Poverty Day सर्दी में नंगे पांव कूड़ा बटोरते बच्चे ठिठुरता बचपन उनका सिकुडी हुई नन्ही काया टाट के थैले की तरह   उनके रूदन का क्या जिक्र करू मैं लफ़्जों के कुछ दायरे होते है नहीं फैल सकते वह उनके रूदन की तरह »

क्या करें नादान है

क्या करें नादान है

ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है »

आज की शाम

आज की शाम

आज की शाम शमा से बाते कर लूंउससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं फासले है क्यों उसके मेरे दरम्याचलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगरतो ये भूल एक बार फिर से कर लूं उसके संग चला था जिंदगी की राहों मेंबिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूं परवाने को जलते देखा तो ख्याल आयाआज की शाम शमा से बाते कर लूं »

तेरी आवाज में हम डूब जाते है

तेरी आवाज में हम डूब जाते है

तेरी आवाज में हम डूब जाते हैतुझसे हम कुछ कह नहीं पाते है हाल ए दिल कैसे करें बयां अपनादिल की हर धडकन में तुझे सजाते है गालिब बना दिया हमें तेरी मोहब्बत नेतनहाइयों में भी बस तुझे गाते है यकीन है एक दिन मिलेगीं नजरें तुझसेहर लम्हा यही सोचकर बिताते है शम्मा से बस एक मुलाकात की खातिरपरवाने पागल शम्मा मे जल जाते है »

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी कभी रोती थी रेत के दरिया में अब दरिया ए अश्क में तैरती है.. »

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में कभी कोयल सी मधुर लगती है कभी बिजली की कडक सी कर्कश तो कभी बूंद बनकर बरसती है मेरे सूखे पडे ह्रदय में कभी बहा कर ले जाती है डुबा देती है समंदर के आगाज़ में कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में »

झुकी जो नजर

झुकी जो नजर

थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजरनज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी »

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