Satish Pandey

  • दगा करना सरल है
    वफ़ा करना कठिन है
    गिराना सरल है किसी को
    उठाना कठिन है।
    दिल जोड़ लेना और
    अपना बोल लेना सरल है,
    निभाना कठिन है।
    कुछ भी कह देना सरल है
    कर पाना कठिन है,
    चाँद तोड़कर लाने की
    बात करना […]

    • Very very nice poem

    • बहुत ही सुंदर रचना

    • “दिल जोड़ लेना और अपना बोल लेना सरल है,
      निभाना कठिन है। कुछ भी कह देना सरल है
      कर पाना कठिन है,” जीवन की सच्चाइयों को उजागर करती हुई बेहद गंभीर रचना है यह ।अपना बोल लेना तो बहुत ही सरल है ,कठिन तो निभाना ही होता है। इसीलिए तो जो निभाते हैं,उनकी कद्र होती है, उन्हें लोग याद करते हैं।कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर और दिल को छू लेने वाली कविता

  • “तो मैं आपका बच्चा था
    अब मैं बड़ा हुआ हूं तो,
    अब आप मेरा बच्चा हो
    यह कहकर पापा से गले लगा,
    अब मुझे सुकून सा मिलने लगा”
    ——- कवि गीता जी की बहुत ही लाजवाब औऱ सुन्दर रचना है। उच्चस्तरीय भाव, सरल व प्रवाहपूर्ण भाषा। बहुत खूब

  • उसका नित सत्कार करो।
    उसका भी एक परिवार है
    ,सेवक बन आधार बनो।।

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ। यथार्थ से आदर्श की ओर जाती बेहतरीन रचना।

  • कवि गीता जी ने अभिधागत लक्षणा के माध्यम से हास्य का पुट देकर प्रेरणात्मक शैली में इस कविता की रचना की है। कवि के विषय और व्यंग्य शैली दोनों में ताजगी हैं। बहुत सुंदर काव्य रचना।

  • “कर्मशील बन रोजगार करो।
    दीनन हित परोपकार करो।।
    मानव जनम न बेकार करो।
    ‘विनयचंद’ भव पार करो।।”
    कवि शास्त्री जी की बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ और उम्दा कविता है यह, यह कविता प्रेरणात्मक काव्य-बोध का निरंतर विस्तार करने में सक्षम है।

  • पूँजी तेरे खेल निराले
    जिसकी जेब में भर जाती है
    उसका संसार बदल जाती है,
    धीरे-धीरे आकर तू
    मानव व्यवहार बदल जाती है।
    दम्भ, दर्प, मद, गर्व आदि
    संगी साथी ले आती है।
    तेरे आने से मानव की
    आंखों में पट्टी बंध ज […]

    • Very nice, wow

    • सत्य वचन
      सुन्दर रचना

    • Atisunder kavita

    • “कोई मेहनत कर के भी दो रोटी नहीं कमा पाता है
      कोई बिना किये कुछ भी खातों को भरता जाता है।”
      कवि सतीश जी की यह कविता जीवन की सच्चाईयों को बयान करती है ।अपने आस पास बहुत लोग ऐसे होते हैं जो काम मेहनत में भी भरपूर धन पाते हैं,और कुछ लोग बहुत मेहनत करके भी है कम ही कमा पाते हैं।….लेकिन हम सब सुख धन से ही उठा पाएं,ये जरूरी नहीं है

  • बातें बताओ खुल कर
    क्यों इस तरह हो रूठे
    कहते थे प्यार दूँगा
    अब बन गए हो झूठे।
    बिन बात मुँह फुलाकर
    चुपचाप क्यों हो बैठे,
    क्या कह दिया है हमने
    जो इस तरह हो ऐंठे।
    लगता है पड़ गए हैं
    कुछ नफ़रतों के छींटे, […]

    • “आशा थी जिन फलों से
      वे बन रहे हैं खट्टे
      छोड़ो ये राह आओ
      दो बोल बोलो मीठे।” बहुत ही सुंदर भाव। अतिसुंदर रचना।।

    • बहुत सुंदर प्रेमाभिव्यक्ति करती हुई कवि सतीश जी की अत्यंत सरस पंक्तियां, …….. “बिन बात मुँह फुलाकर चुपचाप क्यों हो बैठे,
      क्या कह दिया है हमने जो इस तरह हो ऐंठे। “अपने साथी को मनाती हुई बहुत सुन्दर कविता । सुन्दर भावाभिव्यक्ति

  • हिंदी दिवस पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचारों को बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत करने हेतु शास्त्री जी को धन्यवाद

  • युवा कवि ऋषि जी, आपकी यह बहुत सुंदर रचना है। इसमें यथार्थ और आदर्श का बेहतरीन तालमेल है। मातृभाषा हिंदी के सम्बंध में बहुत सरस और सटीक पंक्तियाँ लिखी हैं आपने। बहुत खूब, लेखनी की यह निरंतरता बनी रहे। यूं ही रोज लिखें, निखरते रहें।

  • घमंड तेरा शत्रु है
    उसे कभी न पास रख
    तेरा करेगा अवनयन
    उसे कभी न पास रख।
    घमंड से कटेंगे तेरे
    मित्र और दोस्त सब,
    घमंड लील जायेगा ये
    आत्मीय भाव सब।
    तू शिखर को चूम ले
    गगन की यात्राएं कर
    मगर न भूल म […]

    • फिर घमंड क्यों करें,
      घमंड दुख का बीज हैं

      अति सुंदर भाव

    • अतिसुंदर भाव

    • “घमंड तेरा शत्रु है उसे कभी न पास रख
      तेरा करेगा अवनयन उसे कभी न पास रख।”
      समाज में चेतना प्रसारित करती हुई, कि मनुष्य को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। कवि सतीश जी की बहुत ही प्रेरणादायक रचना।
      बहुत सुंदर कथ्य सहित उम्दा लेखन

  • प्रवासी भारतीय दिवस पर कवि गीता जी की यह बेहतरीन रचना है। भाषा सरल है और अपने प्रभाव से पाठक तक आसानी से भाव सम्प्रेषण करने में सक्षम है। अपनी इस अभिव्यक्ति में कवि ने पलायन से जुड़ी गहरी संवेदना को प्रकट किया है।

  • हिन्दी दिवस पर आपने बहुत सुन्दर रचना की है गीता जी।
    हिन्दी मेरे भावों की जननी,
    हिन्दी में चले मेरी लेखनी
    हिन्दी में मेरा गर्व छिपा,
    हिन्दी में छिपा मेरा गौरव।
    बहुत भी लाजवाब पंक्तियाँ हैं। बहुत सुंदर कविता की सृष्टि हुई है।

  • कवि शास्त्री जी आपकी यह शायरी अति उत्तम भाव संजोये हुए है। बहुत खूब

  • तुम्हारी नादानी थी
    बोलो उसकी क्या गलती थी
    वो पेट में खेला करती थी,
    बाहर आकर दुनिया देखूंगी
    मन में सोचा करती थी।
    वो कलिका अपने जीने के
    सपने देखा करती थी,
    तुम से मम्मा कहने को
    मन ही मन आतुर […]

    • बहुत सच्ची और मार्मिक कविता

    • अतिसुंदर भाव

    • बहुत ही मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है कवि सतीश जी ने अपनी इस कविता में। समाज की कुछ सच्चाइयों को उजागर करती और मर्यादाओं को हुई सिखाती हुई बहुत ही भावुक रचना । अति उत्तम लेखन

  • आ बैठ जा
    मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर
    है उपेक्षित तू सदा से
    ठण्ड की रातों में
    सोता है खुली ठंडी सड़क पर।
    ठेके का रिक्शा खींच दिन भर
    जो कमाता है उसे
    भेजता है गांव में परिवार को,
    रोज खपता है भले
    रविवार हो शन […]

    • बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है आपने
      “शक्ति को पूरी खपाकर
      मंजिलें देता पथिक को,
      सब यही कहते हैं कम कर
      कोई नहीं देता अधिक तो।”
      बहुत ही सुंदर और विचारणीय पंक्ति है पाण्डेयजी। अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना।

    • बहुत खूब

    • अति सुन्दर रचना

    • “आ बैठ जा
      मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर है उपेक्षित तू सदा से
      ठण्ड की रातों में सोता है खुली ठंडी सड़क पर।
      ठेके का रिक्शा खींच दिन भर”
      एक रिक्शा चालक पर इतनी करुणा और दया दिखलाती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही मार्मिक और भावुक अभिव्यक्ति वाली बहुत सुंदर कविता। गरीबों के लिए हृदय में दया भावना उत्पन्न करने वाली बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

  • बाल कवि पुनीत ने ठंडक के मौसम में बनने वाले व्यंजनों , फल-फूल एवं खाद्य पदार्थों पर लेखनी चलाकर यह कविता प्रस्तुत की है जो कि बहुत ही सुंदर और सराहनीय है। यूँ ही निरंतर लेखनी चलती रहे। खूब आगे बढ़ें। बहुत सुंदर लिखा है वाह।

  • मन !!जरा सी बात पर
    तू मत दुखित हो इस तरह
    जिन्दगी है हार भी है
    जीत भी, संघर्ष भी।
    गर कभी है अवनयन तो
    है यहां उत्कर्ष भी।
    डूबने का भय कभी है
    तो कभी है नाव भी
    है कभी ढलती पहाड़ी
    और है चढ़ाव भी।
    है कभी ख […]

    • अतिसुंदर भाव

    • बहुत खूब

    • बहुत खूब

    • ज़िन्दगी की समस्त सच्चाइयों को बयां करती हुई कवि सतीश जी की अति उत्कृष्ट रचना ।जीवन दर्शन करवाती हुई बहुत ही सुन्दर और सच्ची कविता “जिन्दगी है हार भी है जीत भी, संघर्ष भी।
      गर कभी है अवनयन तो है यहां उत्कर्ष भी।”
      वाह, लाजवाब अभिव्यक्ति अति उत्तम लेखन

  • भ्रष्टाचार खत्म करो
    ऊपर की कमाई पर रोक लगाओ
    सत्यता के भाव जगाओ
    रातों-रात करोड़पति बनने की
    प्रवृत्ति पर विराम लगाओ
    नियम कानून जो बने हैं
    उन्हें काम पर लगाओ,
    गरीबों की योजनाओं को
    उन तक पहुंचने दो
    बिना लिए-द […]

    • बहुत बढ़िया रचना

    • बहुत सुंदर 👌👌

    • सरकारी कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए और एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह उन पर रोक लगाने की गुहार करती हुई कवि सतीश जी की बहुत श्रेष्ठ रचना ।कवि का कार्य कविता के माध्यम से समाज को चेताना भी होता है ,जो कवि ने बख़ूबी निभाया है। बहुत सुंदर रचना

    • अतिसुंदर भाव

  • कवि गीता जी आपकी यह कविता जीवन की सुरम्यता से जुड़ी खूबसूरत कविता है। कविता में स्वकीयता के साथ परकीयता का भाव है। न दुष्कर भाव है और न शब्दों का आडंबर है, बल्कि बहुत ही खूबसूरत तरीक़े से जिंदगी पर प्रकाश डाला है। कविता में लिखी मन की बात सीधे पाठक मन से जुड़ने में सक्षम है। कविता में संवेदनशीलता के साथ सशक्त भाषा के ज़रिए प्रभावशाली ढंग प्रस्तुति दी गई हैं।

  • कवि अजय अमिताभ जी की इस कविता में वर्तमान राजनीतिक हालात का बखूबी चित्रण किया गया है। इसमें ज्वलंत समस्याओं का समावेश बहुत ही शिद्दत से हुआ है। कविता की पंक्तियाँ सीधे मन को छू रही हैं। समूची दृष्टि से देखा जाये तो यह सिस्टम पर प्रहार करती बेहतरीन कविता है।

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