rajesh arman, Author at Saavan - Page 52 of 52's Posts

तेरे सायें से लिपटना मेरी आदत भी नहीं

तेरे सायें से लिपटना मेरी आदत भी नहीं प्यार तो दूर बहुत मैं तेरी नफरत भी नहीं क्या दबा रखा है अंदर किसी खंजर की तरह अब मरासिम न सही मगर ऐसी अदावत भी नहीं ज़ख्म गीले है अपने कहीं तो निशां रहेंगे लेकिन दिल में इक शोर है मगर ऐसी बगावत भी नहीं अपने अंदर हूँ खुद किसी अजनबी की तरह जान पहचान की मगर कोई फुर्सत भी नहीं यूँ तो मिलते है सभी अपने ही सायों की तरह हाथ तो बढ़ते है मगर ऐसी कुर्बत भी नहीं राजेश R... »

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