सहारे

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते,
हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते,

बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं सभीकी,
तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।।
राही (अंजाना)

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2 Comments

  1. Antariksha Saha - July 28, 2019, 8:01 am

    बहुत खूब भाई

  2. Dharamveer Verma - July 29, 2019, 1:03 pm

    बहुत सुन्दर पंक्ति है, मित्र। लिखते रहिये

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