तेरी कहानी का तू सिकंदर है।।

जब चारों ओर कीचड़ दिखा, असमंजस तेरे अंदर है।
नादान बला, आईना वो नहीं, तेरी रूह तो कमल सी सुंदर है।।

दिखा हर तरफ एक धुआँ तुझे, कहीं आग लगी भयंकर है।
जग छान लिया, कुछ मिला नहीं, मुई आग वो तेरे अंदर है।।

मत बुझा उसे, वो भड़कने दे, जैसे आग का समुन्दर है।
अपनी ज़िन्दगी बेफिक्र तू लिख, तेरी कहानी का तू सिकंदर है।।

गर हुआ सामना क़ातिल से, और पड़ते दिल पे खंजर हैं।
कोई रोक सके तो रोके ज़रा, तू भी क्या कम बवंडर है !!

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Namastey..! I'm an ordinary Indian girl, a girl who is trying hard to find herself in this whole world.

13 Comments

  1. Mohit Sharma - November 29, 2015, 12:44 am

    words and thoughts both are great..awesome poetry

  2. Ajay Nawal - November 29, 2015, 12:49 am

    bahut hi umda kavita

    • Komal Nirala - November 29, 2015, 9:04 am

      Thank you. A person already possesses the power to achieve what he wants, he just needs to believe that he can. 🙂

  3. Kapil Singh - November 29, 2015, 10:13 am

    करिश्मायी लफ़्ज.. अद्भूत रचना

  4. Kapil Singh - November 29, 2015, 10:17 am

    जब नहीं कोई हथियार, कलम को तू ढाल बना
    कर तू क्रांति, निकाल उसे जो आग तेरे अंदर है

  5. Anirudh sethi - November 30, 2015, 11:30 am

    kya kamaal ki kavita he…wah!

  6. Ankur Khandpur - November 30, 2015, 2:11 pm

    Really awesome 🙂 You rocked the words and world 😀

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