लफ़्ज

लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते
कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है

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H!

4 Comments

  1. Priya Gupta - March 12, 2018, 3:44 pm

    मोहब्बत की सर्दी शुरू हो गयी है
    अश्क अब आंखों में ही जम जाते है|

  2. Anirudh sethi - March 12, 2018, 3:55 pm

    नूर जिंदगी से जैसे रूखसत हो गया है
    अंधेरों मैं ही हम अब रम जाते है

  3. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:53 pm

    Waah

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