Dhruv kumar

  • मेरी गुड़िया रानी आखिर
    क्यों बैठी है गुमसुम होकर।
    हो उदास ये पूछ रहे हैं
    तेरे खिलौने कुछ कुछ रोकर।।
    कुछ खाओ और मुझे खिलाओ
    ‘चंदा मामा….’ गा-गाकर।
    तुम गाओ मैं नाचूँ संग- संग
    डम -डम ड्रम बजाकर ।। […]

    • छोटी सी गुड़िया रानी पर बहुत सुंदर कविता

    • कवि शास्त्री जी की बेहतरीन रचना। कवि ने प्यारी गुड़िया से जुड़ी बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति की है। कविता में कोमलता है, स्नेह की व्यापकता है औऱ बहुत मधुरता है। वाह
      चंदा मामा….’ गा-गाकर।
      तुम गाओ मैं नाचूँ संग- संग
      डम -डम ड्रम बजाकर ।।
      वश मुन्नी तू इतना कर दे।

    • मासूम गुड़िया की नटखट हरकतों पर बहुत सुंदर रचना

  • जो बादल सदैव ही निर्मल
    वर्षा करते थे
    निज तपकर अग्नि में
    तुमको ठण्डक देते थे
    वह आज गरजकर
    तुम्हें जगाने आये हैं
    ओ राजनीति के काले चेहरों !
    ध्यान धरो,
    हम ‘हल की ताकत’
    तुम्हें दिखाने आये हैं…
    ————- […]

    • बहुत ख़ूब किसानों पर अति उत्तम रचना

    • बहुत बहुत ही सुंदर रचना

    • अति सुंदर रचना
      फोटो पर सटीक बैठती हुई रचना
      आपने शब्दों के माध्यम से मस्तिष्क में किसानों की व्यथा को खींच दिया है
      शब्दों के माध्यम से फोटो का रेखांकन अति सुंदर है
      जिसकी तुलना नहीं करी जा सकती है
      किसान आंदोलन पर बहुत ही मार्मिक प्रस्तुतीकरण

    • सराहनीय प्रज्ञा जी
      ऐसे ही लिखते रहिए।

    • आपकी लेखनी हमेशा की कमाल करती है बहन प्रज्ञा जी।
      आपने किसान की व्यथा का सजीव चित्रण किया है।
      आपकी लेखनी काबिले-तारीफ है। आप यूं ही ज्वलन्त विषयों पर लिखती रहे।
      सादर अभिवादन

    • अतुलनीय काव्य रचना।
      चित्र का सजीव चित्रण।
      किसान बिल और उससे प्रभावित अन्नदाता का करुण वर्णन अत्यधिक प्रभावशाली चित्रण।

    • बहुत सुन्दर काव्य रचना ।

    • आपने शब्दों के द्वारा फोटो को सजीव बना दिया है..
      कविता को सार्थक बनाकर एक किसान की सूखी रोटी को देखकर मंशा को प्रकट किया है जो काबिले तारीफ है…
      सच में बड़ा ही मार्मिक चित्र दिया गया है सावन द्वारा जिसके लिए सावन प्रशंसा का पात्र है..ऐसी प्रतियोगिताएं होती रहनी चाहिए जिससे कवियों की साहित्य क्षमता को और तराशा जा सकेगा…..

    • किसान आन्दोलन में सब किसान ही नही हैं प्रज्ञा जी
      कुछ राजनीति की रोटियां सेंकने वाले भी हैं जिन्होंने किसानों की छवि धूमिल की.
      परंतु 200 किसानों के मरने पर बीजेपी के नेता दुख प्रकट करने की बजाय कहते हैं कि इतने महीनों में इतने किसान तो मर ही जाते हैं… कोई हार्टअटैक से मरता है कोई बुखार से…यानी किसानों का मरना स्वाभाविक है शर्म आनी चाहिए ऐसी सोंच पर…
      आपकी हर एक पंक्ति खूबसूरत है परंतु मुझे इसी बात पर रोना आया….

      “दो सौ से ज्यादा किसान भाईयों की मृत्यु हुई
      हम भारत मां के लाल बचाने आए हैं”
      मार्मिक भाव और सुंदर शिल्पकारिता….👌👌👌👌👌

    • सच में सरकार कान में तेल डालकर बैठी है
      किसान की समस्या सुनने को तैयार नहीं है आखिर भारत देश में किसानों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है??? क्या जरूरत थी जो किसान बिल बना ? और यदि बना भी तो जब किसान ही संतुष्ट नहीं तो किस काम का ???

    • You are a professional poet as well as a painter, that is why you understand the picture closely, then only your poet sees what is the spirit of the picture, I am convinced of your writing, I am bowing before you…

    • There is truth in your poem.
      You have imprinted the picture in the brain through your poem.
      I would just like to say that you are a pen magician..

    • You made the photo come alive with words ..
      The poem is meaningful and adorned with beautiful artistry, you are amazing, Pragya ji …

    • मैं पहली बार सावन पर आया और देखा कि यहां हर कवि दूसरे कवि की सराहना करता है निन्दा नही करता..

      आपकी कविता १००% सत्य है और हृदय को छूने वाली है
      फोटो पर कविता लिखना बहुत पसंद आया मुझे..
      आपकी कविता और उसकी व्याख्या तथा समीक्षा भी बहुत सुंदर है…..

    • Beautiful poet and thoughtful poetry

    • Photo ke har Ang ko vyakt karti rachna

    • जो बादल सदैव ही निर्मल
      वर्षा करते थे
      निज तपकर अग्नि में
      तुमको ठण्डक देते थे
      वह आज गरजकर
      तुम्हें जगाने आये हैं
      ओ राजनीति के काले चेहरों !
      ध्यान धरो,
      हम ‘हल की ताकत’
      तुम्हें दिखाने आये हैं…
      Waah very nice poetry 👌👌👌👌
      Your poetry out of the world

    • बहुत ही मार्मिक कविता ।

    • आपकी कविता फोटो पर बहुत सटीक बैठती हैl किसानों का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया है

    • आपने किसान की व्यथा पर बहुत ही सजीव वर्णन किया हैl

    • Very nice

    • फोटो पर सटीक बैठती हुई बहुत ही मार्मिक कविता का प्रस्तुतीकरण l

    • बहुत ही सुंदर काव्य रचना ।

    • आपकी कविता और उसकी व्याख्या बहुत ही सुंदर है

    • मैं बहुत प्रसन्न हूं कि सावन अब कमेंट की संख्या के आधार पर नही बल्कि कविता की समग्रता और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर विजेता चुनता है जिससे साहित्य का उत्थान होता है और कवि प्रोत्साहित हो अच्छा लिखते हैं..
      मैं यही चाहूंगा कि गुणवत्ता की विजय हो वह कवि चाहे आप हों या कोई और..
      सावन का यह सकारात्मक स्वरूप हमें उसमें विश्वास पैदा करता है…

    • रही बात फोटो प्रतियोगिता की तो मैंने देखा कि आपकी कविता उस पर सटीक बैठती है

    • Nice poetry Dii ❤️❤️

    • सुन्दर प्रस्तुति

    • आपने किसान आंदोलन के दर्शन करा दिए अपनी कविता के माध्यम से।
      किसान आंदोलन का यथार्थ चित्रण किया है आपने,
      एक गरीब किसान की मनोदशा का इससे सुंदर वर्णन हो ही नहीं सकता।

  • मैं किसान हूं
    समझता हूं मैं अन्न की कीमत
    क्योंकि वो मैं ही हूं
    जो सींचता हूं फसल को
    अपने खून और पसीने से
    मरता हूं हर रोज
    अपने खेत की फ़सल को जिंदा रखने के लिये
    ताकि रहे न कोई भूखा
    कोई इस दुनिया में
    फि […]

  • जिंदगी थी बस
    चंद लम्हों की दास्ता
    रह गयी अधूरी फिर भी
    अनकही, अनसुनी

  • वर स्वरुप में बमबम
    मालतीमालया युक्तं सद्रत्नमुकुटोज्ज्वलम्।
    सत्कण्ठाभरणं चारुवलयाङ्गदभूषितम्।।
    वह्निशौचेनातुलेन त्वतिसूक्ष्मेण चारुणा।
    अमूल्यवस्त्रयुग्मेन विचित्रेणातिराजितम्।।
    चन्दनागरुकस्तूरीचारुकु […]

  • दुलहिन गिरिजा माता

    सुचारुकबरीभारां चारुपत्रकशोभिताम्।
    कस्तूरीबिन्दुभिस्सार्धं सिन्दूरबिन्दुशोभि […]

  • तुमने कहा की मुसलमान गलत है
    हमने मान लिया
    तुमने कहा लॉकडाउन मे घर वापसी कर रहे मज़दूर गलत है कोरोना संक्रमण का कारण है
    हमने मान लिया
    तुमने कहा किसान आतंकवादी है ख़ालिस्तानी
    हमने मान लिया

    तुमने कहा […]

  • जो हल जोते, फसल उगाए

    उसे उसकी कीमत नहीं मिलती।

    जो मजदुर उत्पाद बनाए

    उसे उसकी कीमत नहीं मिलती।

    भूख और लाचारी का ऐसा आलम है

    अब जान सस्ती है रोटी नहीं।

    जात और धर्म का ऐसा टॉनिक खिलाय […]

  • बात एक शायर की करता हू
    जिसे अपनों ने ठुकराया
    वफ़ा की साजिस देखो
    बेवफाए मोहब्बत ने
    ज़िन्दगी की सबसे बड़े
    सच से वाकिफ बनाया
    की यह चलती जाती है

    सुर्ख हवाएं बस ये एलान किए जाती है
    ज़िन्दगी जिए जाती है […]

  • सोचता था हक़ से मांग सकता हू तुझसे कुछ भी
    देखा तोह वोह हक़ तूने कब किसी और को दे दिया

    जिस नाम को तबीर बना के घूमते थे
    वोह हर किसी के साथ जुड़ गया

    गम नहीं है तेरे बेवफाई का
    बस खुद के भरोसे से […]

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