Praduman Amit

  • कविता- आलसी तू आलसी है
    ————————————–
    आलसी तू आलसी है
    तू बेरोजगार नही है
    आलस छोड़ काम कर
    वरना तेरी खैर नही है,
    डिग्री हैं डिप्लोमा हैं
    है पास तेरे कोई हुनर,
    कुछ न […]

  • युद्ध से एक सैनिक घर आया,
    बिटिया को द्वारे पर पाया।
    एक हाथ में थैला था उसके,
    दूजा पीठ पीछे छिपाया।
    पांच साल की छोटी बिटिया के,
    चेहरे पर आई मुस्कान।
    उसने सोचा पापा के हाथ में,
    खाने-पीने का है कुछ साम […]

  • प्रेम….
    किसी को समझाया नहीं जा सकता।
    यह तो केवल एक अनुभूति है,
    जो स्वयं ही होती है।
    प्रेम स्वार्थहीन है,
    सागर सी गहराई लिए हुए ,
    एक खूबसूरत एहसास!!
    इन्तजार में और भी वृद्धि करता है
    और मिलन मे […]

  • हरी दूब पर सुबह सवेरे,
    किस के बिखर गए हैं मोती।
    किस जौहरी का लुट गया है,
    देखो सुबह-सुबह खजाना।
    पुष्प और पल्लव सब मुस्काए,
    ये किसने हीरे बिखराए।
    देखो प्रकृति लुटा रही है,
    प्रा:त काल में […]

    • अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना

    • सादर धन्यवाद भाई जी🙏

    • कवि गीता जी की बहुत सुंदर रचना

    • स्वर्ण बरसा रही हैं देखो,
      सुबह-सुबह सूरज की किरणें।
      अभी तलक क्यों सो रहे हो,
      उठो सवेरा हो गया है॥
      —— बहुत ही शानदार लेखनी है। अत्यंत निर्मल भाव हैं। वाह वाह

      • इस उत्साहवर्धक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, हार्दिक आभार सर

    • बहुत सुंदर कविता

    • स्वर्ण बरसा रही हैं देखो,
      सुबह-सुबह सूरज की किरणें।…… सुबह का बहुत सुंदर वर्णन और अनुप्रास अलंकार से सजी बहुत लाजवाब कविता

    • वाह अति सुंदर

  • क्यों कोई मोहब्बत के
    काबिल नहीं होता ?
    क्यों हर किसी के सीने में
    दिल नहीं होता ?
    क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क !
    जो इस दिल के काबिल
    नहीं होता…!!

  • अब फिर से उस तरफ से
    खत आ रहें हैं
    वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
    पुंछवा रहे हैं….

    हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
    हम कैसे हैं ? बस वो यह
    जानना चाह रहे हैं…

    भूल बैठे थे हम उन्हें
    कल परसों […]

  • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

    कि अब ना बजती
    बंशी की धुन कहीं
    गइयों को ठौर नहीं
    माखन चुराने आ जाओ…

    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || […]

    • कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      ________ भगवान श्री कृष्ण की आराधना करते हुए बहुत सुंदर रचना, जय श्री कृष्ण

    • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

      कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…

      बहुत सुंदर रचना
      भगवान श्री कृष्ण जी पर बहुत ही श्रेष्ठ रचना
      श्री कृष्ण जी के किए गए कार्य को याद करती हुई तथा उन्हें बुलाती हुई सुंदर कविता

    • अतिसुंदर

  • सुबह होगी
    हाँ, सुबह होगी
    लेकर स्वर्ण रश्मियों को
    अपने झोले में
    कुछ खंगालेगी
    गेहूं की अधपकी बालियों को
    लहलायेगी
    उलझी हुई वृक्षों की लटों को
    सुलझाकर
    नदियों को काला टीका […]

    • हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      _______प्रा:त काल की बेला का प्राकृतिक वर्णन करते हुए, खेतों में पकी गेहूं की बालियों का सुंदर चित्रण करती हुई प्रज्ञा जी की अति सुंदर कविता

    • सुबह होगी
      हाँ, सुबह होगी
      लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में
      कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      उलझी हुई वृक्षों की लटों को
      सुलझाकर।।

      सुबह का सुंदर वर्णन करती हुई रचना

    • बहुत सुंदर

  • नही हाथ में उंगलियां
    पर पेट में हैं दात
    जितना कमाती है किस्मत
    उतना खाती आंत
    उतना खाती आंत
    करूं क्या मुझे बताओ
    मेरी हालत पर
    तुम ना हमदर्दी दिखाओ
    काम कराओ
    फिर मुझको दो
    हक का दाना
    मजदूर हूँ पर
    मजबूर ना […]

    • कर्म करके भरता हूँ पेट
      मुफ्त की मैं ना खाऊं
      हूँ मजदूर इसी कारण
      मैं मजबूर कहाऊं…
      _________ मजदूर वर्ग पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की एक बेहतरीन रचना

    • नही हाथ में उंगलियां
      पर पेट में हैं दात
      जितना कमाती है किस्मत
      उतना खाती आंत
      उतना खाती आंत
      करूं क्या मुझे बताओ
      मेरी हालत पर
      तुम ना हमदर्दी दिखाओ
      काम कराओ
      फिर मुझको दो
      हक का दाना।।

      उच्चकोटि की रचना लिखी है आपने मजदूरों की व्यथा का ह्रदयस्पर्शी वर्णन

    • बहुत सुंदर

  • ना राधा ना रुक्मणी,
    वो कान्हा की मीरा बनी।
    हरि नाम ही जपती थी,
    ऐसी उसकी भक्ति थी।
    विष का प्याला पी गई,
    जाने कैसे वो जी गई।
    भरी जवानी जोग लिया,
    मीरा ने सब कुछ छोड़ दिया।
    बस हरि भजन ही ग […]

    • अतिसुंदर रचना

    • ना राधा ना रुक्मणी,
      वो कान्हा की मीरा बनी।
      हरि नाम ही जपती थी,
      ऐसी उसकी भक्ति थी।
      विष का प्याला पी गई,
      जाने कैसे वो जी गई।

      मेरे प्रिय आराध्य कृष्ण और मीराबाई की भक्ति पर अति सुंदर कविता

  • घड़ी तो घड़ी है
    साधारण हो या फिर असामान्य।
    पर समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।
    डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल।
    जिसे चलाए व दर्शाए […]

    • बहुत सुन्दर रचना, वाह

    • बहुत खूब

    • समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।
      __________ समय और घड़ी पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम और सुंदर रचना

    • घड़ी तो घड़ी है
      साधारण हो या फिर असामान्य।
      पर समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।

      समय का पहिया घूमता रहता है समान्य गति से फिर चाहे किसी का समय बदले या ना बदले

      सुंदर तथा विचारणीय रचना

  • उगते सूर्य की रश्मियाँ,
    जब-जब पड़ी हरित किसलय पर
    सुनहरी पत्तियाँ हो गईं,
    देख सुनहरी आभा उनकी,
    आली, मैं कहीं खो गई।
    वृक्षों के बीच-बीच से,
    रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं
    उषा काल की सुन्दर बेला में […]

    • बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • उषा काल की मॅंजुल बेला,
      मन को बहुत लुभाती है।
      ठॅंडी-ठॅंडी पवन बहे जब,
      याद किसी की आती है।
      —— अति उत्तम रचना, कवि गीता जी की लेखनी से प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत चित्रण हुआ है।

      • उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी। आपकी दी हुई समीक्षाओं से लेखन की ऊर्जा और उत्साह प्राप्त होता है, अभिवादन सर

    • बहुत सुंदर प्रस्तुति

      • हार्दिक धन्यवाद चंद्रा जी सराहना हेतु आभार मैम

    • बहुत खूब

    • उगते सूर्य की रश्मियाँ,
      जब-जब पड़ी हरित किसलय पर
      सुनहरी पत्तियाँ हो गईं,
      देख सुनहरी आभा उनकी,
      आली, मैं कहीं खो गई।
      वृक्षों के बीच-बीच से,
      रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं..

      सुंदर अभिव्यक्ति

  • मेरी एक सखी चली ससुराल,
    आशीष लेकर बुजुर्गों का।
    गले मिलकर सखियों के,
    भावी जीवन के सपने
    लेकर अपनी अंखियों में
    सखी चली ससुराल।
    सखियों की भी दुआएँ,
    लेती जाना तुम।
    साजन सॅंग मिलकर,
    नव-सॅंसार बस […]

  • टूटे सपनों की सिसकियाँ,
    नहीं सुनता है ये ज़माना।
    इसलिए कर्म पथ पर,
    मुझको है कदम बढ़ाना।
    यदि मैं कभी भटक जाऊँ,
    चलने से, सच्ची राह पर
    तब तुम मेरा हाथ पकड़ कर,
    ले आना साथी सत् मार्ग पर।
    राहों में […]

    • अतिसुंदर भाव

    • कॅंटक या अवरोध कोई
      तब पीछे नहीं हटूॅं मैं,
      उसका विरोध करने को कभी।
      — यूँ तो पूरी कविता बहुत सुंदर है। लेकिन कविता के भीतर ये पंक्तियां बहुत ही लाजवाब हैं। लेखनी की यह निरंतरता बनी रहे।

      • उत्साह प्रदान करने वाली समीक्षा हेतु, आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी… आपकी समीक्षा से बहुत मनोबल मिलता है सर

    • वाह बहुत सुंदर रचना है

    • कमाल की रचना वाह

      • आपके द्वारा किए गए उत्साहवर्धन से लिखने की बहुत उर्जा मिलती है कमला जी, हार्दिक धन्यवाद

    • बहुत ही सही कर्म पथ पर चलने को प्रेरित करती कविता

  • हाथ में रेखा
    रेखा में जीवन
    जीवनt रेखा हाथ में।
    पर है जीवन
    और मरन
    एक ईश्वर के हाथ में।।
    हाथ मिलाने से पहले
    सोच लो एक बार।
    वायरस और बैक्टीरिया
    है बीमारी के आधार।।
    गर मिलाया
    फिर सेनिटाइज करो। […]

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवन रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में….

      महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      ______ कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम रचना, इसमें उन्होंने बताया है बेशक जीवन मरण ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आजकल के कोरोना के माहौल में जीवन मरण कुछ हद तक अपने हाथ में भी है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए उचित संदेश देती हुई अति उत्तम रचना , उम्दा लेखन।

    • महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      — बहुत सुंदर पंक्तियाँ और लाजवाब कविता है। वाह वाह

    • बहुत सुंदर कविता

    • बहुत खूब

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवनt रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में।।
      हाथ मिलाने से पहले
      सोच लो एक बार।
      वायरस और बैक्टीरिया
      है बीमारी के आधार।।

      बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  • दिखा लो तुम भी दम,
    कम नहीं हैं हम।
    अपने देश के लिए,
    हम भी जाॅं लुटा देंगे।
    चीन, पाक जैसे बैरी को,
    पल में ही मिटा देंगे।
    चीन ने कोरोना फैलाया,
    पाक ने आतंक बढ़ाया।
    भारत के जवाॅं सैनिक,
    कम नहीं हैं किसी […]

  • जापानी विधा:- हाईकु कविता
    —————————————
    **************************
    —————————————-

    ओ लेखनी ! सुन बात मेरी
    लिख अब दीन हीनों का दर्द तू
    बढ़ चल कर्म पथ पर […]

  • ओ रोशनी! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा
    जगमग कर दे यह जग
    ओ प्रकाशपुंज !
    भर प्रकाश जीवन में
    पुष्पों की लालिमा से
    महक उठे यौवन
    ओ रोशनी ! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा…

    • ओ रोशनी! चली आ
      बीता तम
      हुआ सवेरा
      जगमग कर दे यह जग
      ओ प्रकाशपुंज !
      भर प्रकाश जीवन में
      पुष्पों की लालिमा से
      महक उठे यौवन..

      वाह प्रज्ञा जी श्लेष, उपमा, अनुप्रास तथा विशोक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग
      प्रगतिवाद और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय किया है आपने

      बहुत ही सुंदर प्रोफेशनल रचना

    • प्रेरणादायक रचना

    • अति सुंदर रचना

    • अतिसुंदर रचना

    • ओ रोशनी ! चली आ
      बीता तम
      हुआ सवेरा……… . बहुत खूब, प्रातः काल की बेला का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया है प्रज्ञा जी ने अपनी कविता में

    • शानदार प्रस्तुति

  • मेरे वाचन में हो सच्चाई
    व्यक्तित्व में हो अच्छाई

    हे देव ! मुझे ऐसा वर दो
    मुझको मानवता दे दिखलाई

    ना कभी किसी का दिल तोड़ूं
    किसी पर आई आंच को सिर ले लूं

    जब बोलूं सदा ही सच बोलूं
    पशुओं की पशुता क […]

    • मेरे वाचन में हो सच्चाई
      व्यक्तित्व में हो अच्छाई

      हे देव ! मुझे ऐसा वर दो
      मुझको मानवता दे दिखलाई

      ना कभी किसी का दिल तोड़ूं
      किसी पर आई आंच को सिर ले लूं..

      आपकी यह कविता पढ़कर आपकी हृदय की गहराई का पता चलता है
      जिसमें सबके लिए स्नेह भरा है
      सुंदर वरदान मागती कवि प्रज्ञा जी रचना

    • बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • मेरे वाचन में हो सच्चाई
      व्यक्तित्व में हो अच्छाई
      _______ कवि,,,प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना ,सुंदर अभिव्यक्ति

    • लाजवाब रचना है

  • कविता- खबर ले ले
    ————————-
    कोई तो हो खबर ले ले,
    कहां थे अब तक-
    यह सवाल पूछ ले,
    वक्त का हिसाब मांगे,
    साथ रहने का साथ मांगे,
    हो फोन जब व्यस्त मेरा,
    फोन पर ही दो बात कह दे,
    वक्त गु […]

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