बोतल

ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में,

मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ज्योति कुमार - June 29, 2018, 4:30 pm

    बहुत अच्छा

  2. Neha - July 1, 2018, 10:52 am

    Nice

Leave a Reply