Panna, Author at Saavan - Page 9 of 12's Posts

हाल -ए- दिल

हाल -ए- दिल

हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसेतुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहे न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर मेंकितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे अनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश मेंचलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे »

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे »

डर

डर

सिमट रहा हूं धीरे धीरे इन सर्द रातों में छिपा रहा हूं खुद को खुद में इस बेनूर अंधेरे में कभी कोई चीख सुनाई देती है खामोश सी, कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट, तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज कभी कभी गिर पडते हैं ठण्डे – ठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू, कभी चल उठती है यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच, कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर कह... »

काश तुम चले आते!

काश तुम चले आते!

चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते   आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में हम उजाला अब सह नहीं पाते काश तुम चले आते | »

एक अरसे से

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए   »

रश्मि

रश्मि

धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती रवि से दूर भागती एक‘रश्मि’ अचानक टकरा गयी मुझसे आलोक फैल गया भव में ऐसे उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे सतरंगी रश्मियों से नभ सतरंगा सा हो गया सैकडो इन्द्रधनुष फैल गये नभ में पलभर में कोहरा कहीं विलीन हो गया विलीन हो गयी वो ‘रश्मि’ भी रवि के फैले आलोक में  ढूंढ रहा हूं तब से में उस‘रश्मि’को जो खो गयी दिन के उजाले में न जाने कहां गुम हो गयी मेरी वो‘रश्मि’ »

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवरन वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दियाकिस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करतादिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार र... »

जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते फूल भी उससे आजकल जलते हैतसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसकाजुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है तनहाइयों में जब सोचता हूं उनकोशब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करेंजुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

You know that I stare at you often

You know that I stare at you oftenLook at your lively smile with frozen eyesI sit behind you just few aisles awayDream about our friendship in fairy skies When I see you my sensations become silentHeart hosts an incessant whine in silenceCrazy feelings move over my mindTakes me in dreamy domain, your slight glance Your innocent beauty, your happy faceArouse flowers in my deserted homeAmidst the gl... »

Page 9 of 12«7891011»