नन्हा सा परिन्दा

नन्हा सा परिन्दा

एक नन्हा सा परिन्दा
खोज रहा हैं आसमान…
अपने हौसले से उड़ान भर
देखना चाहता हैं आसमान…
छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं
प्रकृति की खूबसूरती को
महसूस करना चाहता हैं अपने पंखो से
आसमान की ऊँचाई को
एक छोटा सा नन्हा परिन्दा
अपने हौसले से बनाना चाहता हैं घोसला
बगिया की मनमोहक लताएँ
सर सर करती बगिया की हवाएँ
झुम झुम कर गाना चाहता हैं
वंसती का स्वागत करके
एक नन्हा सा परिन्दा
खेलना चाहता हैं प्रकृति के गोद में

महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Antima Goyal - August 7, 2019, 10:11 am

    तारीफ़ से परे है आपकी कविता

Leave a Reply