प्रतिमा चौधरी

  • इतना छोटा था उसे
    सेवा करके बड़ा किया था
    सोंचा और फले-फूले,
    चारों दिशाओं में फैले
    इसी नीयत से,
    उसे बड़े गमले में लगाया
    खूब खाद डाली
    खूब जल पिलाया
    बच्चों की तरह जिसे
    रोज नहलाती थी,
    वक्त पड़ने पर उसे स […]

  • किसी ने कहा
    लिखा करो
    किसी ने कहा पढ़ा करो
    यूं वक्त ना जाया करो
    कविता तो बाद में भी लिखी
    जा सकतीं हैं
    वक्त रहते पढ़ा करो..

    मेरा हृदय बोला दुनिया की
    कब तक सुनोगी
    कुछ अपने मन की भी किया करो…

  • कविता-होगा कोई लोभी
    ——————————-
    होगा कोई लोभी,
    होगा कोई ना समझ,
    जो तुम्हें खरीदे रुपयों में
    वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है,
    अरे….
    होगा कोई आंख का अंधा,
    जो तुम्हारी सूरत को , […]

  • सावन से निवेदन है कृपया अपनी साइट को अपडेट करें
    _____हमें एडिट का आप्शन उपलब्ध करायें और कविता को गहराई से समझने के लिए फोटो सेलेक्शन की भी सुविधा उपलब्ध करायें हमें बहुत असुविधा होती है

  • हंसी आ गई मुझको कि
    अब आया तुमको होश,
    जब यहां अवसान पड़ा था
    तब ना आया यह जोश
    अपना यह जोश संभालो
    करो परिश्रम
    यदि पड़ जाओ अकेले तो
    देंगे साथ हम
    देंगे आपका साथ अगर पड़ गये अकेले
    यह मंजिल पाने की खातिर
    कितन […]

    • असफलताओं से हार कर
      ना पीछे हटना है
      _______ असफलताओं से ना घबराने की सुंदर प्रेरणा दी है कवि प्रज्ञा जी ने अपनी इस कविता में, सुन्दर रचना

    • बहुत ही उम्दा लिखा है आपने
      चुनाव आते ही बैकेंसी आने लगती हैं और भर्तियां होने लगती हैं और चुनाव होने के बाद भर्तियां कोर्ट में लटक जाती हैं उसी बात को कहती कवि प्रज्ञा जी की निडर लेखनी जो
      समाज की हर छोटी बड़ी समस्या को पन्नों पर उकेरकर रख देतीं हैं जिससे कोई बात छुपी नहीं रहती है

    • उम्दा प्रस्तुति यथार्थ चित्रण

  • बेटा बीमार है
    ना होश है
    ना करार है
    कल से एक निवाला तक
    गले ना उतरा
    बेटे को बहुत बुखार है
    क्या करूं ?
    कैसे जियूं !
    यही तो मेरे जीवन का आधार है

  • कविता – मां और कवि
    —————————-
    मां और कवि में ,
    अंतर इतना,
    सीता और बाल्मिकी में,
    अंतर जितना,
    मां सुधा अगर है,
    कवि पारस पत्थर है,
    मां सरिता गर है,
    कवि सागर की गहरा […]

  • कविता- आलसी तू आलसी है
    ————————————–
    आलसी तू आलसी है
    तू बेरोजगार नही है
    आलस छोड़ काम कर
    वरना तेरी खैर नही है,
    डिग्री हैं डिप्लोमा हैं
    है पास तेरे कोई हुनर,
    कुछ न […]

  • क्यों कोई मोहब्बत के
    काबिल नहीं होता ?
    क्यों हर किसी के सीने में
    दिल नहीं होता ?
    क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क !
    जो इस दिल के काबिल
    नहीं होता…!!

  • अब फिर से उस तरफ से
    खत आ रहें हैं
    वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
    पुंछवा रहे हैं….

    हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
    हम कैसे हैं ? बस वो यह
    जानना चाह रहे हैं…

    भूल बैठे थे हम उन्हें
    कल परसों […]

    • अब फिर से उस तरफ से
      खत आ रहे हैं
      वो हमारी खबर लेने
      घर आ रहे हैं….
      _______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर और मधुर रचना

    • अब फिर से उस तरफ से
      खत आ रहें हैं
      वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत
      पुंछवा रहे हैं….

      हमारी फिक्र है या हमारी आरजू
      हम कैसे हैं ? बस वो यह
      जानना चाह रहे हैं…

      बहुत ही रूमानियत भरी रचना

    • बहुत खूब

  • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

    कि अब ना बजती
    बंशी की धुन कहीं
    गइयों को ठौर नहीं
    माखन चुराने आ जाओ…

    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || […]

    • कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      ________ भगवान श्री कृष्ण की आराधना करते हुए बहुत सुंदर रचना, जय श्री कृष्ण

    • हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
      हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

      कि अब ना बजती
      बंशी की धुन कहीं
      गइयों को ठौर नहीं
      माखन चुराने आ जाओ…

      बहुत सुंदर रचना
      भगवान श्री कृष्ण जी पर बहुत ही श्रेष्ठ रचना
      श्री कृष्ण जी के किए गए कार्य को याद करती हुई तथा उन्हें बुलाती हुई सुंदर कविता

    • अतिसुंदर

  • सुबह होगी
    हाँ, सुबह होगी
    लेकर स्वर्ण रश्मियों को
    अपने झोले में
    कुछ खंगालेगी
    गेहूं की अधपकी बालियों को
    लहलायेगी
    उलझी हुई वृक्षों की लटों को
    सुलझाकर
    नदियों को काला टीका […]

    • हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      _______प्रा:त काल की बेला का प्राकृतिक वर्णन करते हुए, खेतों में पकी गेहूं की बालियों का सुंदर चित्रण करती हुई प्रज्ञा जी की अति सुंदर कविता

    • सुबह होगी
      हाँ, सुबह होगी
      लेकर स्वर्ण रश्मियों को
      अपने झोले में
      कुछ खंगालेगी
      गेहूं की अधपकी बालियों को
      लहलायेगी
      उलझी हुई वृक्षों की लटों को
      सुलझाकर।।

      सुबह का सुंदर वर्णन करती हुई रचना

    • बहुत सुंदर

  • नही हाथ में उंगलियां
    पर पेट में हैं दात
    जितना कमाती है किस्मत
    उतना खाती आंत
    उतना खाती आंत
    करूं क्या मुझे बताओ
    मेरी हालत पर
    तुम ना हमदर्दी दिखाओ
    काम कराओ
    फिर मुझको दो
    हक का दाना
    मजदूर हूँ पर
    मजबूर ना […]

    • कर्म करके भरता हूँ पेट
      मुफ्त की मैं ना खाऊं
      हूँ मजदूर इसी कारण
      मैं मजबूर कहाऊं…
      _________ मजदूर वर्ग पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की एक बेहतरीन रचना

    • नही हाथ में उंगलियां
      पर पेट में हैं दात
      जितना कमाती है किस्मत
      उतना खाती आंत
      उतना खाती आंत
      करूं क्या मुझे बताओ
      मेरी हालत पर
      तुम ना हमदर्दी दिखाओ
      काम कराओ
      फिर मुझको दो
      हक का दाना।।

      उच्चकोटि की रचना लिखी है आपने मजदूरों की व्यथा का ह्रदयस्पर्शी वर्णन

    • बहुत सुंदर

  • घड़ी तो घड़ी है
    साधारण हो या फिर असामान्य।
    पर समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।
    डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल।
    जिसे चलाए व दर्शाए […]

    • बहुत सुन्दर रचना, वाह

    • बहुत खूब

    • समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।
      __________ समय और घड़ी पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम और सुंदर रचना

    • घड़ी तो घड़ी है
      साधारण हो या फिर असामान्य।
      पर समय बड़ा हीं
      होता जग में सदा से असामान्य।।
      टिक – टिक करती सूई वाली।
      अपने हीं चाल में चलने वाली।।

      समय का पहिया घूमता रहता है समान्य गति से फिर चाहे किसी का समय बदले या ना बदले

      सुंदर तथा विचारणीय रचना

  • हाथ में रेखा
    रेखा में जीवन
    जीवनt रेखा हाथ में।
    पर है जीवन
    और मरन
    एक ईश्वर के हाथ में।।
    हाथ मिलाने से पहले
    सोच लो एक बार।
    वायरस और बैक्टीरिया
    है बीमारी के आधार।।
    गर मिलाया
    फिर सेनिटाइज करो। […]

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवन रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में….

      महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      ______ कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम रचना, इसमें उन्होंने बताया है बेशक जीवन मरण ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आजकल के कोरोना के माहौल में जीवन मरण कुछ हद तक अपने हाथ में भी है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए उचित संदेश देती हुई अति उत्तम रचना , उम्दा लेखन।

    • महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      — बहुत सुंदर पंक्तियाँ और लाजवाब कविता है। वाह वाह

    • बहुत सुंदर कविता

    • बहुत खूब

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवनt रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में।।
      हाथ मिलाने से पहले
      सोच लो एक बार।
      वायरस और बैक्टीरिया
      है बीमारी के आधार।।

      बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  • जापानी विधा:- हाईकु कविता
    —————————————
    **************************
    —————————————-

    ओ लेखनी ! सुन बात मेरी
    लिख अब दीन हीनों का दर्द तू
    बढ़ चल कर्म पथ पर […]

  • ओ रोशनी! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा
    जगमग कर दे यह जग
    ओ प्रकाशपुंज !
    भर प्रकाश जीवन में
    पुष्पों की लालिमा से
    महक उठे यौवन
    ओ रोशनी ! चली आ
    बीता तम
    हुआ सवेरा…

  • मेरे वाचन में हो सच्चाई
    व्यक्तित्व में हो अच्छाई

    हे देव ! मुझे ऐसा वर दो
    मुझको मानवता दे दिखलाई

    ना कभी किसी का दिल तोड़ूं
    किसी पर आई आंच को सिर ले लूं

    जब बोलूं सदा ही सच बोलूं
    पशुओं की पशुता क […]

    • मेरे वाचन में हो सच्चाई
      व्यक्तित्व में हो अच्छाई

      हे देव ! मुझे ऐसा वर दो
      मुझको मानवता दे दिखलाई

      ना कभी किसी का दिल तोड़ूं
      किसी पर आई आंच को सिर ले लूं..

      आपकी यह कविता पढ़कर आपकी हृदय की गहराई का पता चलता है
      जिसमें सबके लिए स्नेह भरा है
      सुंदर वरदान मागती कवि प्रज्ञा जी रचना

    • बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • मेरे वाचन में हो सच्चाई
      व्यक्तित्व में हो अच्छाई
      _______ कवि,,,प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना ,सुंदर अभिव्यक्ति

    • लाजवाब रचना है

  • कविता- खबर ले ले
    ————————-
    कोई तो हो खबर ले ले,
    कहां थे अब तक-
    यह सवाल पूछ ले,
    वक्त का हिसाब मांगे,
    साथ रहने का साथ मांगे,
    हो फोन जब व्यस्त मेरा,
    फोन पर ही दो बात कह दे,
    वक्त गु […]

  • तान छेंड़ मुरली की
    गीत नया गा गया
    मेरी झुर्रियों भरे
    यौवन में कसाव आ गया
    पपीहे पीह-पीह
    बजने लगी जब
    कान बीच
    मृदंग बजे जीवन में
    यों उछाल आ गया
    मटकी धर सीस
    चली कुंज गली राधिका
    अधरों धर मुरली
    प्रज् […]

    • तान छेंड़ मुरली की
      गीत नया गा गया
      मेरी झुर्रियों भरे
      यौवन में कसाव आ गया
      पपीहे पीह-पीह
      बजने लगी जब
      कान बीच
      मृदंग बजे जीवन में
      यों उछाल आ गया
      मटकी धर सीस
      चली कुंज गली राधिका
      अधरों धर मुरली…
      ध्वन्यात्मक, लयबद्ध कलात्मक माधुर्य पूर्ण रचना
      श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम पर लिखी सुंदर कविता

    • सुंदर शब्दावली तथा शिल्प

    • अतिसुंदर भाव

    • तान छेंड़ मुरली की
      गीत नया गा गया
      मेरी झुर्रियों भरे
      यौवन में कसाव आ गया
      ________ श्री कृष्ण और गोपियों पर लिखी हुई कवि प्रज्ञा जी की सुंदर रचना

    • अद्धभुत अभिव्यक्ति

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