Satish Pandey

  • दशहरे का रावण सबसे पूछ रहा है

    हर वर्ष देखा है मैंने स्वयं को दशहरे पर
    श्रीराम के हाथों से जलते हुये,

    सभी को बुराई पर अच्छाई की जीत बताते हुये।

    उस लंकेश को तो मर्यादा पुरुषोत्तम ने मारा था,

    प्रभु श् […]

    • बहुत खूब, अतिसुन्दर

    • काव्यगत सौन्दर्य एवं विशेषताएं:-

      यह कविता मैंने प्रतियोगिता की फोटो को ध्यान में रखते हुए लिखी है जिसका विषय ‘रावण दहन’ है.
      मैंने इस कविता के माध्यम से सामज में व्याप्त बुराईयों के ऊपर कटाक्ष किया है.
      रावण के माध्यम से समाज में फैली समस्याओं, कुरीतियों और हर मनुष्य के अन्दर छुपी बुराईयों को दर्शाया है.
      मेरा आशय रावण को श्रेष्ठ दिखाने का नहीं वरन् समाज को एक अच्छा संदेश देने की है जिससे वह अपने अन्तर्मन को स्वच्छ करके राम के चरित्र से सीख ले और कुपथ को छोंड़कर अच्छे पथ पर अग्रसर हो.
      समाज में नई चेतना आए और रामराज्य की स्थापना हो सके.

    • बहुत सुन्दर

    • आपकी कविता प्रतियोगिता की फोटो से संबंधित सभी तथ्यों पर खरी उतरी है तथा जिस प्रकार आपने रावण को माध्यम बनाते हुए समाज की बुराईयों पर प्रहार किया है एवं समाज को नई दिशा दी है काबिले तारीफ है…
      आपने अपनी कविता में राम के व्यक्तित्व से सीख लेने की जो बात कही वह मुझे सर्वाधिक पसंद आई है…तथा आपने निर्भया जैसी स्त्रियों के प्रति हो रहे व्यवहार को रोंकने की बात की है जिससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा..
      साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूँ आपकी कल्पना शक्ति एवं सृजनशक्ति बहुत समृद्ध है कविता लेखन की यह प्रतिभा यूं ही निखरती रहे…

    • वाह प्रज्ञा जी!

      “रावण दहन”
      यह शीर्षक ही
      अपने आपमें पूरी कविता को समाहित कर लेता है..
      कविता लिखने का एक नियम यह भी होता है कि कविता का शीर्षक कैसा हो ???

      नन्ददुलारे बाजपेयी के अनुसार:-

      “कविता की शीर्षक ऐसा हो जो पाठक को कविता पढ़ने पर मजबूर कर दे तथा कविता के विषय से अवगत कराता हुआ प्रतीत हो”
      आपका शीर्षक उनके इस कथन को सत्य करता है..

      रही बात कविता की
      तो राम तथा रावण को फोटो में दर्शाया गया है
      जिसमे राम जी धनुष-बाण लिये हैं और कागज का रावण खड़ा है:-

      आपने तीनों बिन्दुओं को कविता में समाहित किया है तथा
      दशहरा पर्व मनाने की असली पृष्ठभूमि तैयार की है…

      आपकी कविता बहुत अच्छी इससे एक ओर दशहरे पर्व की कविता का काव्य समाज सम्मान प्राप्त होगा वहीं दूसरी ओर समाज में अच्छा संदेश भी जाएगा..
      आपकी लेखनी को नमस्कार है मेरा…

    • बहुत सुंदर कविता

    • बहुत सुंदर प्रज्ञा जी
      आपकी कविता का शिल्प बहुत मजबूत है
      रावण दहन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया है तथा रामचरित मानस के आदर्श पात्रों
      का उदाहरण देते हुए
      उनके व्यक्तित्व से सीख लेने की सलाह दी है जो एक कुशल कवि की पहचान है आपकी कविता में विषय की समग्रता है और आप काव्य समाज में दिन पर दिन अपनी कविताओं से योगदान देती हैं मुझे आपकी यह कविता इसलिए पसंद आई है
      क्योंकि आपने रामायण के पात्रों का जिक्र करते हुए रावण द्वारा अपने मन के सद्
      विचार रखें हैं जो समाज में नवीनता का संचार करेंगे

  • धनुष उठा श्री राम का,
    रावण की अब खैर नहीं
    चलो आज विजय की बात करें,
    हो कहीं किसी से,बैर नहीं
    त्रेता युग में रावण ने,
    श्री राम को ललकारा था
    सीता माता का हरण किया,
    अतएव राम ने मारा था
    आज के युग म […]

    • कवि गीता जी की बहुत सुंदर व बेजोड़ कृति। कथ्य व शिल्प दोनों ही दृष्टियों से उम्दा रचना है। रावण बुराइयों का प्रतीक है। उसे समाप्त करने का सुन्दर संदेश दिया गया है।

      • कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी।
        रावण की बुराइयों का समूल नाश हम माता-पिता ही ,हर पुत्र को संस्कार का उचित ज्ञान देकर ही कर सकते हैं ।यही मेरी कविता का इस समाज को संदेश है ।

    • वाह बहुत खूब, अतिसुन्दर रचना

    • बहुत खूब लिखा है आपने

    • बहुत खूब

    • क्या बात है दी अच्छी बात कही है आपने

      “अब हर घर में रावण बैठा इतने राम कहाँ से लाऊं”

      • प्रज्ञा जी,मैने ये लिखा है कि पुत्रों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देकर राम के गुण विकसित किए जाएं । ऐसे ही होगा रावण के अवगुणों का नाश और हमारे भारत देश में सूखी जीवन राम राज्य जैसा । बहुत बहुत धन्यवाद

  • *****हास्य – रचना*****
    कछुए और खरगोश की,
    पांच मील की लग गई रेस
    तीन मील पर खरगोश ने देखा,
    कछुआ तो अभी दूर बहुत है
    थोड़ा सा आराम करूं
    ना…ना वो सोया नहीं
    ये पुरानी नहीं, ये तो है कहानी […]

    • हा हा हा, बहुत बढ़िया

      • आपकी हंसी ही मेरी समीक्षा हुई आज तो सर , बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 सादर आभार

    • Nice line

    • कवि गीता जी की बेहतरीन हास्य रचना, कितनी बेहतरी से पुरानी कहानी में नया साम्य प्रस्तुत कर हास्य रचना की सृष्टि की है। जो वाली दोस्ती की बात उजागर की है वो दोस्ती होती ही गजब की पक्की है। बहुत खूब, कथ्य संप्रेषणीय है। हास्य अति सुंदर है

      • कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।दोस्ती तो दोस्ती ही होती है सर ,पक्की ही होती है । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

    • बहुत अच्छा गीता जी
      गंभीरता के बीच चटपटी गुदगुदाती रचना

      • कविता की समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत
        धन्यवाद राजीव जी🙏

  • Geeta kumari changed their profile picture 1 day, 8 hours ago

  • ना जाने आप में ऐसा क्या है
    जो सबका मन हर लेते हो…

    थोड़ी देर बैठो जिसके करीब
    उसके दिल में घर कर लेते हो..

  • मेहनत का कल मेहनताना,
    फल पाने को मन ताना बाना |

    मेहनत की सीढ़ी लगन, मंजिल मेहनताना,
    मन आतुर पाने को मेहनताना |

    देह करौंदे, मेहनत का कड़वा खाना,
    मेहनत का स्वाद कुटकी जैसा |

    अनप […]

  • कविता- इबादत
    ————————
    परमेश्वर तेरा,
    धन्यवाद करता हूं,
    तेरी इबादत करता हूँ
    तुझे प्रणाम करता हूं|
    जब जब पुकारा,
    तूने साथ निभाया,
    मेरी मुराद पूरी करके,
    मुझे खुशहा […]

  • हम सरहदों पर रहते हैं
    आज ज़माने से ये कहते हैं
    भारत माता के वीर सभी हम
    हमको सभी सरहद का रखवाला कहते हैं।

    है अगर हिम्मत किसी दुश्मन में
    तो आकर टक्कर ले हमसे
    हम भारत को अपने दिल में रखते हैं […]

  • Harish Joshi U.K changed their profile picture 2 days, 5 hours ago

  • ज़िन्दगी, है एक चमत्कार
    हर सांस इसकी है,
    प्रभु का उपहार
    प्रभु की दी हुई नेमत है ये,
    यूं कुछ भी कह के
    ना कर बेकार..

    *****✍️गीता

  • मानव का गहना है वाणी,
    वाणी का भोगी है प्राणी ।
    मधुर वचन है मीठी खीर,
    कटु वचन है चुभता तीर ।
    सद वचन है सदा अनमोल,
    मन कांटे से इसको तौल ।
    हिय का रूप है वाणी, […]

  • वो, लेखन में मेरी
    बहुत मदद करता था
    कहीं कुछ कभी
    ग़लत लिख देती
    तो, काट के ठीक
    किया करता था
    सुन्दर-सुन्दर समीक्षाएं भी
    उसके ही दम पे
    किया करती थी
    वो ना दिखता था
    तो कितनी डरा करती थी
    ये राज़ की बात है […]

    • Kya baat hai

    • सुंदर

    • बहुत ही सुंदर हास्य रचना है, पहले ऐसा लगा कि यह क्या लिखा होगा क्यों लिखा होगा, लेकिन जब अंत तक पढ़ा तो पता चला कि यह एक बेहतरीन हास्य रचना है। इस विलक्षण प्रतिभा को सैल्यूट। बहुत खूब रचना

      • कविता की इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी । हास्य रचना में यदि कोई हंसे ही नहीं तो रचना कार कुछ मायूस सा हो जाता है, बुझ सा जाता है फिर हास्य लिखने की हिम्मत ही नहीं होती । आपका बहुत बहुत आभार कि आपने इस प्रतिभा को पहचाना,और इसे विलक्षण भी बताया ।🙏🙏 अभिवादन सर..

  • तुम कहते हो प्यार नहीं तुमसे
    मान लेती हूँ तुम्हारी बात भी
    पर हम दोनों के बीच जो था
    वह सब क्या था ?

    रख लेते थे तुम मेरी गोद में सिर अपना
    तो चैन तुम्हें आ जाता था
    बाबू-बाबू कहते रहते थे
    वह सब क्या था ? […]

  • सब सो जाते हैं पर मुझे नींद नहीं आती
    जितना उसको पाना चाहूँ
    उतना ही दूर चली जाती..!

    पलकें बंद करती हूँ स्वागत में उसके
    मन भी शांत रखती हूँ
    सुनती हूँ सदाबहार नगमें उसके लिए
    पर नहीं आती फ […]

  • ना जाने किन खयालों में
    खोई रहती है दुनिया
    मेरा-मेरा करती रहती है दुनिया
    अपनी तो देह भी साथ नहीं देती
    सब कुछ यहीं रह जाता है
    फिर किस मद में चूर रहती है दुनिया
    भाई हो या जीवनसाथी हो
    कोई साथ नहीं जाता
    बस […]

  • कितनी पागल हूँ मैं
    ये आज सोंचती हूँ
    तेरे चेहरे पर हर बार मरती हूँ..

    सुनती हूँ तेरी आवाज तो
    मयूर-सा नाच उठता है मन मेरा
    तेरे करीब होने पर
    सिहर उठता है तन मेरा..

    तेरे दूर जाने के खयाल से भी
    मेरा दम निकल […]

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