वही पुरानी तसल्ली

ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने,
मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने,
मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था उसने,
मुझे सूखा Patra कह कर खुद को जहान लिखा था उसने ,
अरे Bewafa हूं मैं ऐसा सोच कर हाथों पे किसी और का Naam लिखा था उसने,
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Shayar Rajjneesh kann

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