Sanjay Narayan Nectar

  • कोरोना का कहर हुआ,
    गली-गली हर शहर हुआ।
    आ गई है दूजी लहर,
    कोरोना ने कितना बीमार किया।
    दर्द दिया लाचारी दी,
    बहुत बड़ी बीमारी दी
    परेशान बहुत किया इसने,
    कितनी बड़ी महामारी दी।
    फ़िर भी, किसी […]

  • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
    चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
    चाॅंद की रौशनी में,
    तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
    दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी,
    तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी।
    दोनों घूमेंगे चमचम करते,
    पायल की […]

    • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
      चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
      चाॅंद की रौशनी में,
      तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
      —- वाह बहुत ही सुन्दर रचना। अद्भुत भाव,

    • इस प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • वफा तो वही करेगा
    वफा करना जिसका काम हैं,
    अक्सर वफादार है बेवफाई करते हैं
    बेवफा तो यूं ही बदनाम हैं।।

  • कई साल गुजर गए पर
    आज भी महसूस होता है
    जब भी तू इन गलियों से गुजरता है
    तेरा आना जाना लगा रहता है
    दिल की गलियों में
    आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता है
    इश्क करना है तो इश्क कर ले
    मिटा देना है तो मुझे दिल […]

  • मेघा आए रे आए रे,
    ऐसी पड़ी फुहार।
    भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
    नीर गिरे भरमार।
    श्याम वर्ण के मेघा बरसे,
    खूब गिरी जल-धार।
    इतनी तो होली पर भी ना भीगी,
    जितनी भीगी बारिश में इस […]

    • बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

    • बहुत-बहुत धन्यवाद इंद्रा जी

    • मेघा आए रे आए रे,
      ऐसी पड़ी फुहार।
      भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
      नीर गिरे भरमार।
      —- कवि गीता जी की बहुत ही सुरम्य रचना । वाह

      • उत्साहवर्धन और सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • कर के आया था मजदूरी,
    था थकन से चूर।
    रूखा-सूखा खा कर सो गया,
    वह बूढ़ा मजदूर।
    ओढ़ी एक फटी थी चद्दर,
    उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर।
    हाथ पैर पटकता था,
    मच्छर भगाने को।
    एक पॅंखा भी नहीं था,
    उसके […]

  • संविधान निर्माता
    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
    को है शत शत नमन
    जिन्होंने बढ़ाई देश की शान
    हम करते हैं उनका वंदन
    संविधान निर्माण किया और
    पालन करना सीख लाया
    भीमराव अंबेडकर ने
    संविधान का निर्माण कराया।।

  • कविता- तरस आता है
    ——————————————
    हे गरीबी
    तुझ पर –
    तरस आता है,
    क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का|
    चाहे तू और
    बर्बाद कर दे,
    चाहे तू और
    भिखारी कर दे,
    जो इच्छा हो
    ते […]

  • जन्म लेकर जब आए,
    इस दुनियाँ में हम पहली बार।
    जो भी दृश्य देखा,
    चकित हृदय हमारा था।
    बारिश की पहली बूॅंदों ने भी,
    चकित इतना कर डाला
    पानी ,पानी कहकर हमने,
    वो दृश्य सबको दिखा डाला।
    पहली बार जब देखे […]

  • छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी,
    पापा की राजकुमारी है ।
    पापा की गोदी में खेले,
    पापा को सबसे प्यारी है।
    अपनी बातों से मन मोह ले,
    पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें
    फूलों जैसी है कोमल सी,
    वाणी है मीठी कोयल सी।
    उ […]

  • गोरी-चिट्टी, काली चमड़ी
    को रगड़ रगड़ क्यों धोता है।

    यह सब कुछ है नश्वर है
    जग में कर्मों का लेखा-जोखा होता है।

    कौन है गोरा कौन है काला
    यह ना रखता कोई याद,

    अच्छे व्यवहार को ही हर कोई
    रखता है याद […]

  • आया है नव वर्ष
    सभी को खूब बधाई
    हो गए हम तो कृतार्थ
    घर नवदुर्गा आई
    घर नवदुर्गा आईं ,
    लेकर छोटा रूप
    धूप, दीप, नैवेद्य और
    लेकर थोड़ी धूप
    मैया का वंदन किया
    मिला है मन को सुख
    मिला है मन को सुख […]

  • हिंदू पंचांग के अनुसार
    आया नव वर्ष हमारा
    दुख बीते और सुख आये
    है यही संदेश हमारा
    है यही विनती हमारी
    मिट जाए सबके क्लेश
    प्रेम ही प्रेम दिखे चित ओर
    ना हो कोई द्वेष
    ना हो कोई द्वेष
    मि […]

  • नया वर्ष आया है मित्रों
    मनाओ इसको तन मन धन से
    मां दुर्गा का वंदन करके
    नतमस्तक कर दो सिर को
    चैत्र मास आरंभ हुआ
    आया है नवल प्रभात
    धन्य भारतीय संस्कृति
    धन्य है इसकी बात
    खिले पलाश, आई नव कोपल
    मधुर मधुर […]

  • आज आरती का लेकर थाल,
    दुर्गा माॅं की करूँ वन्दना।
    बीमार पड़ी है घर के अन्दर,
    मेरी जननी मेरी माँ।
    कोरोना ने कैसा सितम किया है,
    देखो कैसा जुल्म किया है।
    आज उसे देखन को तरसूॅं,
    जिस माता ने जन्म दिया है […]

  • कविता -राम
    —————-
    राम तुम्हें फिर आना होगा
    आओ बाण उठाना होगा
    आतंकवाद से मुक्त बना
    भारत को आर्यावर्त बनाना होगा
    चाहे पाक के पाले आतंकी हों
    चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों
    रोती है घर-घर सीत […]

  • कविता- मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो
    ———————————————
    मां मुझको
    चलना सिखा दे,
    डगमग करते पैर मेरे
    अंगुली पकड़ के राह दिखा दे,
    बहुत बड़ी गलती किया हूं,
    सभ्यता संस्कारों को […]

  • 🕉️
    नव संवत है विक्रमी, अतिपावन मधुमास।
    राक्षस नाम धराया, पर आनन्द की आस।। १।।
    नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास।
    जनम मास है राम की, नौराता भी खास।। २।।
    घर घर रामायण पाठ,अरु चंडी का जा […]

  • यह हिन्दू नूतन वर्ष सभी को,
    हृदय में प्यार दे,
    खु़शियाँ अपरम्पार दे
    नए गेहूँ, चावल धान दे
    शिक्षा का वरदान दे
    दुखियों के दुख दूर कर सकूँ,
    सब को सदा सम्मान दूॅं
    ऐसा मुझे वरदान दे।
    परस्पर हि […]

    • अतिसुंदर रचना

    • निर्मल, स्वच्छ मोती सा मन हो,
      नव-वर्ष में निरोगी तन हो।
      खुशियाँ और उत्साह रहे,
      ऐसा सुन्दर जीवन हो॥
      ——- बहुत सुंदर विचार, अति उत्तम रचना। वाह

  • हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की,
    आप सबको शुभकामनाएँ।
    यही है नववर्ष हमारा,
    यही जीवन में खुशियाँ लाए।
    एक जनवरी को क्या हुआ,
    क्या ऋतु बदली कोई?
    या बदला कोई मौसम।
    क्या फ़सल बदली?
    या बदला […]

    • बहुत सुंदर रचना

    • हम अपना नववर्ष मनाते देवी माँ के पूजन से।
      कितनी सुन्दर है संस्कृति हमारी,
      हृदय प्रसन्न है माँ के आगमन से॥
      ——- बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना है। हार्दिक शुभकामनाएं

      • उत्साहवर्धक और प्रोत्साहन देती हुई सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी। हिंदू नव वर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

    • अतिसुंदर रचना

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