“इश्क़ “

तन्हा-तन्हा बौराई सी फिरती हूँ हुज़ूम में भी_

कहकशाँ लगाती हूँ अपनी ही विरानियत में कुछ हाल-ए-बयां इश्क़ का इस तर्ज़ भी_

-PRAGYA-

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