Suman Kumari

  • कविता- रावण हूं
    ———————-
    रावण हूं,
    राम नही ,
    राक्षस हूं,
    भगवान नही,
    अब की बार दशहरे में,
    पहले खुद राम बनो
    फिर आग लगाना मुझे|
    रघुकुल की पता होगी
    वे सत्य वचन पर,
    अटल रहे […]

    • पूर्ण कविता पढ़कर मेरा मार्गदर्शन करें🙏

  • धनुष उठा श्री राम का,
    रावण की अब खैर नहीं
    चलो आज विजय की बात करें,
    हो कहीं किसी से,बैर नहीं
    त्रेता युग में रावण ने,
    श्री राम को ललकारा था
    सीता माता का हरण किया,
    अतएव राम ने मारा था
    आज के युग म […]

    • कवि गीता जी की बहुत सुंदर व बेजोड़ कृति। कथ्य व शिल्प दोनों ही दृष्टियों से उम्दा रचना है। रावण बुराइयों का प्रतीक है। उसे समाप्त करने का सुन्दर संदेश दिया गया है।

      • कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी।
        रावण की बुराइयों का समूल नाश हम माता-पिता ही ,हर पुत्र को संस्कार का उचित ज्ञान देकर ही कर सकते हैं ।यही मेरी कविता का इस समाज को संदेश है ।

    • वाह बहुत खूब, अतिसुन्दर रचना

    • बहुत खूब लिखा है आपने

    • बहुत खूब

    • बहुत खूब

    • बहुत अच्छा है

  • *****हास्य – रचना*****
    कछुए और खरगोश की,
    पांच मील की लग गई रेस
    तीन मील पर खरगोश ने देखा,
    कछुआ तो अभी दूर बहुत है
    थोड़ा सा आराम करूं
    ना…ना वो सोया नहीं
    ये पुरानी नहीं, ये तो है कहानी […]

    • हा हा हा, बहुत बढ़िया

      • आपकी हंसी ही मेरी समीक्षा हुई आज तो सर , बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 सादर आभार

    • Nice line

    • कवि गीता जी की बेहतरीन हास्य रचना, कितनी बेहतरी से पुरानी कहानी में नया साम्य प्रस्तुत कर हास्य रचना की सृष्टि की है। जो वाली दोस्ती की बात उजागर की है वो दोस्ती होती ही गजब की पक्की है। बहुत खूब, कथ्य संप्रेषणीय है। हास्य अति सुंदर है

      • कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।दोस्ती तो दोस्ती ही होती है सर ,पक्की ही होती है । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

    • बहुत अच्छा गीता जी
      गंभीरता के बीच चटपटी गुदगुदाती रचना

      • कविता की समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत
        धन्यवाद राजीव जी🙏

  • Geeta kumari changed their profile picture 1 day, 10 hours ago

  • मेहनत का कल मेहनताना,
    फल पाने को मन ताना बाना |

    मेहनत की सीढ़ी लगन, मंजिल मेहनताना,
    मन आतुर पाने को मेहनताना |

    देह करौंदे, मेहनत का कड़वा खाना,
    मेहनत का स्वाद कुटकी जैसा |

    अनप […]

  • कविता- इबादत
    ————————
    परमेश्वर तेरा,
    धन्यवाद करता हूं,
    तेरी इबादत करता हूँ
    तुझे प्रणाम करता हूं|
    जब जब पुकारा,
    तूने साथ निभाया,
    मेरी मुराद पूरी करके,
    मुझे खुशहा […]

  • ज़िन्दगी, है एक चमत्कार
    हर सांस इसकी है,
    प्रभु का उपहार
    प्रभु की दी हुई नेमत है ये,
    यूं कुछ भी कह के
    ना कर बेकार..

    *****✍️गीता

  • मानव का गहना है वाणी,
    वाणी का भोगी है प्राणी ।
    मधुर वचन है मीठी खीर,
    कटु वचन है चुभता तीर ।
    सद वचन है सदा अनमोल,
    मन कांटे से इसको तौल ।
    हिय का रूप है वाणी, […]

  • वो, लेखन में मेरी
    बहुत मदद करता था
    कहीं कुछ कभी
    ग़लत लिख देती
    तो, काट के ठीक
    किया करता था
    सुन्दर-सुन्दर समीक्षाएं भी
    उसके ही दम पे
    किया करती थी
    वो ना दिखता था
    तो कितनी डरा करती थी
    ये राज़ की बात है […]

    • Kya baat hai

    • सुंदर

    • बहुत ही सुंदर हास्य रचना है, पहले ऐसा लगा कि यह क्या लिखा होगा क्यों लिखा होगा, लेकिन जब अंत तक पढ़ा तो पता चला कि यह एक बेहतरीन हास्य रचना है। इस विलक्षण प्रतिभा को सैल्यूट। बहुत खूब रचना

      • कविता की इतनी सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी । हास्य रचना में यदि कोई हंसे ही नहीं तो रचना कार कुछ मायूस सा हो जाता है, बुझ सा जाता है फिर हास्य लिखने की हिम्मत ही नहीं होती । आपका बहुत बहुत आभार कि आपने इस प्रतिभा को पहचाना,और इसे विलक्षण भी बताया ।🙏🙏 अभिवादन सर..

  • खामोशियों की भी,
    होती है एक ज़ुबान
    कह जाती हैं बहुत कुछ..
    बस, सुनने वाला चाहिए…

    *****✍️गीता

  • विदाई का ग़म किसी से छुपाया नहीं जाता,
    दिल की आह को दिखाया नहीं जाता |

    लाख करे कोशिश कोई ग़म छुपाने की,
    चेहरे को नहीं जरुरत इसे दिखाने की |

    विदाई एक अलगाव होती है,
    प्यार रिश्तों का विखराव होती है |

    कोई क […]

  • राजा दशरथ ने माना कहना,
    अपनी पत्नी कैकेई का
    एक वचन की खातिर देखो,
    बहु-बेटे वन में जाते हैं,
    प्राण त्यागने पड़े भले ही,
    आज दशरथ जी पूजे जाते हैं।
    श्री राम ने माना,
    कहना सीता जी का
    स्वर्ण-मृग के पीछे दौ […]

  • जब हम चले जाएंगे,
    ये दुनियां छोड़कर
    करोगे याद हमको,
    कभी ना कभी तो
    ऐसा क्या हुआ था,
    जो हम चल दिए
    सोच कर फरियाद करोगे,
    कभी ना कभी तो
    बस, इतनी सी इच्छा है हमारी,
    अन्तिम समझ कर तुम मान लेना
    कि हमक […]

  • ज़िन्दगी से कुछ लम्हे,
    बचाती रही
    एक बटुवे में उन्हें,
    सजाती रही
    सोचा था कि फुरसत से
    करूंगी खर्च,
    ज़िन्दगी में
    इसीलिए बचाती रही,
    कुछ लम्हे
    कुछ अपने लिए,
    कुछ अपने अपनों के लिए
    फ़िर ज़िन्दगी बीतनी थी, […]

  • सुंदर दिखना सबको भाता,
    हे जीवन के भाग्य विधाता ।
    तन की काया कुछ पल सुंदर ,
    मन की माया हर पल सुंदर ।
    तन सुंदर पर मन न हो कोमल,
    वह कुटिल मानव जैसा पुष्प सेमल,
    मन […]

  • ***ये तो कमाल ही है***
    सहेली, नहीं है किस्मत
    फ़िर भी रूठ जाती है
    पहेली,नहीं है बुद्धि,
    फ़िर भी उलझ जाती है
    आत्म-सम्मान, नहीं है बदन
    फ़िर भी चोट खाता है
    और इंसान, नहीं है मौसम
    फ़िर भी […]

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