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  • विकास कुमार posted an update in the group Group logo of हिंदी कवितायेंहिंदी कवितायें 1 month, 3 weeks ago

    @astrology
    परतंत्रता की बेड़ियाँ जो थी, वो हमारे महान क्रान्तकारी तोड़ गये ।
    स्वतंत्रता की नीब को जो खाक़ में मिलाना चाहता था, वो खूद ही जमीं में सिमट गये ।
    बाकी जो हिन्द को अधीन करना चाहता था, उसको हमारे धरतीपुत्रों ने सुला दिया ।
    भारत की जमीं है यारों बंजर हो फिर भी सुपुत उगाती है, भारत का हर एक लाल मिट्टी को माता समझता है ।।

    उस देश को मत कभी कमजोर समझना, जिस देश में हर एक युवा खूद को भगत सिंह कहते है ।
    हर एक बुजुर्ग वीर कुँवर की गाथा गाते है, हर एक बाला वीर वीरागंनी झाँसी होती है ।
    उस देश के मजदूर तो क्या उनके परिस्थियाँ भी उनको मजबुत बनाता है ।
    पाषण को पुज-पुजके जिस देश के नर पत्थर को देवता बनाता है, वह देश भारत कहलाता है ।।2।।

    टुटते नहीं यहाँ कभी इंसानियत रिश्ते, हर रोज दीनों को देने वाले सोने-चाँदी देते है ।
    यहाँ के भिखारी भी खूद को सौभाग्यशाली समझते है, जो भारत देश में रहते है ।
    भारत की पहचान ये नहीं कि आज ये नग्नता फैलाकर विकास चाहे और देशों की तरह ।
    ये तो सदियों से अखण्ड, विश्वगुरू महान ऋषि-मुनियों का देश है, चाणक्य, कबीर इनके फूल है ।।3।।

    खिलते है इनके बगियाँ में फूल मगर मजाल है किसी का तोड़ तो इसे, यही बात प्रकृति की शान होती है ।
    पुष्ष की अलिभाषा पूछकर ही माली, फूलों को वीरपुत्रों के राह पे बिछाते है