Anuj Kaushik

  • मेरी गुड़िया रानी आखिर
    क्यों बैठी है गुमसुम होकर।
    हो उदास ये पूछ रहे हैं
    तेरे खिलौने कुछ कुछ रोकर।।
    कुछ खाओ और मुझे खिलाओ
    ‘चंदा मामा….’ गा-गाकर।
    तुम गाओ मैं नाचूँ संग- संग
    डम -डम ड्रम बजाकर ।। […]

    • छोटी सी गुड़िया रानी पर बहुत सुंदर कविता

  • ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर
    विश्वास कर।
    खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।।
    कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा
    तेरी हर जायज़ कोशिश को भी, तेरी ही गलती बना द […]

    • जीवन की कड़वी सच्चाईयों को बयान करती हुई हृदय स्पर्शी रचना

    • जिद है अपनी अपनी सबकी
      कुछ को है अभिमान
      कुछ आदत के गुलाम
      फिर भी सब हैं सही
      सब का मालिक वहीं
      यही समझ कर सकी
      सभी को आदर देना है
      सब उसका ही खिलौना है

    • नर हो न निराश करो मन को
      निज को समझो न औरों को

    • बहुत सुंदर

    • बहुत खूब

  • Rishi Kumar and Profile picture of Ashmita SinhaAshmita Sinha are now friends 6 days ago

  • काँव काँव मत करना कौवे
    आँगन के पेड़ों में बैठ
    तेरा झूठ समझता हूं मैं
    सच में है भीतर तक पैठ।
    खाली-मूली मुझे ठगाकर
    इंतज़ार करवाता है,
    आता कोई नहीं कभी तू
    बस आंखें भरवाता है।
    जैसे जैसे दुनिया बदली
    झूठ लगा बढ़ने […]

  • मनुष्य हो तुम
    मनुष्यता सदैव पास रखो
    पाशविक वृत्तियों को
    पास आने न दो।
    दया का भाव रखो
    प्रेम की चाह रखो
    ठेस दूँ दूसरे को
    भाव आने न दो।
    दया पहचान है कि
    आप में मनुष्यता है
    अन्यथा फर्क क्या है
    फर्क का भान र […]

    • मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को
      पास आने न दो। दया का भाव रखो
      प्रेम की चाह रखो
      ______मनुष्यता के गुण समझाती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर प्रस्तुति। उत्तम लेखन

    • अति उत्तम रचना

    • बहुत खूब

    • अतिसुंदर भाव

  • हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ।
    मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ।
    सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब।
    अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब।
    कहे लेखनी आज, व्यथित है कृषक भाई,
    कुछ तो मानो मांग, दिखाओ मत न […]

    • किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंदबद्ध रचना, अति उत्तम, संतुलित विचार, संतुलित रचना

    • bahut Sundar kahani

    • किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

    • बहुत बढ़िया कविता, किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में बहुत खूब

    • किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

    • किसान आंदोलन पर बहुत अच्छी प्रस्तुति चाचा जी

    • वाह अतुलनीय रचना, लेखनी को प्रणाम, छन्द युक्त रचना पढ़कर आनंद आ गया।

    • Bahut Sundar rachna

    • बहुत सुंदर रचना चाचा जी

    • बहुत सुंदर रचना

    • बहुत सुंदर रचना चाचा जी

    • कविता बहुत अच्छी लगी

    • बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने, बहुत सुंदर समन्वय है।

    • अत्युत्तम कविता, अत्युत्तम सोच

    • सुंदर रचना

    • बहुत सुंदर रचना।👌
      आपकी लेखनी को सलाम।

    • अभी के हालातों पर बहुत शानदार रचना 👏👏

    • अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना

    • बिल्कुल नपी तुली बातें और बहुत ही संतुलित रचना।

    • बहुत सुंदर रचना

    • किसान आंदोलन के दृष्टिगत बेहतरीन रचना

    • बहुत खूब

    • किसान आंदोलन पर बहुत ही सुन्दर और यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई छंद बद्ध रचना है। किसान आंदोलन का सम्पूर्ण आंखों देखा हाल व्यक्त करती हुई बेहतरीन रचना अति उत्तम लेखन

    • क्या खूब कहा है
      अतिउत्तम

    • वाह अति सुंदर रचना लेखनी को सलाम👌👌

    • कविता उच्च स्तरीय है बढ़िया और शानदार है। आपकी कविता में वास्तविकता है

    • रोटी देता है किसान, सेकूँ रोटी आज,
      आंदोलन को चोंच दूँ, सोच रहा है बाज। …. किसान आंदोलन में सब किसान हैं यह जरूरी नहीं है, कुछ राजनीति करने वाले भी बैठे हैं। आपने अपनी कविता में इसका भी जिक्र करके कविता की गुणवत्ता में वृद्धि की है। बहुत उम्दा रचना

    • चित्र को सजीव करती हुई किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंद बद्ध काव्य रचना

    • किसान आंदोलन का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने अपनी कविता में अति उत्तम रचना।

    • वाह, किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने, छंद बद्ध शैली में बहुत सुंदर कविता ,लाजवाब

    • किसानों के प्रति गहरी संवेदना दर्शाती हुई आपकी यह एक उच्च स्तरीय रचना है “मांग उठाना देश में, नहीं कोई अपराध,
      लोकतंत्र की रीत है, रखना अपनी बात।” वाह, छंद युक्त कविता में एक प्रोफेशनल कवि की भांति आपने किसानों के मन की बात प्रस्तुत की है। किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना ,बहुत खूब

    • बहुत खूब, बहुत शानदार रचना

    • अत्यंत ही उत्कृष्ट

  • वर स्वरुप में बमबम
    मालतीमालया युक्तं सद्रत्नमुकुटोज्ज्वलम्।
    सत्कण्ठाभरणं चारुवलयाङ्गदभूषितम्।।
    वह्निशौचेनातुलेन त्वतिसूक्ष्मेण चारुणा।
    अमूल्यवस्त्रयुग्मेन विचित्रेणातिराजितम्।।
    चन्दनागरुकस्तूरीचारुकु […]

  • दुलहिन गिरिजा माता

    सुचारुकबरीभारां चारुपत्रकशोभिताम्।
    कस्तूरीबिन्दुभिस्सार्धं सिन्दूरबिन्दुशोभि […]

  • सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान,
    सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान।
    मिलता है सम्मान, उसे जो सच होता है,
    झूठ हमेशा झूठ, बना इज्जत खोता है।
    कहे लेखनी मान बात सच को अपनाओ,
    झूठ दूर कर आज, खूब आनन्द मनाओ।

    • वाह बहुत खूब

    • बहुत सुंदर कविता

    • सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान,
      सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान।
      __________बहुत सुन्दर पंक्तियां, सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर रचना

    • अति, अतिसुंदर भाव

  • राहों में आपके
    कोमल सी दूब हो,
    पाने का हो जुनून मन में
    उमंग खूब हो।
    आ जायें जब कभी
    मायूसियों के दिन
    कुहरे के बीच भी
    थोड़ी सी धूप हो।
    मन साफ हो दिखे वो
    सच में हो सच की छाया
    भीतर वही भरा हो
    बा […]

  • बता तो दो क्यू तुम ऐसे हो,
    मेरे होकर भी परायों से कमतर हो।
    यक़ीनन दोष हममें, दुनियादारी की बूझ नहीं
    आकलन करें कैसे, रिश्ते- नातोंकी समझ नहीं
    साफ़ कहने की आदत, सुनने की हिम्मत नहीं
    पर क्या स […]

    • अतिसुंदर भाव

    • हृदय के भावों का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करती हुई सुंदर रचना

    • बता तो दो क्यू तुम ऐसे हो,
      मेरे होकर भी परायों से कमतर हो।
      यक़ीनन दोष हममें, दुनियादारी की बूझ नहीं
      आकलन करें कैसे, रिश्ते- नातोंकी समझ नहीं
      साफ़ कहने की आदत, सुनने की हिम्मत नहीं
      —— वाह, कवि सुमन जी की बहुत ही उत्तम रचना है यह। टीस व संवेदना का बहुत सुंदर समन्वय है यह कविता।

  • यह जीवन मेरा रहा है समर्पित
    हां बस तुम्हारे लिए।
    अपनी इच्छाओं के पंखों को
    अपने ही इन दोनों बाजुओं से
    टुकड़ों में बांट बिखेरा है हमने
    हां बस तुम्हारे लिए।
    अरमान मेरे ना गगन को चुमू
    इस धरा पर, तेरी होक […]

  • हे भारत कोकिला!
    मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा।
    वतन के लिए कर खुद को समर्पित
    जीवन तेरा स्वतंत्रता को अर्पित
    हैदराबाद में जन्मी अघोरनाथ की सुता कहाई
    माता दी कवयित्री निज रचना की लोङी […]

  • आज छोटी बिटिया रानी
    एक बरस की हो गई है
    हाव-भाव से हमें लुभाती
    बड़ी सरस सी हो गई है।
    खुद के छोटे छोटे पांवों से
    कदमों को उठा रही है,
    मम, पप, अम्म आदि शब्दों से
    संबोधित कर बुला रही है।
    हैप्पी बर […]

    • बिटिया रानी पर बहुत सुंदर कविता, उसके प्रथम जन्मदिवस पर मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
      May God bless her.

    • Bitiya Ko Janmdin Ki Bahut Bahut badhayee

    • बिटिया के जन्मदिन पर खूबसूरत कविता। बहुत खूब, जन्मदिन की बधाई

    • जुग जुग जीवे बिटिया रानी
      हँसी -खुशी दिन रात हो ।
      मातु-पिता के जीवन में भी
      अन -धन की बरसात हो।।

    • बिटिया की जन्मदिन की हार्दिक सुभकामनाये

    • इतनी सुंदर पंक्तियों हेतु साधुवाद वाह

  • इंसान तेरे रूप अनेक
    कोई ईमानदारी का प्रतीक
    कोई बेमानी की मिसाल,
    कोई जलता दीपक मंद करता है
    कोई जलाता है मशाल,
    कोई शांति का प्रतीक
    कोई करता है बवाल
    कोई बेशर्मी की हद पार करता है
    कोई रखता है मुंह में […]

    • बहुत बढ़िया, वाह

    • वाह बहुत खूब

    • बहुत सुन्दर

    • इंसान तेरे रूप अनेक
      कोई ईमानदारी का प्रतीक
      कोई बेमानी की मिसाल,
      कोई जलता दीपक मंद करता है
      कोई जलाता है मशाल,
      _______इंसान की यह खासियत है कि प्रत्येक इंसान दूसरे से भिन्न है इसी इन्सानी फितरत को इतने अच्छे प्रकार से समझाती हुई कवि सतीश जी की जीवन दर्शन करवाती हुई बहुत सुन्दर कविता। भाव और कला पक्ष बेहद मजबूत है,कविता पाठक को अंत तक बांधे रखने में सक्षम है

    • very nice poem

    • बहुत खूब वाह

    • बहुत खूब

  • आप खो गए थे
    मन उद्वेलित था
    अब आ गए हो
    है प्रफुल्लित सा।
    नभ में सूरज उदित सा,
    मन है मुदित सा।
    आपका होना
    रात को चाँद सा,
    काजल लगी आंख सा।
    मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में
    क्योंकि वो बना है
    शेर की माँद सा […]

  • हिमखंड टूटा
    पानी का ऐसा प्रवाह आया
    वे पत्तों की तरह बह गए
    देखते ही देखते
    सैकड़ों लोग लापता हो गए।
    जाने कहाँ खो गए।
    चीत्कार- करुण-क्रन्दन
    से रो उठी घाटी,
    प्रवाह बह गया
    केवल मजदूरों के
    निशान रह गए बाकी।

  • अनुकूल वातावरण
    मुश्किल से मिलता है
    या तो स्वयं ढलना पड़ता है
    या उसे अपने अनुसार
    ढालना पड़ता है।
    कर्म किए बिना
    कुछ नहीं होता है
    कर्म के बावजूद परिणाम में
    ईश्वर की इच्छा को ही
    मानना पड़ता है।
    आग जलाने […]

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