हिन्दी-उर्दू कविता

अ‍ब तो अंग लगा ले सजना

रंग तेरे में रंग गई सजना इश्क तेरे में रंग गई सजना दिल अपने में बसा ले सजना अ‍ब तो अंग लगा ले सजना …… यूई »

कैसे तुम सबसे ही वफ़ा निभा लेते हो

सबको एक नजर में अपना बना लेते हो कैसे तुम सबसे ही वफ़ा निभा लेते हो …… यूई »

कैसा यह नजरोँ का खेल रचाया है

कैसा यह नजरोँ का खेल रचाया है रकीबों को भी इस खेल में नचाया है …… यूई »

अपनो को एक नजर में कैसे ज़ुदा कर जाते हो

नजरो नजरोँ में ही कैसे नजर घुमा जाते हो अपनो को एक नजर में कैसे ज़ुदा कर जाते हो …… यूई »

नजरोँ में ही मेरी नजर अपनी बना लेते हो

नजरो नजरोँ में ही मेरी नजर चुरा लेते हो नजरोँ में ही मेरी नजर अपनी बना लेते हो …… यूई »

नज़र कही ना लग जाए ख़ुद की मुझको

इस कदर प्यार से ना देखो मुझको नज़र कही ना लग जाए ख़ुद की मुझको …… यूई »

दुनिया के रंग ना अब मोहे भाते हैं

अंग अंग अपना रंगाया तेरे इश्क में अपनी रूह को नहलाया तेरे इश्क में सब रंग अपने अपने चाहे दिखाते हैं दुनिया के रंग ना अब मोहे भाते हैं …… यूई »

जो थे बरसों रकीब हमारे प्यार में

घूमाई ऐसी नजर यार ने प्यार में बेवफाई कीं तसवीर दिखाई प्यार में जो थे बरसों रकीब हमारे प्यार में हमेे ही हो गए रकीब उनके प्यार में …… यूई »

अब रकीबों से दीवाने

जिन नजरों में सुनते थे अपने दिल के फ्साने उनही नजरोँ में हैं हम अब रकीबों से दीवाने …… यूई »

तेरी नजरों में ही बसा करते थे

हमारा एक ऐसा वक्त गुज़रा है अपना था पर वोह अब गुज़रा है तेरी नजरों में ही बसा करते थे हाल-ए-दिल अपना पड़ा करते थे …… यूई »

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