Aman Kumar Shastri

  • वफा तो वही करेगा
    वफा करना जिसका काम हैं,
    अक्सर वफादार है बेवफाई करते हैं
    बेवफा तो यूं ही बदनाम हैं।।

  • कई साल गुजर गए पर
    आज भी महसूस होता है
    जब भी तू इन गलियों से गुजरता है
    तेरा आना जाना लगा रहता है
    दिल की गलियों में
    आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता है
    इश्क करना है तो इश्क कर ले
    मिटा देना है तो मुझे दिल […]

  • संविधान निर्माता
    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
    को है शत शत नमन
    जिन्होंने बढ़ाई देश की शान
    हम करते हैं उनका वंदन
    संविधान निर्माण किया और
    पालन करना सीख लाया
    भीमराव अंबेडकर ने
    संविधान का निर्माण कराया।।

  • गोरी-चिट्टी, काली चमड़ी
    को रगड़ रगड़ क्यों धोता है।

    यह सब कुछ है नश्वर है
    जग में कर्मों का लेखा-जोखा होता है।

    कौन है गोरा कौन है काला
    यह ना रखता कोई याद,

    अच्छे व्यवहार को ही हर कोई
    रखता है याद […]

  • आया है नव वर्ष
    सभी को खूब बधाई
    हो गए हम तो कृतार्थ
    घर नवदुर्गा आई
    घर नवदुर्गा आईं ,
    लेकर छोटा रूप
    धूप, दीप, नैवेद्य और
    लेकर थोड़ी धूप
    मैया का वंदन किया
    मिला है मन को सुख
    मिला है मन को सुख […]

  • हिंदू पंचांग के अनुसार
    आया नव वर्ष हमारा
    दुख बीते और सुख आये
    है यही संदेश हमारा
    है यही विनती हमारी
    मिट जाए सबके क्लेश
    प्रेम ही प्रेम दिखे चित ओर
    ना हो कोई द्वेष
    ना हो कोई द्वेष
    मि […]

  • नया वर्ष आया है मित्रों
    मनाओ इसको तन मन धन से
    मां दुर्गा का वंदन करके
    नतमस्तक कर दो सिर को
    चैत्र मास आरंभ हुआ
    आया है नवल प्रभात
    धन्य भारतीय संस्कृति
    धन्य है इसकी बात
    खिले पलाश, आई नव कोपल
    मधुर मधुर […]

  • 🕉️
    नव संवत है विक्रमी, अतिपावन मधुमास।
    राक्षस नाम धराया, पर आनन्द की आस।। १।।
    नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास।
    जनम मास है राम की, नौराता भी खास।। २।।
    घर घर रामायण पाठ,अरु चंडी का जा […]

  • इतना छोटा था उसे
    सेवा करके बड़ा किया था
    सोंचा और फले-फूले,
    चारों दिशाओं में फैले
    इसी नीयत से,
    उसे बड़े गमले में लगाया
    खूब खाद डाली
    खूब जल पिलाया
    बच्चों की तरह जिसे
    रोज नहलाती थी,
    वक्त पड़ने पर उसे स […]

  • किसी ने कहा
    लिखा करो
    किसी ने कहा पढ़ा करो
    यूं वक्त ना जाया करो
    कविता तो बाद में भी लिखी
    जा सकतीं हैं
    वक्त रहते पढ़ा करो..

    मेरा हृदय बोला दुनिया की
    कब तक सुनोगी
    कुछ अपने मन की भी किया करो…

  • सावन से निवेदन है कृपया अपनी साइट को अपडेट करें
    _____हमें एडिट का आप्शन उपलब्ध करायें और कविता को गहराई से समझने के लिए फोटो सेलेक्शन की भी सुविधा उपलब्ध करायें हमें बहुत असुविधा होती है

  • हंसी आ गई मुझको कि
    अब आया तुमको होश,
    जब यहां अवसान पड़ा था
    तब ना आया यह जोश
    अपना यह जोश संभालो
    करो परिश्रम
    यदि पड़ जाओ अकेले तो
    देंगे साथ हम
    देंगे आपका साथ अगर पड़ गये अकेले
    यह मंजिल पाने की खातिर
    कितन […]

    • असफलताओं से हार कर
      ना पीछे हटना है
      _______ असफलताओं से ना घबराने की सुंदर प्रेरणा दी है कवि प्रज्ञा जी ने अपनी इस कविता में, सुन्दर रचना

    • बहुत ही उम्दा लिखा है आपने
      चुनाव आते ही बैकेंसी आने लगती हैं और भर्तियां होने लगती हैं और चुनाव होने के बाद भर्तियां कोर्ट में लटक जाती हैं उसी बात को कहती कवि प्रज्ञा जी की निडर लेखनी जो
      समाज की हर छोटी बड़ी समस्या को पन्नों पर उकेरकर रख देतीं हैं जिससे कोई बात छुपी नहीं रहती है

    • उम्दा प्रस्तुति यथार्थ चित्रण

    • वाह क्या बात है खूबसूरत कविता लिखी

  • बेटा बीमार है
    ना होश है
    ना करार है
    कल से एक निवाला तक
    गले ना उतरा
    बेटे को बहुत बुखार है
    क्या करूं ?
    कैसे जियूं !
    यही तो मेरे जीवन का आधार है

  • क्यों कोई मोहब्बत के
    काबिल नहीं होता ?
    क्यों हर किसी के सीने में
    दिल नहीं होता ?
    क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क !
    जो इस दिल के काबिल
    नहीं होता…!!

  • अब फिर से उस तरफ से
    खत आ रहें हैं
    वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
    पुंछवा रहे हैं….

    हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
    हम कैसे हैं ? बस वो यह
    जानना चाह रहे हैं…

    भूल बैठे थे हम उन्हें
    कल परसों […]

    • अब फिर से उस तरफ से
      खत आ रहे हैं
      वो हमारी खबर लेने
      घर आ रहे हैं….
      _______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर और मधुर रचना

    • अब फिर से उस तरफ से
      खत आ रहें हैं
      वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
      पुंछवा रहे हैं….

      हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
      हम कैसे हैं ? बस वो यह
      जानना चाह रहे हैं…

      बहुत ही रूमानियत भरी रचना

    • बहुत खूब

  • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

    कि अब ना बजती
    बंशी की धुन कहीं
    गइयों को ठौर नहीं
    माखन चुराने आ जाओ…

    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || […]

    • कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      ________ भगवान श्री कृष्ण की आराधना करते हुए बहुत सुंदर रचना, जय श्री कृष्ण

    • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

      कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…

      बहुत सुंदर रचना
      भगवान श्री कृष्ण जी पर बहुत ही श्रेष्ठ रचना
      श्री कृष्ण जी के किए गए कार्य को याद करती हुई तथा उन्हें बुलाती हुई सुंदर कविता

    • अतिसुंदर

  • सुबह होगी
    हाँ, सुबह होगी
    लेकर स्वर्ण रश्मियों को
    अपने झोले में
    कुछ खंगालेगी
    गेहूं की अधपकी बालियों को
    लहलायेगी
    उलझी हुई वृक्षों की लटों को
    सुलझाकर
    नदियों को काला टीका […]

    • हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      _______प्रा:त काल की बेला का प्राकृतिक वर्णन करते हुए, खेतों में पकी गेहूं की बालियों का सुंदर चित्रण करती हुई प्रज्ञा जी की अति सुंदर कविता

    • सुबह होगी
      हाँ, सुबह होगी
      लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में
      कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      उलझी हुई वृक्षों की लटों को
      सुलझाकर।।

      सुबह का सुंदर वर्णन करती हुई रचना

    • बहुत सुंदर

  • नही हाथ में उंगलियां
    पर पेट में हैं दात
    जितना कमाती है किस्मत
    उतना खाती आंत
    उतना खाती आंत
    करूं क्या मुझे बताओ
    मेरी हालत पर
    तुम ना हमदर्दी दिखाओ
    काम कराओ
    फिर मुझको दो
    हक का दाना
    मजदूर हूँ पर
    मजबूर ना […]

    • कर्म करके भरता हूँ पेट
      मुफ्त की मैं ना खाऊं
      हूँ मजदूर इसी कारण
      मैं मजबूर कहाऊं…
      _________ मजदूर वर्ग पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की एक बेहतरीन रचना

    • नही हाथ में उंगलियां
      पर पेट में हैं दात
      जितना कमाती है किस्मत
      उतना खाती आंत
      उतना खाती आंत
      करूं क्या मुझे बताओ
      मेरी हालत पर
      तुम ना हमदर्दी दिखाओ
      काम कराओ
      फिर मुझको दो
      हक का दाना।।

      उच्चकोटि की रचना लिखी है आपने मजदूरों की व्यथा का ह्रदयस्पर्शी वर्णन

    • बहुत सुंदर

  • घड़ी तो घड़ी है
    साधारण हो या फिर असामान्य।
    पर समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।
    डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल।
    जिसे चलाए व दर्शाए […]

    • बहुत सुन्दर रचना, वाह

    • बहुत खूब

    • समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।
      __________ समय और घड़ी पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम और सुंदर रचना

    • घड़ी तो घड़ी है
      साधारण हो या फिर असामान्य।
      पर समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।

      समय का पहिया घूमता रहता है समान्य गति से फिर चाहे किसी का समय बदले या ना बदले

      सुंदर तथा विचारणीय रचना

  • हाथ में रेखा
    रेखा में जीवन
    जीवनt रेखा हाथ में।
    पर है जीवन
    और मरन
    एक ईश्वर के हाथ में।।
    हाथ मिलाने से पहले
    सोच लो एक बार।
    वायरस और बैक्टीरिया
    है बीमारी के आधार।।
    गर मिलाया
    फिर सेनिटाइज करो। […]

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवन रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में….

      महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      ______ कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम रचना, इसमें उन्होंने बताया है बेशक जीवन मरण ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आजकल के कोरोना के माहौल में जीवन मरण कुछ हद तक अपने हाथ में भी है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए उचित संदेश देती हुई अति उत्तम रचना , उम्दा लेखन।

    • महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      — बहुत सुंदर पंक्तियाँ और लाजवाब कविता है। वाह वाह

    • बहुत सुंदर कविता

    • बहुत खूब

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवनt रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में।।
      हाथ मिलाने से पहले
      सोच लो एक बार।
      वायरस और बैक्टीरिया
      है बीमारी के आधार।।

      बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  • Load More