Pt, vinay shastri 'vinaychand'

  • आर्यन सिंह की रचना से कुछ चुनिंदा शायरी एंड पक्तियाँ निकाली है जिनसे साफ पता चलता है कि आर्यन का दिल इश्क के समुंदर मे हिलोरें ले रहा है
    ना जाने कौन हैं आर्यन की सच्चे इश्क़ की प्रतिमा वह लड़की ( रश्मि यादव, जो क […]

  • मैं दौड़ती ही जा रही थी,
    ज़िन्दगी की दौड़ में।
    कुछ अपने छूट
    गए इसी होड़ में।
    मैं मिली जब कुछ सपनों से,
    बिछड़ गई कुछ अपनों से।
    दौड़ती जा रही थी मैं,
    किसी मंज़िल की चाह में,
    कुछ मिले दोस्त,
    कुछ दुश्मन […]

  • हिम्मत तो देखो ज़ुबान की, कैंची जैसी चलती है,
    बत्तीस दांतों घिरी होकर भी निडर हो मचलती है।
    बिना हड्डी की मांसल जीभ, कई कमाल करती है,
    फंसा दांत में तिनका, निकाल के ही दम भरती है।।

    दुनियां भर के स्वाद का […]

    • इस जीभ ने ही कईयों के सर और घर तुड़वा दिए,
      जीभ सम्भाल कर बात कर कईयों को लड़वा दिए।
      _____जीभ या जुबान पर बहुत सुंदर और सटीक रचना
      “ख़ुदा को भी नहीं पसंद सख़्ती बयान में
      इसीलिए नहीं दी हड्डी ज़बान में”।

  • नेकी कर दरिया में डाल,
    यह कहावत बड़ी कमाल।
    आओ सुनाऊं एक कहानी,
    नेकी करने की उसने ठानी।
    उस ने नेकी कर दरिया में डाली,
    वह नेकी एक मछली ने खा ली।
    नेकी खाकर मछली हो गई,
    खुशियों से ओत प्रोत।
    नेकी कर और ब […]

  • लाख समझाने पर भी, गली-बाजार में भीड़ करें,
    बिना मास्क खुल्लमखुल्ला सबसे वार्तालाप करें।
    सेनेटाइजर का इस्तेमाल, हाथ धोना भी बंद करें,
    आओ साथी हम भी मरें, औरों का इंतजाम करें।।

    बार-ब […]

  • हवा में उड़ाओ पतंग,
    खुद को जमीं पे खड़ा रखो।

    दान धर्म करके बंधुवर,
    अपना दिल भी बड़ा रखो।

    घमण्ड रुपी पतंग कटवाकर,
    सपनों को बुलंद रखो।

    रंग-बिरंगी पतंगों जैसा ,
    परचम अपना लहराए रखो।

    धागे अने […]

  • बम लहरी, बम बम लहरी

    (शिव महोत्सव विशेष)

    शिव शम्भू जटाधारी, इसमें रही क्या मर्जी थारी,
    सर पे जटाएं, जटा में गंगा, हाथ रहे त्रिशूलधारी।
    गले से लिपटे नाग प्रभू, लगते हैं भारी विषधारी,
    असाधारण वेश बना र […]

  • जब मिलीं दो युगल आँखें
    अधर पर मुस्कान धर के।
    गा उठे टूटे हृदय के
    भ्रमर मधुरिम तान भर के।

    सर झुकाकर दासता
    स्वीकार की अधिपत्य ने।
    गर्मजोशी जब परोसी
    अतिथि को आतिथ्य ने।

    यूँ लगा रूखे शहर में
    गाँव फिर से […]

  • मुस्कुरा कर बोलना,
    इन्सानियत का जेवर है।
    यूं तेवर न दिखलाया करो,
    हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
    यू इंतजार न करवाया करो।
    माना गुस्से में लगते हो,
    बहुत ख़ूबसूरत तुम
    पर हर समय गुस्से में न आया करो।
    बिन खता क […]

    • मुस्कुरा कर बोलना,
      इन्सानियत का जेवर है।
      यूं तेवर न दिखलाया करो,
      हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
      – रोमानियत अंदाज की बहुत खूबसूरत पंक्तियां। मुस्कुराने को प्रेरित करती शानदार रचना। बेहतरीन शिल्प, खूबसूरत भाव।

      • इतनी सुन्दर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत
        बहुत धन्यवाद सतीश जी।आपकी समीक्षा वास्तव में कवि हृदय में उत्साह का संचार करती हैं, हार्दिक आभार सर

    • अतिसुंदर भाव

    • मुस्कराहट दिलों को जोड़ती है,
      क्रोध रिश्ते, इज्जत और दिल सबकुछ खत्म कर देता है
      सुंदर रचना

    • सुंदर रचना गीताजी। वैसे देखा जाए तो सही मायने में मुस्कुराहट की कीमत तेवर झेलने बाद ही तो समझ आती है !

    • सर्वश्रेष्ठ कवि, सर्वश्रेष्ठ आलोचक और सर्वश्रेष्ठ सदस्य सम्मान की बहुत बहुत बधाई गीता जी।

  • सब्र की जरूरत है,
    समय सब कुछ बदलता है।
    परिवर्तनशील इस संसार में,
    सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
    जीवन में श्रेष्ठ कर्म करो,
    यह रामायण सिखाती है।
    द्वेष,बैर भाव और लालच को,
    महाभारत दर्शाती है।
    महाभारत ग्रंथ ने […]

    • सब्र की जरूरत है,
      समय सब कुछ बदलता है।
      परिवर्तनशील इस संसार में,
      सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
      — आपकी रचना बहुत श्रेष्ठ रचना है। शिल्प व भाषा का सुन्दर समन्वय। जीवन दर्शन से समाहित अद्भुत समन्वय

      • आपकी इस उत्कृष्ट और प्रेरक समीक्षा हेतु धन्यवाद करने को शब्द नहीं मिल रहे हैं सतीश जी।इस सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार सर

    • बहुत सुंदर

    • धीरज सफलता की कुंजी है
      बहुत खूब

  • एक युवती बन कर बेटी,
    मेरे घर आई है।
    अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर,
    हाथों में लगाकर मेहंदी
    और लाल चुनर ओढ़ कर
    मेरे घर आई है।
    छम छम घूमा करती होगी,
    माँ के घर छोटी गुड़िया सी
    झांझर झनकाकर, चूड़ि […]

    • एक युवती बन कर बेटी,
      मेरे घर आई है।
      अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर,
      हाथों में लगाकर मेहंदी
      और लाल चुनर ओढ़ कर
      मेरे घर आई है।
      —— बहुत खूब, बेहतरीन रचना, भाव व शिल्प का अद्भुत समन्वय

    • बहुत सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर

    • अतिसुंदर भाव

    • बेटी
      बचपन की यादों को
      संजोकर
      चली ससुराल

  • मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता,
    महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता।
    स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता,
    शहर से बाहर हाॅस्टल में भर्ती की चिन्ता।।

    जेईई, नीट, रीट कम्पीटीशन की चिन्ता,
    सरकारी, विदेश […]

    • समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत सुन्दर रचना

    • फर्ज निभाकर अब कर्ज चुकाने की चिंता,
      बुढ़ापे तक कोल्हू में फंसे रहने की चिंता।
      बच्चों के होते अकेले पड़ जाने की चिंता,
      मरने तक बच्चों के वापिस आने की चिंता।।
      —– सुन्दर पंक्तियां, सच्चे भाव। मानव जीवन के निरंतर चिंता में रहने के सच्चे भावों की सच्ची प्रस्तुति हुई है। कविता में जीवन दर्शन है। भाव व शिल्प का बेहतरीन तालमेल है।

    • वाह

  • कान्हा ने बोला राधा से,
    तेरी ये अखियां कजरारी।
    मन मोह लेती हैं मेरा प्यारी,
    इठलाती फिर राधा बोली।
    मोहन तुम्हारी मीठी बोली,
    हर लेती है हिय को मेरे,
    भागी भागी आती हूं सुन, […]

    • राधाकृष्णन का मधुर वार्तालाप
      बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण

    • राधे राधे
      बहुत सुन्दर भाव

    • भागी भागी आती हूं सुन,
      मीठी तेरी बंसी की धुन।
      कान्हा बोले मृदुल भाषिणी,
      सुन मेरी सौन्दर्य राषिणी
      —– कवि गीता जी की बहुत सुंदर कविता है यह। भाव की मधुरिमा पाठक हृदय में मिठास का संचार करने में पूरी तरह सक्षम है। शिल्प भी श्रेष्ठ भाव भी उत्तम, अभिव्यक्ति और भी लाजवाब। बहुत खूब

      • कविता की इतनी सुंदर और उत्साह वर्धक समीक्षा एक विद्वत ही कर सकता है। आपकी कलम से निकली इस सुंदर एवं उत्साह प्रदान करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।कविता के भाव को अच्छी प्रकार से समझने के लिए अभिवादन सर

    • अतिसुंदर भाव

  • क्रोध हर लेता है मति,
    करता है तन-मन की क्षति।
    क्रोध की ज्वाला में न जल,
    क्रोध तुझे खाएगा प्रति पल।
    क्रोध का विष मत पीना,
    मुश्किल हो जाए जीना।
    छवि नहीं देख पाता है कोई,
    कभी उबलते जल में।
    सच्चाई ना देख स […]

    • शान्ति में ही है तेरी भलाई।
      शान्ति का पथ अपना ले,
      शान्ति की शक्ति पहचान
      शान्ति में ही सुख मिलेगा
      — शांति के पथ पर चलने की प्रेरणा देती कवि गीता जी की उच्चस्तरीय रचना है यह। शिल्प व भाव दोनों ही बहुत सुंदर हैं। लेखनी की यह निरंतरता सदैव ही बनी रहे।

    • उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक स्वागत और धन्यवाद सतीश जी🙏

    • बहुत सुंदर

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