Lavraj Tolia

  • पहली बारिश मे टहलना….
    देखना कभी शाम ढलना…
    तितलियों के पर पकड़ना….
    ख्वाब का आँखो मे पलना..
    बात छोटी है
    मगर मायने रखती है….
    रूठे बच्चे को मनाना….
    दर्द मे भी मुस्कुराना…
    काँच रस्ते से हटाना…
    हो […]

  • चलो ना…..
    खो जाये दोनो…..
    उस दुनिया मे ….
    जहाँ सड़को पर किताबो के
    किरदार मिलते हो…..
    जहाँ तस्वीरें बात करती हो….
    जहाँ बारिश ना रुके…..
    जहाँ चाँद बेदाग निकले…..
    पूरा का पूरा.. […]

  • शाम अब ऐसी लगती है
    जैसे बीते दिन का पुराना अखबार रखा हो
    ना कोई नयी खबर है…
    ना कहने को कोई किस्सा…
    ना धूप सुनहरी लगती है..
    ना रात स्याह…
    सब कुछ फीका सा हो गया है जैसे
    वो भी क्या वक़्त था…
    जो colleg […]

  • बारिश के मौसम मे अकसर
    अदरक वाली चाय की खातिर….
    हल्की सी एक “walk” लेकर…
    “कॉलेज” की “कैंटीन” तक हो आते थे दोनो…
    चाय क्या थी एक बहाना था
    तुम्हे जी भर के देख लेने का….
    और फिर अफसानों का दौर च […]

  • तुम आहिस्ता से पर्दे खोल देना
    सुबह खिड़की के….
    मैं बन के धूप चौखट से तुम्हारी
    छन के आऊँगा…
    जब पंछी चहचायेंगे तुम्हारे घर के आँगन मे…
    जरा तुम गौर से सुनना
    मेरी आवाज मिलेगी…
    कभी जो सर्द सा झोंका
    तेरे चेहरे […]