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  • Rishi Kumar posted an update 2 months, 2 weeks ago

    कविता- माखन
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    नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला|

    मैं सह लूंगी बात तुम्हारी,
    आए शिकायत रोज तुम्हारी|
    सुन सुन के मै हार गयी हू,
    गगरी फोरा सब की सारी,

    घर का ही तो माखन चुराए,
    बाल सखा संग माखन खाए|
    खा ले बेटा दुख नहीं मुझको,
    दुख तो मुझको माखन गिराए|

    डांट में तेरे प्यार छिपा है,
    माखन से मीठा हाथ तेरा है|
    कानों को तूने जब-जब पकड़ा,
    माना हमने प्यार मिला है|

    देख जरा तू अपना साथी,
    छोड़ तुझे वे भाग चले हैं|
    कर ले मिताई मुझसे बेटा,
    दूध दही सब तेरे लिए है|

    बिगड़ गया है इनके संग|
    छोड़ दे बेटा इन सब का संग|
    जो करना है तो घर में कर ले,
    मत कर बेटा सब के संग|

    सब कोई तुझको न जान सकेंगे,
    ना बेटा तुझको पहचान सकेंगे|
    समझ ले बेटा मेरी ममता की कीमत,
    कोई तुझको डांटे हम सह न सकेंगे|

    प्रेम रतन धन अनमोल खजाना,
    आजा मेरे मदन गोपाला|
    जब जब आउ इस दुनिया में,
    हो मेरा बेटा तू नटखट लाला|नटखट लाला………

    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता- ग्राम खजुरी खुर्द ,थाना-तह.कोरांव
    जिला- प्रयागराज, उ. प्र.
    पिन कोड 212360