javed khan Hindi

  • कविता-पर्यावरण है क्या
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    सभी सुनो,
    पर्यावरण है क्या,
    क्या इसकी परिभाषा है,
    प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से,
    जीव जंतु मानव –
    जिससे प्रभावित हो,
    उसी को कहते पर् […]

    • पर्यावरण पर बहुत खूबसूरत रचना

    • दूषित जिससे अंबर होगा,
      सरिता जिससे सूखी होगी,
      सागर की सारी मछली-
      पानी में रहकर भूखी होगी,
      _______पर्यावरण पर प्रकाश डालती हुई कवि ऋषि जी की बहुत उम्दा प्रस्तुति

    • बहुत खूब

  • कविता-चारआने की संपत्ति को
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    चार आने की संपत्ति को
    रुपये में खरीदा था
    खरीदा उस वक्त मैंने
    जब बाजार में भाव गिरा था,
    मैं बाजार में
    नया खरीददार […]

  • कविता-आपसे दूर हूं
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    पापा मैं आपसे दूर हूं
    आपके आशीष से भरपूर हूं,
    कमबख्त काम ने घेरा है मुझे
    ऐसा बंधक है बनाया
    न गांव आ सकता
    ना शहर छोड़ सकता,
    गांव में जब आता हूं,
    शरण स्नेह पाता […]

  • कविता-बावरी
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    सुन बावरी
    क्यों लड़ती है मुझसे,
    एक दिन रूठ जाऊंगा,
    तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा,
    संग में कॉलेज आना जाना,
    पार्को में समय बिताना,
    होटल में खाना खाना,
    फोन पर चै […]

  • कविता-जहर पिला दो
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    जहर पिला दो
    जहर खिला दो
    मम्मी पापा उपकार करो
    जन्म नहीं देना मम्मी
    दर्द मेरा एहसास करो
    मुझ नन्हीं बच्ची पर
    हवसी रहम नहीं करता है,
    मन की प्यास बुझा […]

    • बहुत सुंदर रचना, सुन्दर अभिव्यक्ति

    • बहुत ही मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है कवि ऋषि जी ने अपनी इस कविता में। बहुत ही हृदय विदारक रचना है। बेहतर शिल्प और कथ्य में समन्वय स्थापित करती हुई रचना।

    • अति सुंदर

    • अतिसुंदर भाव

  • कविता -मुझे वरदान दो
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    वरदान दो वरदान दो
    मुझे वरदान दो,
    उठी है जो लहर मुझ में
    हो विकट रूप जैसा
    गति तेज सुनामी जैसा
    साकार हो आकार हो
    प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत हो, […]

    • बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    • सरिता की धार जैसी,
      पृथ्वी के धैर्य जैसा
      मेरा पहचान हो ऐसी
      ऐसा मुझे वरदान दो,
      वरदान दो….
      ___बहुत सुन्दर पंक्तियां हैं कवि ऋषि जी की , सम्पूर्ण कविता ही बहुत उत्कृष्ट भाव लिए हुए है । प्रभु से वरदान मांगती हुई बहुत बहुत उम्दा रचना । वरदान अवश्य मिलेगा, बहुत लाजवाब प्रस्तुति

    • अतिसुंदर भाव

  • कविता-भाई खुश हो
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    भाई खुश हो,
    आज तुम्हारा जन्मदिन है,
    मैं तो तुमसे दूर हूं
    मेरा आशीष तुम्हारे साथ है,
    प्यार मिले ,
    सत्कार मिले,
    सम्मान मिले,
    मिले जगत से –
    खुशियों का सार […]

    • आज तुम्हारा जन्मदिन है,
      मैं तो तुमसे दूर हूं मेरा आशीष तुम्हारे साथ है,
      ____कवि ऋषि जी द्वारा प्रस्तुत अति सुन्दर कविता ,एक बहन की, उसके भाई के जन्म दिन पर बहुत सुंदर आशीष देती हुई अति उत्तम रचना

    • बहुत सुंदर प्रस्तुति ऋषि। खूब लिखते रहें, अति सुन्दर

    • बहुत सुंदर

  • मुक्तक-खाएंगे
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    अब बनाने वाले ही खाएंगे ,
    कोई खाने वाला रहा नही,
    लगता है, सब दावत मे गए,
    या घर सब, रुठ के छोड़ गए
    पर गए कहां यह पता नही,
    पता होता तो हम उन्हें बुलाते,
    अब घर सूना सूना ल […]

  • कविता- कब्र पर आकर
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    दौड़ रही हूं,
    इधर उधर,
    ढूंढ रही हूं,
    डगर डगर,
    पूछ रही हूं,
    नगर नगर,
    कोई मुझको,
    पता बता दो,
    मेरे साजन का,
    घर बता दो|
    कहाँ बसे हो
    मुझे छोड़ कर,
    आओ […]

  • कविता- क्या खोज रहे हो
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    क्या खोज रहे हो,
    कहाँ भटक रहे हो,
    अंदर सुख हैं-
    बाहर सुख नहीं हैं
    खुद को मजबूत बना
    हरदम लड़ अपने से,
    जिस दिन विजय तू पायेगा,
    ज्ञाने […]

    • अतिसुंदर रचना

    • ऋषि जी आपके भाव सचमुच उच्चस्तरीय हैं। आपकी संवेदना की जड़ बहुत गहरी है। मैं चाहता हूँ कि आपकी लेखनी काफी ऊँचा उठे।

      • उत्साहवर्धन के लिए समीक्षा के लिए हृदय के संपूर्ण गहराई से आपका आभार

    • “मन मति मद चित्त रूह पर उस दिन ब्रह्म समान हो जाएगा,”
      अनुप्रास अलंकार से सुसज्जित बहुत ही उत्कृष्ट पंक्तियां। ज्ञान को समर्पित बहुत सुंदर रचना

  • कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके
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    विश्व पटल पर
    हिंदी चमके
    ऐसा राग सुनाता हूं,
    दुनिया भर के लोग सुनो
    क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं,
    जब दुनिया में
    कोई भगवान न […]

    • युवा कवि ऋषि जी, आपकी यह बहुत सुंदर रचना है। इसमें यथार्थ और आदर्श का बेहतरीन तालमेल है। मातृभाषा हिंदी के सम्बंध में बहुत सरस और सटीक पंक्तियाँ लिखी हैं आपने। बहुत खूब, लेखनी की यह निरंतरता बनी रहे। यूं ही रोज लिखें, निखरते रहें।

      • धन्यवाद आपका सर ♥️🙏🏻🌹 हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    • बहुत खूब

    • “क्यों न गाऊँ हिंदी मैं मेरी मातृभाषा हिंदी है
      सर्वत्र रहे यह हिंदी विश्व पटल पर मेरी हिंदी हो।”
      मातृभाषा पर गर्व होना ही चाहिए ,कवि ऋषि जी ने प्राचीन भारत के भी दर्शन करवा दिए हैं अपनी कविता के माध्यम से । बहुत सुंदर पंक्तियां, उत्तम लेखन

  • मुक्तक-कवि का धर्म
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    कवि का कोई
    धर्म नहीं हो सकता है,
    मंदिर मस्जिद चर्चो में
    भगवान नहीं हो सकता है,
    दुख को दुख कहता है जो
    सुख को सुख कहता है जो
    खुद के ,चाहे औरों पर हो,
    सबके आं […]

    • कवि ऋषि जी की यह बहुत प्रेरणादायक रचना है। इसमें कवि कर्म को देशहित, समाजहित में लिखने को प्रेरित किया गया है। कवि के हृदय में एकत्रित उच्च भावनाएं, विचार और संवेदनाएं अपनी प्रखरता से अभिव्यक्त हुई हैं। युवा कवि की बेहतरीन सोच है यह कविता। सत्य की ओर प्रेरित करने वाली, नारी के सम्मान को स्थापित करती चहुमुंखी अभिव्यक्ति है यह कविता।

      • बहुत सुंदर समीक्षा सर ,हम आपका हृदय से आभार प्रकट करता हूं

    • बहुत सुन्दर रचना

    • “लिखना जो भी सोच समझ के लिखदेश धर्म जनता के सब हित में लिख “।कवि का धर्म समझाते हुए कवि ऋषि जी की बहुत प्रेरणादायक रचना , जिसमें नारी के सम्मान की बात भी कही गई है और देशहित की भी । बहुत सुंदर कविता उत्तम लेखन

    • अतिसुंदर भाव

  • कविता- गालिब
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    कवि जागो
    लेखक जागो,
    जागो जग के
    शायर सब ,
    रोयेंगे कल
    यदि आज नहीं
    जागे हम|
    प्रकृति हमारा
    खंडहर हो रहा
    कल कहाँ से
    उपमा लायेंगे
    जब फूल नहीं
    बागों में […]

    • अति उत्तम रचना

    • अति उत्तम रचना

    • बहुत खूब

    • कवि ऋषि जी अन्य कविताओं की भांति आपकी इस कविता के भाव भी उच्चस्तरीय हैं। आपकी कविताओं में प्रेरणा की अनुगूंज अनवरत सुनाई देती रहती है।न ये कृत्रिम हैं और न ही सजावटी। अतः आपकी काव्य प्रतिभा यूँ ही निखरती रहे। खूब लिखें, आगे बढ़ते रहें, समाज को दिशा देते रहें।

    • पर्यावरण, नदियां जंगल और वनस्पति की चिंता में परेशान कवि की अति उत्तम रचना । भावी पीढ़ी को सुन्दर और उपयोगी संदेश देती हुईं
      बहुत सुंदर और प्रेरक कविता

  • कविता -पीपल का वृक्ष
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    जीवन जीने का आधार क्या है,
    हर धर्मों का सार क्या है,
    मानव क्या पाता है,
    जीवन में क्या खोता है|
    वृक्ष लगाओ संदेश मिला है,
    रोग मिट […]

    • अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना शतप्रतिशत यथार्थ वर्तमानकालिक, समाज में बहुत जरूरत है वृक्षारोपन की।

    • पीपल के वृक्ष के वृक्ष पर बहुत सुंदर कविता है। एक यही वृक्ष ऐसा होता है जो रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है। अति सुंदर रचना

    • शोध करो विकास करो,
      जीवों पर अब दया करो|”
      ——– कवि ऋषि जी की सुन्दर सोच को सामने लाती सुन्दर कविता है यह। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से सीधा संवाद किया है। उनकी कविता हृदय से निकली संवेदना प्रतीत होती है।
      बहुत खूब

      • धन्यवाद सर, यूं आपका आशीर्वाद बना रहे मुझ पर,
        शुभ प्रभात

  • कविता -चैत्र मास
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    शिक्षा समाज देश के सजग प्रहरी,
    मौन धारण कर के बैठे हो,
    बिगड़ रही नव पीढ़ी अपनी
    चुप्पी तोड़ो आवाज उठाओ,
    बच्चों को इतिहास बताओ,
    पता आपको यह त्यौहार नहीं अपन […]

  • कविता -शिक्षा प्रेमी
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    हे शिक्षा प्रेमी
    क्या बात कही तुमने
    सच्चाई संग प्रहार किया
    उतर गए कई नकाब,
    बेच रहे शिक्षा को,
    शहरों में खोलकर दुकान,
    फीस पर फीस,
    निकली जनता की खीस, […]

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