Ai savan ki fuhar

आई सावन की फुहार ,
छाई रूत में खुमार,
घटाएं छाई है घनघोर,
रह-रहकर दामिनी दमके,
हवाएं मचा रही शोर,
बारिश की लगी है झडी,
जैसे झरनों की हो फुलझड़ी,
भीगा भीगा सा ये रुत है ,
भीगा भीगा सा यह मन है,
भीगा भीगा सा यह तन है,
मयूरा नाच रहे छमाछम,
कोयल भी लगा रही है तान |

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8 Comments

  1. usha gouniyal - August 3, 2019, 8:02 pm

    अतीसुनदर

  2. Antariksha Saha - August 4, 2019, 1:08 pm

    Bahut khub

  3. देवेश साखरे 'देव' - August 4, 2019, 5:25 pm

    बहुत खूब

  4. Antima Goyal - August 7, 2019, 10:07 am

    आपकी कविता किसी की तारीफ़ की मोहताज नहीं

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