UE Vijay Sharma, Author at Saavan - Page 70 of 70's Posts

तेरी एक आवाज़ ने

तेरी एक आवाज़ ने

बवंडर तन्हाई और दर्द के भी ना गिरा सके एक अश्क जिनमें बरसों बाद तेरी एक आवाज़ ने क्यों छलका दिए पैमाने उनमें                                                                         ….. यूई »

Kahne ko to bas…

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तेरा मिलना

तेरा मिलना

अब मेरी दुआओं का असर, जम गया है I अब मेरे लिए, वक्त थम गया है I अब तुमसे मिलने का, कोई तय वक्त नहीँ I तेरी बन्दगी करने का, कोई तय सलीका नहीँ I मैं तुझमें कुछ, यूँ रूम गया हूँ मैं तूँ , और तूँ , मैं हो गया हूँ I जब-जब ख़ुद से मिलना हो जाता है, तब-तब तुमसे मिलना हो जाता है I वक्त कैसा भी हो, यूई का जीना हो जाता है I                                                                                     ... »

ख़ुदा बंदे से

ख़ुदा बंदे से

यह ज़िंदगी दी है तुझे, कुछ कर आने के लिए मेरी इस दुनीया को, कुछ और सजाने के लिए यह ज़िंदगी दी है तुझे, जीने के लिए मेरी बनायी हर शय से,  प्यार निभाने के लिये   मेरे मन की रज़ा को समझ, वोह सब कम कर आना अपनी कर्मो से, प्यार पर दुनीया का विश्वास बड़ा आना बेश्कीम्ती चीज़ है यह ज़िन्दगी, इसे यूँ ही ना गँवा आना मुझे चाहे भूला देना, पर किसी का दिल ना दुखा आना   मैंने अपनी रूह फूँकी है तुझमें, इसे दागदार ना ब... »

कहने को तो बस

कहने को तो बस      मेरे दिल ने , तेरे दिल पे              कुछ भरोसे ही तो किए थे  शिकायत भी किस कचहरी करूँ                 तेरे आस्मानी वादों की रसीदी टिकट पे                             अरमानो के लहू से दस्तखत जो नही किए थे                                                                                                                           …… यूई विजय शर्मा »

कर्मयोगी

कर्मयोगी   अपने कामुक सुखों को कर दमन , अपने गुस्से को दया मेँ कर बदल , अपने लालच को दान की राह कर चलन , अपने स्वधर्म को अंतर्मन से कर मनन , अपने कार्यों को भक्ति भाव से कर भरन , ले विजय अब कर्म योग मेँ तूं जन्म I   अब उसकी राह पकड़ , निश्काम कर्म की राह तूँ जाएगा , हर कर्म कर उसे समर्पण , निष्फल अब तूँ रह पाएगा , अपना हर धर्म निभा , फल की चाह छोड़ तूँ पाएगा , अब निभा हर कर्म को भी , अकर्मी तूँ रह ... »

ए मालिक

      ए मालिक क्यों ना कुछ कमाल हो जाए ,       ऐसा अपनी दुनिया में ध्माल हो जाए ,       हर शैतान इंसानीयत का कायल हो जाए I       द्वैत की उलझन सलट, सब अद्वैत हो जाए ,       यह दुआ जो विजय की कबूल हो जाए ,       तो हर नर तुझ्सा नारायण हो जाए I                                                  …… यूई विजय शर्मा »

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