KRITIKESH KUMAR TRIPATHI

  • इस गर्जन का इस तड़कन का ,
    करुण स्वर कुटुंब के तड़पन का,
    कम हो जाये इससे पहले ,
    कुछ धड़ हमको भी लाने होंगे।
    विस्मयबोधक विरक्ती का,
    परिमाण कड़ी निंदा शक्ति का,
    कम हो जाए इससे पहले,
    कुछ रुदन हमको भी लाने हो […]

  • उठ तू शहर से पर गांव को याद रख,
    पहुँच आसमां से ऊपर पर जमीं को याद रख,
    बेशक मिले होंगे यार हजार पर ,
    जर्रे ए जिगर में इस दुश्मन को याद रख।
    अगर लाना है अपनी डाल पर फल ए बहार,
    तो अपनी टहनियों में लचक बरक़रार रख…

  • मै जीत गया होता, मै हार गया होता,
    तेरा साथ जो ना होता, मै उलझ गया होता,
    तेरे साथ का है ये असर जो दौड़ उठा हूँ मै
    नही तो दुनिया की भीड़ मे सिमट गया होता,
    मै जीत गया होता, मै हार गया होता,
    माँ वचन तेरा अब भी म […]

  • जब पहला कदम बढ़ाना था
    कोई उगली पकड़ाया था
    जब घुटनों मे मेरी चोट लगी
    कोई मलहम लगवाया था
    उस चोट से आगे फिर मेरा कदमो का सफर जब बढ़ता है
    पेनसिल के युग मे जाकर करके वो सीधी मेड़ पकड़ता है.
    तब तक […]

  • जीवन के पथ पर आगे बढ़कर,
    काल नियंतर परिवर्तित कर,
    शून्य वेदना अनुनादित कर,
    प्रश्नचिन्ह को परिभाषित कर,
    स्वयं रिक्ति को भरना होगा, काल खंड में चलना होगा।
    हृदय कंठ स्वर निर्मल करक […]