Shyam Das, Author at Saavan - Page 2 of 4's Posts

विकराल बन तू महाकाल बन

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता संस्कार रहे सुरक्षित सदा सौहार्द्र समन्वयक शुद्ब बहाल बन मानव की मानवता सम्मान बचा स्वयं उत्तर बन तू नही सवाल बन ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ (दिनांक -06-04-2018 »

दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए

✍?(अंदाज) ? —–($)—- ✍ दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए गम मे भी खिलखिलाना सीखिए उलझने आये चाहे जितने भी रंज मे भी मचल जाना सीखिए संताप है सब प्रारब्ध कर्मो का यह समझ सब्र लाना सीखिए लक्ष्य चुन मंजिल को पा जाओ सफलता तक खुद जाना सीखिए जीवन का गहरा अथ॔ समझकर जिंदगी सफल निभाना सीखिए आदश॔ बने यह जीवन अर्जुन प्रेरणा जग को दे जाना सीखिए ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ (दिनांक... »

हौसला बुलंद रखो धीर मन मे

✍?(अंदाज ) ?✍ —–($)—- ✍ हौसला बुलंद रखो धीर मन मे आयेगी बहार जरूर चमन मे नैराश्य को सदा ध्वस्त करो मेहनत संवारो हमेशा तन मे सर्वोच्चता सिध्द सव॔ श्रेष्ठ करो उत्साह रखो पल-पल यौवन मे सत्य धर्म न्याय उपासना बने सेवा परोपकार रहे जीवन मे कम॔ शुद्ध रख सहज लक्ष्य साधो मिलेगी सफलता ध्येय नव रण मे ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ ( दिनांक – 05-04-2018) »

विद्रूपता का सव॔ विनाश करो

✍? (अंदाज ) ?✍ ——-($)—— ✍ विद्रूपता का सव॔ विनाश करो कण -कण मे दृढ विश्वास भरो शौर्यशिलता का प्रतीक तुम बुद्धि मे विवेक गुण खास धरो चिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो सुखद सम्भाव रहे प्रयास करो घृणित बुराईयो का न वास रहे मानवीय समझ मे हर उजास भरो कम॔शीलता की गढ परिभाषा नई शुद्ध मानवीय औकात पास रखो टूटे गिरे को देकर जीवन पथ नया पथभ्रष्टो मे सच्चाई सुवास भरो ✍ श्याम दास महंत घरघोडा... »

नव पल परिवेश का अहवान हो

✍? (अंदाज )?✍ ✍ नव पल परिवेश का अहवान हो अंतर्मन मे नैतिक उत्थान हो जीवन है जग मे एक भीषण युद्ध विजय भाव का मन मे उफान हो निज लक्ष्य मिले हो सबका भला स्वभाव मे ये गुण सव॔ पहचान हो आगाज हो रणकुशलता से सव॔त्र धरती के कण कण मे मुस्कान हो वैचारिक शक्ति से अलख जगाओ कम॔शीलता का नया निशान हो ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍??????✍ ( दिनांक 02-04-2018) »

अंदाज

✍? (अंदाज ) ?✍ ——($)—– ✍ बिषमताओ से टकराना जरूरी है संघर्ष के जल से नहाना जरूरी है जीवन है गतिमान लय का रूप जिंदगी मे संवर जाना जरूरी है प्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान समय मे निखर जाना जरूरी है न हो कुंठित निराशा से ङर कर आशा को ऊर मे लाना जरूरी है शिक्षा का उद्देश्य है नव परिवर्तन विकृत का पल ढहाना जरूरी है तू ऊर्जावान है आज का अर्जुन परिवेश मे बदलाव लाना जरूरी है ✍ श्याम द... »

अंदाज

✍?अंदाज ?✍ ——-($)—— ✍ आलस्य न प्रमाद धर तनाव न अवसाद धर ऊमंग रख नस-नस मे उत्साह का स्वाद रख तरुणाई की बेला है जीत भाव आगाध रख संघर्ष से घबरा नही तरंगित शंखनाद रख जीवन की परिभाषा गढ सकारात्मकता साथ रख रोग भय न कष्ट से डर दृढ़ता का तप साध रख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) (दिनांक 28-03-2018) »

अर्जुन

✍? अर्जुन ?✍ ✍ अ– अन्याय /अनैतिकता विरोधी न्याय नैतिकता संपोषक ।। र– रक्षक मानवीय संवेदना सव॔धर्म समभाव संरक्षक ।। जु — जुझारू कम॔शील न्यायिक मानवता समरसता घोषक।। न– नमनीय जीवन चरित्र बनाके परमार्थ का पथ प्रदर्शक ।। “”उद्घोषक “” ✍?श्याम दास महंत ?✍ »

रक्त से सनी धरती लाल देख

✍ ? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ रक्त से सनी धरती लाल देख चहुंओर हाहाकार हाल देख समरसता जल रही धूं धूं कर सद्भावना है बदहाल देख हिंसा आतंक का है जोर प्रबल छल-कपट का रुप विकराल देख भयाक्रांत भयावह आज स्थिति नैतिकता की घायल चाल देख साम्प्रदायिकता बन बैठा है नाग सव॔धर्म समभाव है तंगहाल देख तू बन नही कायर आज अर्जुन पुरुषार्थ जगा वक्त संभाल देख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍?⭐?... »

तू ही हैअर्जुन आवाज सुन

✍? गजल ?✍ ✍ तू ही हैअर्जुन आवाज सुन परिवेश का दर्दे साज सुन छटपटा रही धरती देख तू माहौल का क्रंदन आज सुन तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान नव नीति का रम्य नाज सुन हिंसा भय दहशत का है आलम पीड़ित मानवता का राज सुन बिलखती धरा को उबारने तू पुरुषार्थ का अपना अंदाज चुन श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) »

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