Mayank Vyas

  • भले ही सो रहा हूँ मैं
    थका-माँदा यहाँ
    फुटपाथ में
    मगर चलती सड़क है
    रुकती है बमुश्किल
    एकाध घंटा रात में।
    उसी में नींद लेता हूँ
    उसी में स्वप्न आते हैं,
    कभी जब राहगीरों के
    बदन पर पैर प […]

  • छोड़ दे छोड़ दे उदासी को
    कोई फायदा नहीं है चिंता से
    गम में मत रह बढ़ा न दर्द ए दिल
    कोई फायदा नहीं है चिंता से।
    दुःख तो होता है कुछ भी खोने से
    न कोई लौटता है रोने से
    कुछ नया सोच दूर पीड़ा कर
    ख्वाब ला मन में त […]

  • कोरोना का कहर हुआ,
    गली-गली हर शहर हुआ।
    आ गई है दूजी लहर,
    कोरोना ने कितना बीमार किया।
    दर्द दिया लाचारी दी,
    बहुत बड़ी बीमारी दी
    परेशान बहुत किया इसने,
    कितनी बड़ी महामारी दी।
    फ़िर भी, किसी […]

  • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
    चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
    चाॅंद की रौशनी में,
    तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
    दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी,
    तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी।
    दोनों घूमेंगे चमचम करते,
    पायल की […]

    • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
      चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
      चाॅंद की रौशनी में,
      तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
      —- वाह बहुत ही सुन्दर रचना। अद्भुत भाव,

    • इस प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • मेघा आए रे आए रे,
    ऐसी पड़ी फुहार।
    भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
    नीर गिरे भरमार।
    श्याम वर्ण के मेघा बरसे,
    खूब गिरी जल-धार।
    इतनी तो होली पर भी ना भीगी,
    जितनी भीगी बारिश में इस […]

    • बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

    • बहुत-बहुत धन्यवाद इंद्रा जी

    • मेघा आए रे आए रे,
      ऐसी पड़ी फुहार।
      भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
      नीर गिरे भरमार।
      —- कवि गीता जी की बहुत ही सुरम्य रचना । वाह

      • उत्साहवर्धन और सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • कर के आया था मजदूरी,
    था थकन से चूर।
    रूखा-सूखा खा कर सो गया,
    वह बूढ़ा मजदूर।
    ओढ़ी एक फटी थी चद्दर,
    उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर।
    हाथ पैर पटकता था,
    मच्छर भगाने को।
    एक पॅंखा भी नहीं था,
    उसके […]

  • ईश्वर का पता कहाँ है
    मन ढूंढता रहा है,
    कोई कहे यहाँ है
    कोई कहे वहाँ है।
    मगर जब गौर से देखा
    मुझे ईश्वर दिखा उसमें
    कि था जब भूख से व्याकुल
    खिलाई रोटियाँ जिसने।
    गिर पडूँ तो सहारा दे
    वही है देवता मेरा
    जरू […]

    • दिखा दे नेकियों का पथ
      प्रेरणा दे मुझे सत की
      मुझे उत्साह दे दे जो
      वही भगवान है मेरा।
      जहाँ नफरत न हो बिल्कुल
      मुहब्बत का रहे डेरा,
      _________ संपूर्ण कविता में एक सच्चाई और यथार्थ के दर्शन हो रहे हैं। जीवन के प्रत्येक दृष्टिकोण को अपने में समाहित करती हुई कवि सतीश जी की, बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्च स्तरीय लेखन

    • बहुत ही उत्तम लेखनी

  • रोशनी कर दो ना
    जला दो बल्ब सारे,
    देखने हैं मुझे
    दिवस में चाँद तारे।
    अंधेरे से बहुत
    उकता गया हूँ,
    मन भरी पीड़ को
    लिखता गया हूँ।
    अब मुझे जूझना है,
    नया स्वर फूँकना है,
    बुलंदी है जगानी
    नहीं अब टू […]

    • जिन्दगी की कहानी
      सदा चलती रही है,
      छोड़ कड़वाहटें सब
      मधुर रस स्वाद चखना है।
      _________ जीवन की कठिनाइयों में ,उत्साहवर्धन करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर और प्रेरक रचना, शिल्प और भाव का अनुपम संगम, लाजवाब अभिव्यक्ति..अति उत्तम लेखन

    • बहुत सुन्दर कविता लिखी है वाह

    • बहुत सुंदर कविता है

  • हर अवसर भुनाना होगा
    मौका मिलेगा तुझे भी
    एक दिन मुश्किल से
    उसे बस कस कर लपकना होगा।
    हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो
    बीच में फूल बनकर
    महक के साथ महकना होगा।
    उदासी फेंक कर
    कुछ दूर अपने से तुझे,
    जिगर […]

    • बहुत प्रेरक रचना

    • जिगर मजबूत कर हँसना होगा।
      राह भटका रहे कारक
      नजरअंदाज कर,
      तुझे मंजिल की सीढ़ी में
      युवक चढ़ना होगा।
      मैं नहीं हार मानूँगा
      __________ युवा वर्ग को प्रोत्साहित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। उत्तम शिल्प और भाव सहित अति उत्तम लेखन

    • उच्च स्तरीय रचना

  • तब आप कितने
    सुन्दर थे पापा
    देख पुरानी फोटो,
    देखता रह गया मैं।
    फौजी वर्दी
    चमकता चेहरा,
    फौलादी बाजू,
    सीधे लंबे से,
    जाने कब की है
    यह फ़ोटो,
    मुझे याद है
    आपकी कर्मठता की
    ठंडी चोटियों में
    देश सेवा करते […]

    • बहुत ही ममतामयी रचना, वाह

    • ठंडी चोटियों में
      देश सेवा करते करते
      दो वर्ष तक घर
      न आ पाने की
      मगर मनी आर्डर के
      ठीक समय पर आने की।
      ____________ संपूर्ण कविता बहुत ही भावुक कर देने वाली है, पिता के प्रति प्रेम भाव प्रदर्शित करते हुए, और उनकी पहचान एक कर्मठ फौजी और एक जिम्मेदार पिता के रूप बताते हुए, आपकी बहुत ही श्रेष्ठ और उच्च स्तरीय रचना

    • बहुत ही भावुक रचना

  • धन है धन्य
    धन का राज है
    सबके दिलों में।
    बिना धन जिन्दगी का
    पथ कठिन।
    न हो धन पास जिसके
    दूरियां रखते हैं उससे,
    ठुंसा हो जेब में जिसके
    खूब धन,
    भले वह एक धेला भी न दे,
    मगर उससे सभी
    रखते हैं अपनापन […]

    • धन्य है धन
      राज धन का है।
      करूँ अर्जित इसे
      इस बात पर ही ध्यान सबका है।
      __________ मानव स्वभाव के बारे में यथार्थ चित्रण दर्शाती हुई कवि सतीश जी की उम्दा रचना। किंतु अधिक धन अर्जित करने के दुष्परिणाम की ओर भी एक दृष्टि डालते हुए अति उत्तम लेखन।व्यंग्य और सच्चाई का अद्भुत समन्वय, उच्च स्तरीय प्रस्तुतिकरण

    • बहुत सच्ची व सुंदर रचना

    • बहुत उम्दा कविता

  • कविता- तरस आता है
    ——————————————
    हे गरीबी
    तुझ पर –
    तरस आता है,
    क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का|
    चाहे तू और
    बर्बाद कर दे,
    चाहे तू और
    भिखारी कर दे,
    जो इच्छा हो
    ते […]

  • जन्म लेकर जब आए,
    इस दुनियाँ में हम पहली बार।
    जो भी दृश्य देखा,
    चकित हृदय हमारा था।
    बारिश की पहली बूॅंदों ने भी,
    चकित इतना कर डाला
    पानी ,पानी कहकर हमने,
    वो दृश्य सबको दिखा डाला।
    पहली बार जब देखे […]

  • उपवन में फूल खिले, महक आई
    सुबह सुबह की मारुत, उड़ा लाई।
    याद आया वह मुझे, नलिनी फूल,
    या नासिका से जुड़ी, यह है भूल।
    देख अनदेखा किया, जाते रहे
    ख्वाब में वो ख्वाब क्यों, आते रहे।
    हम विदाई गीत यू […]

  • छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी,
    पापा की राजकुमारी है ।
    पापा की गोदी में खेले,
    पापा को सबसे प्यारी है।
    अपनी बातों से मन मोह ले,
    पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें
    फूलों जैसी है कोमल सी,
    वाणी है मीठी कोयल सी।
    उ […]

  • आँख में देखना
    कुछ नया भाव होगा,
    धड़कते दिल में
    कोई घाव होगा।
    वो पुराना हो
    या नया हो
    मगर रख हौसले से
    भरना होगा,
    मुकाबला
    समस्याओं से
    डटकर करना होगा।
    कुछ नए परिवर्तन को
    एक प्रयास तुझे
    करना होगा। […]

  • आज आरती का लेकर थाल,
    दुर्गा माॅं की करूँ वन्दना।
    बीमार पड़ी है घर के अन्दर,
    मेरी जननी मेरी माँ।
    कोरोना ने कैसा सितम किया है,
    देखो कैसा जुल्म किया है।
    आज उसे देखन को तरसूॅं,
    जिस माता ने जन्म दिया है […]

  • रम तू जा माँ के चरणन में
    घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में।
    छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में।
    बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में।
    अतः आज मौका है भुना ले, बिठा दे फूलन में।
    कहे सती […]

    • अतः आज मौका है भुना ले, बिठा दे फूलन में।
      कहे सतीश माँ ही ईश्वर है, यह बैठा ले मन में।
      ___________ यह सत्य है कि माँ ही ईश्वर है, कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्चस्तरीय लेखन

      • इस प्रेरणादायक समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी।

    • अतिसुंदर भाव

    • बहुत सुन्दर रचना

  • कविता -राम
    —————-
    राम तुम्हें फिर आना होगा
    आओ बाण उठाना होगा
    आतंकवाद से मुक्त बना
    भारत को आर्यावर्त बनाना होगा
    चाहे पाक के पाले आतंकी हों
    चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों
    रोती है घर-घर सीत […]

  • तुम ही दुर्गा
    नव दुर्गा तुम
    नारी तुम ही नवदुर्गा हो।
    जननी हो तुम जन्म की दाता।
    सब कुछ तुम ही हो माता।
    तुम से ही संसार बना है,
    दया, प्रेम, चाहत, स्नेह,
    करुणा और दुलार बना है।
    तुम से […]

    • ममता की उत्पत्ति तुम ही से
      प्राण रस उत्पन्न तुम ही से,
      बचपन, प्रौढ़, युवावस्था में
      जीवन आधार टिका तुम ही से।
      _________ नवरात्रि के अवसर पर माॅं और ममता पर आधारित बहुत श्रेष्ठ रचना अति उत्तम लेखन

      • कविता पर की गई इस सुन्दर समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार। सादर धन्यवाद

    • बहुत खूब

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