Hindi-Urdu Poetry

गुरु महिमा

फूंक देते प्राण मनुज में वो गुरुदेव  कहाते है, जीवात्मा की परमात्मा से वो ही मिलन कराते है. मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताकर करते है उद्धार गुरु, निज शिष्यों को ईश्वर से बढ़कर करते है प्यार गुरु. कभी कभी निज उपदेशो से मानव का कल्याण करें, कभी धर्म की शिक्षा देकर मनुज जन्म साकार करें. अहंकार से मुक्त कराकर माया मोह से दूर भगाकर, परमानन्द की प्राप्ति कराकर, करते है कल्याण गुरु. गुरुदेव निज चरणो में प्रण... »

मुक्तक  21

मुक्तक 21

बड़ी सिद्दत से चाहा था ख़ुदा के नूर को मैंने , मेरी नीयत भी पाकीज़ा थी मगर इकरार ही न हुआ.. …atr »

मुक्तक  20

मुक्तक 20

जिस अकल्पित प्रेम का संवाह मैं करता रहा, आज जाना स्वप्न की बस्ती कहीं और है.. ….atr »

गीत कहूँ कैसे अब मैं.

गीत कहूँ कैसे अब मैं.

गीत लिखूँ कैसे अब मैं, गीत कहूँ कैसे अब मैं. सब शब्द तुम्हारे प्रेमी है,हर कविता तेरी दासी है, हर वाक्य तुम्हारा वर्णन है, हर हर्फ़ तेरा अभिलाषी है, फिर इन दीवाने लोगो को अब कहु, गढ़ूं   कैसे अब मैं, गीत लिखूँ कैसे अब मैं, गीत कहूँ कैसे अब मैं.   जो सृजन तुम्हारा दीवाना ,है दूर बहुत जाता मुझसे, उत्पत्ति मुग्ध है अब तुम पर , है नाता तोड़ चुकी मुझसे , फिर इन परदेशी लोगो को , सुनूँ , कहूँ कैसे अब म... »

मुक्तक 19

चलो अब देर से तुम सो सकोगे , हमारी नींद तुमको लग गयी है.. …atr »

मुक्तक 18

बढ़ी है तीरगी रूश्वाईयों  में  , ज़रा अपनी नज़र तुम बंद रखना.. …atr »

मुक्तक 17

करोगे क़त्ल क्या हमको दरिंदो , हमारे हर्फ़ रूहानी, हमारी बात रूहानी.. …atr »

मुक्तक 16

कभी मेरी निगाहों को जहाँ दिखता था तुझमे मीर , मगर अब दौर ऐसा है , खुदी पुरज़ोर हावी है .. …atr »

मुक्तक 15

कहीं है दफ़्न  तुम्हारा ग़म हमारे दिल के कोने में, हमे भी मीर लाशो को बहुत रखना नहीं आता.. …atr »

मुक्तक 14

अभी   मुझमे  जरा  तू  है ,जरा  मैं  हूँ तेरे  दिल  में .. मगर  अब  अपने  अपने  में  जरा  सा  तू , जरा  मैं  हूँ .. …atr »

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