Rishi Kumar

  • एक श्राप के कारण,
    शालिग्राम बने नारायण
    लक्ष्मी माँ ने फ़िर,
    अवतार लिया तुलसी का
    कार्तिक की एकादशी को,
    विवाह-बंधन में बंधे दोबारा
    मेहंदी, महावर,बिंदी चूड़ी आदि
    सुहाग श्रृंगार होता है,
    तुलसी माँ […]

  • कार्तिक मास की,
    शुक्ल पक्ष की एकादशी को
    देवोत्थान एकादशी आई है
    ये प्रबोधिनी एकादशी भी कहलाई है
    हर्षोल्लास साथ में लाई है
    आषाढ़ मास की,
    शुक्ल पक्ष की एकादशी को
    चार मास के लिए
    देव शयन को जाएं, […]

  • लड़की है तो क्या हुआ
    हम भी लिख पढ़ ले अगर
    दुनिया के दरवाजे खुलेंगे
    मिलेगी हमको भी डगर
    विद्या में है ताकत कितनी
    बात समझ में आ गई
    दुनिया के हर क्षेत्र में नारी
    आसमान सी छा गई
    पढ़ लिख कर हम उन्हे […]

  • आषाण की एकादशी को
    सभी देव सो जाते हैं…
    और कार्तिक की एकादशी को
    सभी देव जग जाते हैं…
    इसीलिए इस दिन को
    देवोत्थान एकादशी कहते हैं…
    आज के दिन विष्णु जी
    चारमास के बाद नींद से जागते हैं…
    और आ […]

    • एकादशी के धार्मिक महत्व का खूबसूरत वर्णन किया है आपने।

    • देवोत्थान एकादशी की आपको भी बहुत सारी बधाई प्रज्ञा
      देवोत्थान एकादशी की महिमा का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन कती हुई कवि प्रज्ञा शुक्ला जी की बेहद शानदार रचना

  • आज है कार्तिक मास की एकादशी है
    तुलसी माँ का विवाह है…
    मेंहदी लगाकर मौली चढ़ाकर
    गोटे वाली चूनर ओढ़ाकर
    माता का किया श्रृंगार है
    आओ भक्तों मंगल गाओ
    तुलसी माँ का विवाह है…
    पैरों मे […]

    • वाह, तुलसी माँ के विवाह का बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है, प्रज्ञा जी ने अपनी इस कविता में। जय हो तुलसी माँ की

  • उस माँ का दर्द कौन जाने !
    जो अपने फर्ज के लिए
    अपने दुधमुहे बच्चे को
    घर छोंड़कर जाती है..
    वो पुलिसकर्मी है अपनी ड्यूटी
    खूब निभाती है…
    कभी छोंड़ती मायके में
    कभी ससुराल में छोंड़कर जाती है..
    दिल […]

    • बहुत ही ह्रदय स्पर्शी रचना है कवि प्रज्ञा जी की ।
      कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों को ये सब तो सहना ही होता है।
      माँ भी सहती है और बच्चे भी सहते हैं । इस कविता के लिए आपको, मेरा हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा

  • सुंदर महिलाओं की सुरक्षा पर
    संसद में एक बिल पास हुआ
    पास होते ही बिल
    देश के कोने कोने में खास हुआ
    सरकार बोली सुंदर महिलाओं को
    जेड प्लस की सुरक्षा मिलनी चाहिए
    हर खूबसूरत कली सुरक्षित खिलनी चाहिए
    तभ […]

  • निस्वार्थ प्रेम का,
    एहसास है दोस्ती
    जीवन में घोले,
    जो मिठास है दोस्ती
    कठिन समय में,
    दे साथ है दोस्ती
    बिन मांगे मुसीबत में,
    काम आए है दोस्ती
    भरोसा होता नहीं है,
    आजकल हर किसी पर
    जिस पर हो जाए भरोसा, […]

    • दोस्त ही हमेशा हर हालात में साथ होते हैं अपने तो वक्त के साथ बेगाने होते जाते हैं। रचना के माध्यम से सटीक अभिव्यक्ति गीता जी

    • दोस्ती पर सुंदर भावों से सुसज्जित रचना
      जिसके माध्यम से कवि गीता जी ने दोस्ती के उसूलों और सच्चा मित्रता को परिभाषित किया है…

      • आपकी इस सुंदर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी

  • राहें हमारी मिलने के आसार नहीं हैं!
    कैसे कहूँ तुम्हारा इंतजार नहीं है!!

    मेरी हर दलील को ठुकरा चुका है ये!
    इस दिल पे मेरा कोई इख्तियार नही है!!

    ख़्वाबों में तुमसे रोज़ मुलाक़ात है मेरी!
    अफसोस हक़ीकत में […]

    • बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    • राहें हमारी मिलने के आसार नहीं हैं!
      कैसे कहूँ तुम्हारा इंतजार नहीं है!!

      मेरी हर दलील को ठुकरा चुका है ये!
      इस दिल पे मेरा कोई इख्तियार नही है!!

      बहुत ही रुमानी अन्दाज की कविता
      जिसे पढ़ने में अन्त तक आन्नद आता रहा..

  • पसीना बहाना जरूरी है तेरा,
    तभी तो कदम लक्ष्य चूमेगा तेरा।
    सजग हो स्वयं को लगा श्रम पथ पर,
    सवेरा है जग जा, आलस्य मत कर।
    तेरी राह देखे खड़ी है बुलंदी
    कर ले तू मेहनत से अक़्दबंदी,
    निशाना लगा आंख पर मत […]

    • “नौका पकड़ एक, कर पार सरिता यही जोश देती तुझे आज कविता।”
      मेहनत का पाठ पढ़ाती हुई कवि सतीश जी की बेहद प्रेरक रचना है
      पेड़ लगाएंगे तभी तो फल देगा, वाह बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति
      सुन्दर लय बद्ध शैली सहित अत्यन्त उत्साह वर्धक कविता । लेखनी को अभिवादन

    • बेहद प्रेरक रचना सतीश जी

    • कर्म ही पूजा है बचपन से सुना है और यह सत्य भी है क्योंकि कर्म के बिना मनुष्य का शरीर बेकार हो जाता है
      जैसे किसी लोहे में जंग लग जाती है अगर उसका उपयोग ना किया जाए..
      यही भाव आपकी रचना में प्रखर रूप से नजर आया है…

  • बात अपनी बोल देना, बात में डरना नहीं।
    धर्म की ही बात करना, धर्म से डिगना नहीं।
    तू अगर है सत्य पथ पर, झूठ से डरना नहीं।
    भूल कर भी बस गलत की तू मदद करना नहीं।
    सत्य के राही कभी डरते नहीं झुकते नहीं,
    तू अग […]

    • “तू अगर है सत्य पथ पर, फिर कहीं दबना नहीं।सिर उठा कर जोश से जीना, कभी गिरना नहीं,”
      सत्य की राह पर चलने वाला किसी से डरता,दबता नहीं है , यही सुन्दर संदेश देती हुई कवि सतीश जी की प्रेरक रचना , कथ्य और शिल्प की मजबूती लिए हुए गीतिका छंद युक्त अति सुन्दर कविता

    • अतिसुंदर रचना

    • वाह बहुत सुंदर
      “सत्यं वदामि च”
      को चरितार्थ करती हुई
      सदैव सत्य बोलने के
      लिए प्रेरित करती रचना
      जो समाज को एक अच्छा संदेश देती रचना..

  • गजल- सोचा न था |
    ठुकरा देगा मुझे इस तरह कभी सोचा न था |
    दगा देगा मुझे इस तरह कभी सोचा न था |
    खुद से भी जियादा एतवार था मुझे उसपर |
    दफा कह देगा इस तरह कभी सोचा न था |
    हुश्न वाले पत्थर दिल होते कहते है लोग | […]

  • कान्हा की छवि सा,
    मुख पर तेज उगते रवि सा
    मेरी गोद में आया था,
    वो मेरे मन को भाया था
    भोली सी सूरत है उसकी,
    कान्हा सी मूरत है उसकी
    मैं उसको पाकर हुई निहाल,
    उसकी सूरत-सीरत बेमिसाल

    *****✍️गीता

    • वात्सल्य की सुन्दर प्रस्तुति

      • सुन्दर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी,
        आभार 🙏

    • अतिसुंदर भाव

    • अपने बच्चे के प्रति माँ
      का छलकता हुआ प्रेम बहुत ही मार्मिक एवं वात्सल्य से परिपूर्ण है…
      भाव बहुत ही शुद्ध हैं और ममता झलक रही है

    • इतनी सुंदर और प्यार भरी समीक्षा के लिए आपका ह्रदय तल से आभार प्रज्ञा, बहुत बहुत धन्यवाद

  • कई भरम टूटे इस साल,
    बुरा हुआ इस दिल का हाल
    कोई ना मुझसे पूछना,
    बता ना पाऊंगी फिलहाल
    अश्रु लुढ़क गए गालों पर,
    आंखो का रंग हुआ है लाल
    कोशिश कर-कर
    हार गई हूं
    ज़िन्दगी हुई जी का जंजाल
    कई […]

    • अतिसुंदर भाव

    • यह वर्ष कई दुःखद यादें छोंड़ जायेगा
      पर चिंता ना कर वत्स
      नया वर्ष ढेरों खुशियां
      लेकर आयेगा..

      • हा हा, आपकी लेखनी से निकली हुई इतनी सुन्दर समीक्षा से मेरे अधरों पर मुस्कान आ गई है । बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  • भरा दर्द है सब तरफ याद रखना
    सभी दर्द में हैं मगर याद रखना,
    भुला कर गमों को खुशी खोजना बस,
    तभी जिन्दगी में मिलेगा मधुर रस।
    न चिन्ता में रहना अधिक आप ऐसे,
    सदा मस्त रहना बच्चों के जैसे,
    चिन्ता तो क […]

    • “हावी न हो पाएं गम कोई खुद पर, मनोबल रहे उच्च, कोई नहीं डर,चलो हार पर जीत पाने की सोचो, गमों को उड़ा दो, खुशी को ही खोजो”
      जीवन के सकारात्मक दृष्टिकोण को व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर और प्रेरक रचना । लाजवाब अभिव्यक्ति

    • सर, मैं आपकी रचना पर निःशब्द हूँ ।

    • अतिसुंदर भाव

    • भरा दर्द है सब तरफ याद रखना
      सभी दर्द में हैं मगर याद रखना,
      भुला कर गमों को खुशी खोजना बस,
      तभी जिन्दगी में मिलेगा मधुर रस।

      जीवन से हार मानकर
      थककर, निराश होकर
      बैठे मनुष्य को जीवन पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती रचना…

  • अच्छी किस्मत वाले लोग
    आसानी मिल जाते हैं पर
    दिल के अच्छे लोग बड़ी
    मुश्किल से रहते हैं…

  • वो हमें छोंड़कर गैरों के हो गये
    चलो स्वाद ले लेने दो उन्हें भी
    गैरों की मोहब्बत का,
    जब वो हमारे नहीं हुए
    तो किसी और के क्या होंगे ??

  • गज़ल -वो ठहरता नही है |
    बातो मे करता प्यार मगर दिल से वो करता नहीं है |
    वादे लाखो किए मगर जरूरत पर वो ठहरता नहीं है |
    बुला पास मुझे करना गैरो कहकसा उसकी आदत है |
    बदल गया मै उसकी खातिर मगर वो सुधरता नहीं है […]

  • बेंचकर सोना-चाँदी
    पीने चले अंग्रेजी देखो
    मानव के पतन का ये
    सुंदर दृश्य देखो
    दिन भर करें मजूरी
    रात में पीकर टुंन हैं देखो
    हिन्दू हो या हो मुस्लिम
    सब बैठे मयखाने में देखो
    दारू के दो पैग लगाकर
    पी लेते हैं […]

  • बाबू जी की टूटी कुर्सी
    चरमर-चरमर करती है
    जब बैठो उस कुर्सी पर
    डाल की तरह लचकती है
    बाबू जी उस कुर्सी पर
    बैठ के पेपर पढ़ते हैं
    और साथ में बाबू जी
    चाय की मीठी चुस्की लेते हैं
    सुबह सवेरे उठकर वो
    रो […]

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