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ऐ नील गगन

ऐ नील गगन

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dhoka

Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE dhoka milega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao  SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO... »

dhoka

Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE milegamilega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao  SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO... »

mohobat

Mohobat mai unki aisa alam tha Na din ka pta na rat ka dhikana tha×2 Chur the hum unki yado mai Or lafjo per unka hiii afsana tha Ger bna kr ek pal mai chodh gyi Is masom dil KO tode gyi Ye kissa hiii bewafao ka Purana that By RLvgahlot   »

Rat de khamoshi

Rat de khamoshi Te akha vich piyar Rab to v sona labiya mai yr Te odi ek hasi vich meri Duniya vasdii aye Te ode gum NAL meri zind kut diii ayeee Socha mai aisa ki c mere yar mai Jo meri zindhiii ode NAL saj diii aye by RLvgahlot »

माँ

??????(मुक्तक)???????? ????????? माँ चरण आपके स्वर्ग का रूप है। माँ सभी शक्तियो का मिला रूप है। जिंदगी श्याम मेरी न होगी कभी। माँ नजर आपकी प्रेम का धूप है। ????????? रचनाकार अविनाश सिंह अमेठिया (देवरिया) +919135481448 ????????? »

यपूर्व की हवाएँ

  पूर्व की हवाएँ जब भी बदलता है मौसम वसंत के बादऔर ग्रीष्म के पहले का लंबा अंतराल तो सूर्य के विरुद्ध जा कर पुरबवैयाँ चलती हैं। गाँव में कहावत है ऐसे मौसम में मत सोया करो बाहर ये पूरब की हवाएँ हैं ना पुराने दर्द उभार देती हैं इन हवाओं की सरसराहट सुगंध पिछली यादों में घोल देती हैं। कहा जाता है इन हवाओं में सूखे पुराने यादों के पत्ते उड़ कर हमारे ही आँगन में जमा हो जातें हैं उन पत्तों की महक को ... »

मुक्तक

तेरी लहर मिल गयी है यादों की फिर से! तस्वीर मिल गयी है इरादों की फिर से! डूबी है फिर जिन्दगी तेरे अफसानों में, जागीर मिल गयी है मुरादों की फिर से! Composed By #महादेव »

मुक्तक

मुझे तुम किसलिए जगाते हो यूँ रातों में? नींद आती नहीं ख्वाहिश-ए-मुलाकातों में! लिपट गयी हैं हसरतें यादों से इसतरह, जिन्दगी मदहोश है तेरे ख्यालातों में! Composed By #महादेव »

दोस्त

तेरे होने ना होने के बीच मेरी आँखें पिस रही है़ं॥ रह रह के रिस रही हैं दिन रात घिस रही हैं॥ »

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