Hindi-Urdu Poetry

इक अधूरापन है जो झांकता रहता है

इक अधूरापन है जो झांकता रहता है दिल की दरारों से| मचलता रहता है, मुकम्मल होने की ख्वाहिश में|   कुछ यादें थी, अधूरी सी भीगना बारिश में कभी कभी| करवा ली है मरम्मत छत की ठीक कर ली है रोशनदान भी फिर भी कभी कभी वो आंखों से बहता रहता है, इक अधूरापन है जो झांकता रहता है| कुछ बातें थी, जो कभी हुई नहीं कुछ सोचा था मैंनें, जो उसने सुना नहीं, चंद लफ़्जों का आसरा चाहता था साथ में किसी का हाथ चाहता था जो ... »

#2Liner

ღღ__दरवाज़े की हर आहट पर, चौंक कर उठने वाले; . अक्सर तमाम रातों के, जागे हुए होते हैं !!…….‪#‎अक्स‬ »

मायूस है चेहरे को रौनक

कल खो दिया मैंने वो नायाब रत्न … जिसे पाने को हर इंसान करता है , ना जाने कितने प्रयत्न ….. This Gajal Dedicate to my grandfather ….. रंज की बार – बार दरवाज़े – ए – दिल पर हुई दस्तक हैँ ….. नैना भीग गए , और मायूस चेहरे की रौनक है…. एक पल में तबाह हो गयी , ख़ुशी – ए – जिंदगी….. अंखियों के पर्दो पर , सिलसिलेवार आपकी झलक है……... »

वाह! क्या नज़्म है|

थोडी सी उदासी जमा कर ली है मुठ्टी भर दर्द को कैद कर रखा है दिल के इक कौने में   कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर कुछ अल्फ़ाज़ से खिंच जाते है लोग कहते है वाह! क्या नज़्म है| »

4 Liner#4

क्यों नहीं कहता जो फ़साना है तेरा ये कैसा बेमान अफसाना है तेरा क्यों बना बैठा है वो बुत जो पूजा जाये ये किसकी परस्ती है की वो छा जाये क्यों नहीं तोड़ता तू ये तमाम बेड़ियांक्यों नहीं छोड़ता तू ये तमाम देहरियां तेरी बेईमानी तेरा इमान क्यों है ऐ दिल, तू इतना बेजुबान क्यों है –‪#‎विकास_भान्ती‬ »

जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना

तुम अपने गिर्द हिसारों का सिलसिला रखना मगर हमारे लिये कोई रास्ता रखना ज्यादा देर तक जुल्म नहीं सह सकता मैं अब अगर आयें कडे दिन तो दिल कडा रखना तुम्हारे साथ सदा रह सकें जरूरी नहीं अकेलेपन में कोई दोस्त दूसरा रखना वो कहते हैं न कि जिसका कोई नहीं खुदा होता है जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना »

छु न सके हथियार

छु न सके हथियार जिसे, उसे वो नजरो से घायल करते रहे,, हम भी बने हिम्मती इतने,, वो वार करते रहे, हम हलाल होते रहे!! कल तक मिल्कियत की जिसकी मिसाले देता था जमाना, उसे ही वो होठों के जाम पिलाते रहे,, हम भी शौक से पीते रहे!! कुछ तो बात हैं कान्हा, जो सितारे उसे चंदा समझ लेते हैं अक्सर,, काश!! वो भी मेरी ख़ामोशी समझ पाए और  हम भी उन्हें देखते रहे!! »

कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं

हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं सुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैं मुन्तजिर कब से हूं इक दश्ते करामाती का वह अगर शाख हिला दे तो बिखर जाऊं मैं जी में आता है कि उस दश्ते सदा से गुजरूं कोई आवाज ना आये तो किधर जाऊं मैं सारे दरवाजों पे आईने लटकते देखूं हाथ में संग लिये कौन से घर जाऊं मैं »

कभी कभी सोचता हूं

कभी कभी सोचता हूं कि हमने पत्थर को भगवान बनाया है या भगवान को भी पत्थर बना दिया »

4 liner#3

कम शब्दों में ज्यादा बात »

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