Poonam singh, Author at Saavan - Page 4 of 6's Posts

Teri yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी , अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी , इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी , यह दुनिया विरान है बस तुझ बिन मेरी….. »

Tery yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी , अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी , इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी , यह दुनिया बिरान है बस तुझ बिन मेरी….. »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ek budhi lachar wah

एक बूढ़ी थी लाचार वह, थी भुख से बेचैन वह , बैठी थी सड़क किनारे वह, लिए हाथों में कटोरा वह, इस आस में कि पसीजे, दिल किसी का और देदे कटोरे में दो चार रु वह, पर अचंभा तो देखो , कि हो ना सका ऐसा , लोग आते रहे, लोग जाते रहे, पलट कर किसी ने देखा भी नहीं उसे , अजीब विडंबना है ईश्वर तेरी, कहीं दी इतनी गरीबी तूने तो कहीं दी जरूरत से ज्यादा अमीरी……. »

Chautha pahar

जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक जिए जा रहे हैं , जिंदगी गुजर गई सुख की तलाश में, मिली ना खुशियां जीवन के इस पड़ाव में , अब तो बस उस ईश्वर से गुजारिश है , चंद लम्हे जो बचे हैं जिंदगी के , गुजरे खुशियों की आंचल में, मिले सहारा जीवन के इस पड़ाव में…… »

Chautha pahar

जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक जिए जा रहे हैं , जिंदगी गुजर गई सुख की तलाश में, मिली ना खुशियां जीवन के इस पड़ाव में , अब तो बस उस ईश्वर से गुजारिश है , चंद लम्हे जो बचे हैं जिंदगी के , गुजरे खुशियों की आंचल में, मिले सहारा जीवन के इस पड़ाव में…… »

Chautha pahar

जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक जिए जा रहे हैं , जिंदगी गुजर गई सुख की तलाश में, मिली ना खुशियां जीवन के इस पड़ाव में , अब तो बस उस ईश्वर से गुजारिश है , चंद लम्हे जो बचे हैं जिंदगी के , गुजरे खुशियों की आंचल में, मिले सहारा जीवन के इस पड़ाव में……... »

Abla ab samjho nahi tum

अबला अब समझो नहीं तुम, हूं मैं एक चिंगारी.. लड़कों से अब कम नहीं मैं, हूं मैं सब पर भारी.. सेना क्षेत्र हो या हो पायलट… डॉक्टर वकील की तो पूछो मत तुम, हर मैदान में मैंने है बाजी मारी…| फिर भी कुछ कुछ जगहो पर होता है मेरा अपमान, उन अपमानो को रोकने की, अब आ गई है बारी | लडाई झगडे से होगा नही ये काम पूरा… बुद्धि और चतुराई कौशल से जितनी है बाजी, दहेज उत्पीड़न बाल विवाह तलाक चीरहरण को... »

Page 4 of 6«23456»